The Duniyadari: कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित चंद्रनगर-जटराज के ग्रामीणों ने एसईसीएल पर दबाव बनाने का लगाया आरोप, 28 सितंबर को घंटाघर से कलेक्टोरेट तक करेंगे दंडवत न्याय यात्रा।
कोरबा। कोयला खनन के लिए अपनी जमीन देने वाले परिवारों के सामने अब सिर छिपाने की जगह बचाने का सवाल खड़ा हो गया है। कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित दर्री तहसील के चंद्रनगर-जटराज में पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। करीब 200 परिवारों का आरोप है कि रहने के लिए समुचित वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना ही उन्हें अपने घर खाली करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन के जरिए प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे।
दशकों पहले जमीन दी, आज भी पुनर्वास का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक, कुसमुंडा परियोजना के लिए उनकी जमीन अलग-अलग समय पर अधिग्रहित की गई थी। वर्ष 1978-79, 1982-83, 1984-85 और फिर 2010 में जमीन अर्जित की गई। इसके बावजूद अनेक परिवारों को अब तक स्थायी बसाहट नहीं मिल पाई है।
प्रभावितों का कहना है कि अंतिम चरण में जमीन अधिग्रहण हुए करीब 16 साल बीत चुके हैं, लेकिन पुनर्वास का मसला अब भी अधूरा है। इसी बीच मकान खाली कराने के लिए दबाव बनाए जाने और घर नहीं हटाने पर डोजरीकरण किए जाने की बात कहे जाने का आरोप लगाया गया है।
अधूरी सुविधाओं के बीच आखिर कहां जाएंगे परिवार?
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि कुछ परिवार दबाव के चलते अपने आशियाने तोड़ने तक को मजबूर हो गए हैं। उनका आरोप है कि पहले मकान हटाने और बाद में मुआवजा व बसाहट देने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रस्तावित पुनर्वास स्थल की सुविधाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह विकसित नहीं हुई हैं। ऐसे में परिवारों को वहां रहने के लिए भेजना उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
बरसात में उजड़ने का डर, बच्चों की पढ़ाई पर भी संकट
बारिश के मौसम में मकान खाली कराने की आशंका ने प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि घर छूटने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी, वहीं महिलाओं और बुजुर्गों को रहने तथा स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
उनका कहना है कि वर्षों पहले कोयला उत्खनन के लिए जमीन देने वाले परिवार आज भी स्थायी ठिकाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में बिना ठोस पुनर्वास व्यवस्था के मकान खाली कराने की कवायद ने उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
न्याय की गुहार लेकर दंडवत पहुंचेंगे कलेक्टोरेट
अपनी मांगों को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने 28 सितंबर को दंडवत न्याय यात्रा निकालने की घोषणा की है। यह यात्रा सुबह 9 बजे कोरबा के घंटाघर चौक से शुरू होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी।
ग्रामीणों के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों सहित करीब 200 लोगों के शामिल होने की संभावना है। दंडवत यात्रा के जरिए ग्रामीण पुनर्वास की समस्या और मकान खाली कराने के दबाव को प्रशासन के सामने उठाएंगे।
ग्रामीणों की मांग: पुनर्वास पूरा होने तक न हटाए जाएं मकान
प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए बिना मकान तोड़ने और डोजरीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। ग्रामीण चाहते हैं कि पहले उन्हें रहने योग्य स्थान दिया जाए और नए मकान तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले।
अब प्रभावित परिवारों की निगाहें प्रशासन की पहल पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लंबित पुनर्वास के सवाल का समाधान किए बिना बेदखली की कार्रवाई उनके साथ अन्याय होगी।



















