The Duniyadari: गेवरा बस्ती/कोरबा। गेवरा क्षेत्र में भू-अधिग्रहण के बदले रोजगार और प्रभावित परिवारों के अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। रविवार, 20 सितंबर को क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ग्रामीणों के साथ खोड़री फेस पहुंचे। यहां फिलहाल KNR कंपनी के माध्यम से खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मौके पर ग्रामीणों ने रोजगार से जुड़े मामलों को लेकर SECL प्रबंधन के प्रति नाराजगी जताई।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों में वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद राजकुमार कंवर, वार्ड 26 के पार्षद प्यारेलाल दिवाकर, वार्ड 27 के पार्षद इंद्रजीत बिंझवार, वार्ड 28 के पार्षद श्रवण यादव और ग्राम बता के प्रतिनिधि आदर्श बघेल शामिल रहे।
प्रभावितों को पीछे छोड़ने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि खनन परियोजना के लिए जिन परिवारों की जमीन प्रभावित हो रही है, रोजगार उपलब्ध कराने में उन्हें अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है। आरोप है कि परियोजना से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होने वाले लोगों को भी रोजगार का अवसर दिया जा रहा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब परियोजना का सीधा असर उनकी जमीन और आजीविका पर पड़ रहा है, तो रोजगार के मामले में सबसे पहले उन्हीं परिवारों के हितों को देखा जाना चाहिए।

प्रबंधन के रवैये पर भी नाराजगी
खोड़री फेस पहुंचे लोगों ने SECL प्रबंधन पर प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार नहीं किए जाने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा और समाधान की आवश्यकता है।
इस दौरान रोजगार के अलावा प्रबंधन और प्रभावित परिवारों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने तथा ग्रामीणों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किए जाने की मांग भी सामने आई।
बैठक में मोबाइल रखने का दावा
ग्रामीणों ने एक बैठक को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि SECL की बैठक के दौरान कुछ ग्रामवासियों के मोबाइल फोन जमा कराए गए थे। ग्रामीणों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि बड़े संगठनों के पदाधिकारियों को बैठकों में अलग तरह का सम्मान मिलता है, जबकि प्रभावित गांव के आम ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार में अंतर किया जाता है।
इन आरोपों को लेकर SECL प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रबंधन का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
आंदोलन के बाद भी कायम है रोजगार का सवाल
गेवरा बस्ती के ग्रामीण इससे पहले भू-अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। आंदोलन के बाद प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय चर्चा होने की बात भी सामने आई थी। ग्रामीण


















