छत्तीसगढ़ में एसीबी–ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई, पूर्व आबकारी आयुक्त सहित कई ठिकानों पर तड़के छापे

31

The Duniyadari : रायपुर। रविवार सुबह प्रदेश में एसीबी–ईओडब्ल्यू की टीमों ने एक साथ कई जिलों में कार्रवाई शुरू करते हुए आबकारी और डीएमएफ से जुड़े मामलों में करीब 18 ठिकानों पर दबिश दी। राजधानी रायपुर स्थित रामा ग्रीन कॉलोनी में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के आवास पर टीम ने छापा मारकर दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच शुरू की है।

इसी तरह अमलीडीह की ला विस्टा कॉलोनी में कारोबारी हरपाल अरोरा के घर भी छापेमारी की गई है। वहीं बिलासपुर में अशोक टूटेजा से जुड़े ठिकानों पर भी कार्रवाई की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के अनुसार अंबिकापुर, कोंडागांव और अन्य जिलों में भी एक साथ दबिश दी गई है, जिससे पूरे मामले के नेटवर्क को खंगाला जा सके।

शराब घोटाले का पूरा मामला क्या है?

प्रदेश में पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल (2019–2023) के दौरान शराब नीति में बदलाव के बाद सप्लाई व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप सामने आया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, चुने हुए सप्लायरों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में ऐसी व्यवस्था बनाई गई जिससे कुछ कंपनियों को एकाधिकार जैसा फायदा मिल सके।

बाद में खुलासा हुआ कि इन कंपनियों ने नकली होलोग्राम और नकली सील तैयार करवाईं, जिन्हें लगाने के बाद महंगी शराब की बोतलों को सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचा गया। चूंकि हॉलोग्राम फर्जी थे, इसलिए वास्तविक बिक्री शासन के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं होती थी, और एक्साइज टैक्स की वसूली भी नहीं हो पाती थी। इसी तरह राज्य को लगभग 2165 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।

जांच में बताया गया है कि इस अवैध कमाई का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों, निर्माण कार्यों और कई अन्य स्तरों पर बांट-फाड़ में किया गया।

अब तक हुई कार्रवाई

इस घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, रायपुर के कारोबारी अनवर ढेबर, और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल सहित कई नाम आरोपी के रूप में सामने आ चुके हैं। इनमें से कई को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों पर भी मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।

आज की बड़ी कार्रवाई को घोटाले की कड़ियों को आगे जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जांच एजेंसियाँ seized दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की छानबीन कर रही हैं।