The Duniyadari: रायपुर, 22 अगस्त। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने निर्देश के बावजूद तय अवधि में मामले का निपटारा नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है। गरियाबंद के एक स्वास्थ्यकर्मी के स्थानांतरण से जुड़े मामले में कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया को अवमानना नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि आदेश का पालन नहीं होने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
स्थानांतरण को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे कर्मचारी
मामला गरियाबंद निवासी दायासिंह ध्रुव से संबंधित है, जो सीएमएचओ कार्यालय में ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे। गरियाबंद कलेक्टर के आदेश से उनका तबादला मैनपुर कर दिया गया था। ध्रुव ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
छह महीने में फैसला लेने का दिया था निर्देश
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को निर्देश दिया था कि संबंधित कर्मचारी के अभ्यावेदन पर सुप्रीम कोर्ट के एसके नौशाद रहमान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में निर्धारित न्यायिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए। इसके लिए अदालत ने छह महीने की समय-सीमा तय की थी।
समय सीमा खत्म होने के बाद दायर हुई अवमानना याचिका
याचिकाकर्ता का कहना है कि निर्धारित छह महीने बीत जाने के बाद भी उसके मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। स्थानांतरण आदेश को लेकर भी राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत की।
कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं किया गया। उन्होंने न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12(1) का भी उल्लेख किया।
दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे जवाब मांगा है कि न्यायालय के पूर्व आदेश का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने पर उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई क्यों न प्रारंभ की जाए।



































