Sunday, August 23, 2026
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करोड़ों की ‘ब्लैक करेंसी’ ठगी का अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा, 7 आरोपी गिरफ्तार

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The Duniyadari: रायपुर। राजधानी रायपुर पुलिस ने ‘ब्लैक करेंसी’ के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में दबिश देकर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरोह एक व्यक्ति को उसकी रकम कम समय में दोगुनी करने का लालच देकर ठगी करने की तैयारी में था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी, 17 मोबाइल फोन, नोटों के आकार में तैयार किए गए काले कागज, कांच की प्लेटें, केमिकल और ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की है।

रायपुर में भी 1.13 करोड़ की ठगी का आरोप

पुलिस की जांच में पता चला कि इसी गिरोह ने रायपुर में भी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर कथित तौर पर 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस के मुताबिक गिरोह लंबे समय से अलग-अलग राज्यों में इसी तरीके से लोगों को निशाना बनाता रहा है।

दो आरोपियों की गिरफ्तारी से खुला नेटवर्क

तेलीबांधा थाने में दर्ज मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पहले कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय और दीपिका पॉलीवाल को गिरफ्तार किया था। उनके पास से मोबाइल फोन, नकदी, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड मिले थे।

पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल में मौजूद चैट, फोन नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच की तो गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने के सुराग मिले। तकनीकी निगरानी के दौरान आरोपियों की गतिविधियां पुणे में सामने आईं, जिसके बाद रायपुर से पुलिस टीम महाराष्ट्र रवाना की गई।

एक सप्ताह तक रखी नजर, फिर रिसॉर्ट में कार्रवाई

पुणे पहुंची टीम ने संभावित ठिकानों और संदिग्धों की गतिविधियों पर करीब एक सप्ताह तक निगरानी रखी। इसी दौरान खंडाला के एक रिसॉर्ट में गिरोह के सदस्यों के ठहरने की जानकारी मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की तो आरोपी एक व्यक्ति से बड़ी रकम लेकर उसे दोगुना करने का झांसा देते हुए मिले।

पुलिस के मुताबिक पीड़ित वाराणसी का रहने वाला है और वह करोड़ों रुपये लेकर वहां पहुंचा था। आरोपियों ने रकम दोगुनी करने का लालच देकर उससे पैसे हासिल कर लिए थे। इसी दौरान पुलिस ने दबिश देकर सातों आरोपियों को पकड़ लिया। सभी को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाकर पूछताछ की जा रही है।

कई शहरों तक फैला था नेटवर्क

पूछताछ में पुलिस को गिरोह के छत्तीसगढ़ के अलावा नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर और दिल्ली समेत कई स्थानों पर सक्रिय होने की जानकारी मिली है। पुलिस का दावा है कि गिरोह वर्ष 2005 से इस तरह की ठगी कर रहा था और अब तक देशभर में 100 से अधिक लोगों को निशाना बना चुका है।

गिरोह में प्रत्येक सदस्य की अलग भूमिका तय रहती थी। ठगी से हासिल रकम को सदस्यों के बीच तय हिस्सेदारी के आधार पर बांटा जाता था। पुलिस के मुताबिक प्रवीण कुमार श्रीवास्तव और मनोज कुमार श्रीवास्तव पहले भी ठगी के मामलों में जेल जा चुके हैं।

डी ग्रुप’ से संबंध का दावा कर डराते थे

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी खुद को कथित तौर पर ‘डी ग्रुप कंपनी’ या दाऊद ग्रुप से जुड़ा हुआ बताते थे। प्रभाव जमाने के लिए वे बड़े नेताओं और फिल्मी हस्तियों के साथ तस्वीरें दिखाते थे। कुछ प्रमुख सदस्य निजी सुरक्षा गार्ड भी रखते थे, जिससे पीड़ितों पर उनका प्रभाव और दबाव बना रहे।

गिरोह संभावित शिकार को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और नागपुर जैसे शहरों के बड़े होटलों में बुलाता था। वहां पहले विश्वास कायम किया जाता और फिर कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर बड़ी रकम हासिल की जाती थी।

काले कागज को नोट में बदलने का दिखाते थे झांसा

पुलिस के मुताबिक ठगी के लिए गिरोह ‘वॉश-वॉश’ तकनीक का इस्तेमाल करता था। इसमें नोट के आकार के काले कागजों को विशेष रसायन से साफ कर असली नोट में बदलने का झूठा प्रदर्शन किया जाता था।

शुरुआत में कुछ असली नोटों पर रासायनिक प्रक्रिया करके पीड़ित को विश्वास दिलाया जाता था कि यह तरीका वास्तव में काम करता है। इसके बाद विदेशी केमिकल, जांच, अधिकारियों की मंजूरी और रकम रिलीज कराने जैसी अलग-अलग बातों का हवाला देकर पीड़ित से लगातार पैसे मांगे जाते थे। बड़ी रकम मिलने के बाद आरोपी वहां से निकल जाते और पीड़ित के पास केवल काले कागज रह जाते थे।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार

पुलिस ने ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी (46), प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन/शेट्टी/रेड्डी (52), मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर (55), विवेक सिंह (48), शुभम पांडेय (37), योगेन्द्र चौहान (48) और बालमुकुंद दीक्षित (40) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों का संबंध हरियाणा, मुंबई और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से बताया गया है।

पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए जांच आगे बढ़ा रही है। साथ ही अलग-अलग राज्यों में इस नेटवर्क द्वारा की गई संभावित ठगी की घटनाओं का भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।