The Duniyadari: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से आंशिक राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने बिलासपुर हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि भाजपा नेता विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका पर आगे बढ़ने से पहले भूपेश बघेल की समय-सीमा संबंधी आपत्ति का निराकरण किया जाए। इस आदेश के बाद अब हाईकोर्ट में सबसे पहले यह तय होगा कि चुनाव याचिका निर्धारित कानूनी अवधि के भीतर दायर की गई थी या नहीं
45 दिन की समय-सीमा पर उठा विवाद
मामले की शुरुआत वर्ष 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव से हुई थी। भाजपा नेता विजय बघेल ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके बाद भूपेश बघेल की ओर से अदालत में आवेदन पेश कर दलील दी गई कि चुनाव याचिका तय समय-सीमा के भीतर विधिवत दाखिल नहीं की गई है, इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए।
भूपेश बघेल की ओर से समय-सीमा को लेकर उठाई गई आपत्ति पर पहले भी हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी थी। हालांकि, अदालत ने उस समय आवेदन स्वीकार नहीं किया था और चुनाव याचिका की सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
28 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की चुनौती पर विजय बघेल की चुनाव याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से दलील दी गई कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिनों की अवधि का पालन नहीं हुआ है। 
इस मामले में 17 सितंबर 2026 को बिलासपुर हाईकोर्ट ने भी समय-सीमा के आधार पर चुनाव याचिका खारिज करने की मांग वाला आवेदन अस्वीकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका पेश किए जाने की वास्तविक तारीख, उसमें पाई गई कमियों और उनके बाद में दूर किए जाने के कानूनी प्रभाव का परीक्षण रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना जरूरी है |
हाईकोर्ट के 17 सितंबर के आदेश के अनुसार, चुनाव याचिका में साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत ने मामले को 5 अक्टूबर 2026 को चुनाव याचिकाकर्ता के साक्ष्य दर्ज करने के लिए सूचीबद्ध किया है। 
फिलहाल चुनाव याचिका की वैधता और पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। समय-सीमा तथा अन्य कानूनी आपत्तियों पर अंतिम निष्कर्ष और चुनाव याचिका के गुण-दोष पर फैसला अदालत की आगे की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को आपत्ति पर नए सिरे से शुरुआती स्तर पर सुनवाई करने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि मामले में हस्तक्षेप से इनकार किया है। इसलिए इसे केवल आंशिक राहत या हाईकोर्ट को नए निर्देश मिलने के रूप में प्रकाशित करना सही नहीं होगा।



















