Thursday, April 16, 2026
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सतरेंगा में वन विभाग की छापेमारी से खुला अवैध लकड़ी कारोबार का जाल, कार्रवाई पर उठे सवाल

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The Duniyadari: कोरबा- जिले के सतरेंगा क्षेत्र में वन विभाग की हालिया बड़ी कार्रवाई ने अवैध लकड़ी कारोबार की गहरी परतों को उजागर किया है।

बालको वन परिक्षेत्र में एक साथ छह अलग-अलग स्थानों पर की गई छापेमारी में भारी मात्रा में लकड़ी बरामद की गई, जिसमें पुरानी और नई दोनों तरह की लकड़ी शामिल होने की बात सामने आई है।

इस बरामदगी के बाद मामले की गंभीरता और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

वन विभाग के अनुसार, वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई में कुल 359 नग लकड़ी (लगभग 5.405 घनमीटर) जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 4.25 लाख रुपये बताई जा रही है। अलग-अलग घरों से इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी मिलना यह संकेत देता है कि मामला केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं हो सकता।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि कुछ घरों में वर्षों से रखी गई पुरानी लकड़ी भी जब्ती की सूची में कैसे शामिल हुई।

यदि यह लकड़ी निजी उपयोग के लिए लंबे समय से रखी गई थी, तो उस पर कार्रवाई का आधार क्या है? वहीं, यदि यह अवैध थी, तो इतने समय तक वन विभाग की निगरानी से यह कैसे बची रही?

ग्रामीणों और जानकारों के बीच यह भी चर्चा है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का संग्रह और संभावित व्यापार बिना किसी संगठित संरचना या संरक्षण के संभव नहीं है।

ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं न कहीं सिस्टम की चूक या मिलीभगत की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर, वन विभाग इस कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहा है, लेकिन अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या जांच केवल छोटे स्तर तक सीमित रहेगी या फिर इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद बड़े चेहरों तक पहुंचेगी।

फिलहाल विभाग ने आगे वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। असली परीक्षा अब इस बात की होगी कि जांच निष्पक्ष और व्यापक होती है या यह मामला केवल जब्ती तक ही सीमित रह जाता है।