The Duniyadari: कमर दर्द की शिकायत लेकर पहुंचीं सविता जायसवाल, तीन दिन बाद मौत… परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप
कोरबा। शहर में बड़े-बड़े अस्पतालों की चमकती इमारतों और मल्टी स्पेशलिटी के नाम के बीच मरीजों की सुरक्षा और विशेषज्ञ चिकित्सा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। लालूराम कॉलोनी निवासी श्रीमती सविता जायसवाल की अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मौत के बाद परिजनों ने शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
परिजनों के मुताबिक, 4 अगस्त की रात सविता जायसवाल को कमर में तेज दर्द की शिकायत के बाद नजदीकी होने के कारण शिवाय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि जांच के बाद उन्हें बताया गया कि रीढ़ की हड्डी में समस्या है और ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण उन्हें NIV सपोर्ट दिया गया।
NIV बार-बार निकलता रहा, निगरानी पर सवाल
मृतका की बेटी सोनाली का आरोप है कि उनकी मां NIV सपोर्ट बार-बार निकाल देती थीं, लेकिन रात के समय मरीज की पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। परिजनों का दावा है कि हालत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और इसके कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई।
परिवार का सवाल है कि जब मरीज बार-बार NIV निकाल रहा था, तो उसकी लगातार निगरानी क्यों नहीं की गई? समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकीय हस्तक्षेप क्यों नहीं किया गया?
“मां की मौत सामान्य नहीं” — परिजनों का आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय पर उचित इलाज और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधा मिलती, तो शायद सविता जायसवाल की जान बचाई जा सकती थी।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और अस्पताल की वास्तविक चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी जांच होनी चाहिए।
मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधाओं पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल बड़ी बिल्डिंग और “मल्टी स्पेशलिटी” नाम रख देने से अस्पताल मरीजों को विशेषज्ञ उपचार की गारंटी दे सकता है?
यदि किसी अस्पताल में गंभीर मरीज भर्ती होते हैं, तो वहां विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ, पर्याप्त मॉनिटरिंग और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था कितनी उपलब्ध है—इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
अब जांच से सामने आना चाहिए सच
सविता जायसवाल की मौत के बाद परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उपलब्ध रिकॉर्ड, उपचार की प्रक्रिया, डॉक्टरों की ड्यूटी, नर्सिंग स्टाफ की निगरानी और मरीज को दिए गए उपचार की जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है, लेकिन इस घटना ने कोरबा की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर अस्पताल की पहचान उसकी चमकदार इमारत से होगी या मरीज को मिलने वाली विशेषज्ञ और सुरक्षित चिकित्सा से?















