Tuesday, March 17, 2026
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अयोध्या धाम में रामलला का दिव्य श्रृंगार, प्रतिदिन बदलता है प्रभु का अलौकिक रूप

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The Duniyadari:

रामलला की नगरी राम जन्मभूमि मंदिर में हर दिन प्रभु का भव्य और आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में विराजमान रामलला भक्तों को प्रतिदिन अलग-अलग रूप में दर्शन देते हैं, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर में सुबह की शुरुआत प्रभु को जगाने की परंपरा से होती है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू होती है। रामलला को स्नान कराया जाता है, सुगंधित लेप लगाया जाता है और फिर मौसम के अनुरूप नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। गर्मी के दिनों में उन्हें हल्के और सूती वस्त्र पहनाए जाते हैं, जबकि सर्दियों में ऊनी और गर्म कपड़ों से श्रृंगार किया जाता है।

भगवान के श्रृंगार में फूलों का विशेष महत्व होता है। रामलला को पहनाई जाने वाली फूलों की माला विशेष रूप से दिल्ली से मंगाई जाती है, जिससे प्रभु का रूप और भी मनमोहक हो जाता है।

मंदिर की दिनचर्या के अनुसार सुबह 6:30 बजे पहली आरती होती है। इसके बाद दिनभर अलग-अलग समय पर पूजा और आरती का क्रम चलता रहता है। दोपहर 12 बजे भोग आरती होती है, जबकि शाम 7:30 बजे संध्या आरती के साथ भक्तों के दर्शन का समय समाप्त हो जाता है। इसके बाद रात 8:30 बजे प्रभु को शयन कराया जाता है।

रामलला को दिन में चार बार भोग अर्पित किया जाता है। सुबह की शुरुआत बाल भोग से होती है, जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रसाद और व्यंजन शामिल रहते हैं। ये सभी व्यंजन मंदिर की रसोई में ही शुद्धता और परंपरा के अनुसार तैयार किए जाते हैं।

इसी क्रम में चैत्र माह कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, विक्रम संवत 2082 (17 मार्च, मंगलवार) को अयोध्या धाम में ब्रह्मांड नायक रामलला सरकार का विशेष और अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसके दिव्य दर्शन से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।