Monday, August 10, 2026
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सीतामणी में ‘कूलर-अलमारी’ की आड़ में नकली यूरिया का खेल! दीपका कनेक्शन से खुली परतें

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The Duniyadari: कोरबा-  जिले में नकली यूरिया के कथित कारोबार को लेकर सनसनी फैल गई है। कोतवाली थाना क्षेत्र के सीतामणी इलाके में आलमारी और कूलर निर्माण की आड़ में कथित तौर पर नकली यूरिया तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले की जांच की कड़ियां दीपका में पकड़े गए नकली यूरिया से भरे कंटेनर तक पहुंच रही हैं।

पुलिस जांच में शिवा इंटरप्राइजेज के संचालक अनूप अग्रवाल का नाम सामने आया है। दीपका थाना प्रभारी प्रेम चंद साहू के अनुसार आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा किया जाएगा।

जिस जगह बनते थे कूलर-अलमारी, वहीं चल रहा था कथित ‘नकली यूरिया’ का कारोबार?

सीतामणी स्थित परिसर में बाहर से सामान्य कारोबारी गतिविधियां नजर आती थीं, लेकिन पुलिस जांच के बाद अब इसी जगह को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या यहां लंबे समय से नकली यूरिया तैयार किया जा रहा था? यदि ऐसा था तो इसकी भनक संबंधित विभागों को क्यों नहीं लगी?

दीपका में नकली यूरिया से भरे कंटेनर पर हुई कार्रवाई के बाद जांच आगे बढ़ी और सीतामणी से इसके तार जुड़ने की बात सामने आई। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर तैयार किया गया उत्पाद कहां भेजा जाता था और इस पूरे काम में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

नकली DEF से वाहनों को भी नुकसान का खतरा

डीजल वाहनों में इस्तेमाल होने वाला DEF (Diesel Exhaust Fluid) उत्सर्जन नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है। आधुनिक कमर्शियल वाहनों में SCR सिस्टम के जरिए यह प्रदूषणकारी गैसों को कम करने में मदद करता है।

ऐसे में यदि DEF की गुणवत्ता से कथित तौर पर समझौता किया गया हो, तो इसका असर केवल खरीदार की जेब पर ही नहीं, बल्कि वाहन के महंगे उत्सर्जन नियंत्रण सिस्टम पर भी पड़ सकता है।

जांच में कई सवालों के जवाब बाकी

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीतामणी में कथित तौर पर तैयार किया जा रहा नकली उत्पाद आखिर कितने स्थानों तक पहुंचा? कितनी मात्रा में इसकी सप्लाई हुई? किन वाहनों में इसका इस्तेमाल हुआ और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं?

दीपका की कार्रवाई से शुरू हुई जांच अब सीतामणी तक पहुंच चुकी है। पुलिस की आगामी कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नकली यूरिया कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।