Wednesday, March 25, 2026
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लेमरू हाथी रिजर्व में तालाब निर्माण पर घोटाले के आरोप, 16 लाख का काम एक हफ्ते में निपटाने का दावा

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The Duniyadari: कोरबा-कटघोरा वनमंडल के जंगलों में वन्यजीवों के लिए बनाए जा रहे जलस्त्रोतों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लेमरू हाथी रिजर्व विकास परियोजना के तहत स्वीकृत तालाब निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि करोड़ों रुपये की योजना जमीनी स्तर पर केवल कागजों तक सीमित होती जा रही है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में केंदई वनपरिक्षेत्र में हाथियों के लिए लगभग 11 तालाबों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। इनका उद्देश्य गर्मी के मौसम में जंगलों में घूम रहे हाथियों और अन्य वन्यजीवों को पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन कई स्थानों पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

केंदई वनपरिक्षेत्र के ग्राम पतुरियाडाँड़ के जंगल में बनाए गए तालाब को लेकर ग्रामीणों ने सबसे गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि इस तालाब के लिए करीब 16 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य बेहद सीमित दिखाई देता है। ग्रामीणों का दावा है कि पहले से मौजूद एक छोटे नाले को ही थोड़ा-बहुत चौड़ा कर तालाब का रूप दे दिया गया।

ग्रामीणों के अनुसार पूरा काम महज एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया गया। मजदूरों को काम देने की बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों से कार्य कराए जाने का उल्लेख बताया जा रहा है। वहीं जंगल से ही पत्थर निकालकर निर्माण किया गया, जिससे लागत और भी कम हो गई।

स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब यह तथाकथित तालाब पानी तक नहीं रोक पा रहा है। वर्तमान में तालाब पूरी तरह सूखा पड़ा हुआ है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के निर्माण से न तो वन्यजीवों को लाभ मिलेगा और न ही योजना का उद्देश्य पूरा होगा।

इस पूरे मामले में केंदई वनपरिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक दुबे की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह मामला अकेला नहीं है और क्षेत्र में पहले भी कई निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में और भी मामलों का खुलासा हो सकता है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कटघोरा और कोरबा वनमंडल में तालाब, स्टॉप डेम और वन मार्ग निर्माण जैसे कार्यों में पहले भी धांधली की शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती रही है।