Tuesday, March 10, 2026
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BIG BREAKING : नदी में डूबे डिप्टी डायरेक्टर का 9 दिन बाद मिला शव, पत्नी जज, भाई IAS और पिता रिटायर्ड अफसर

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उन्नाव– उन्नाव में गंगा नदी में डूबे जज के पति आदित्यवर्धन सिंह उर्फ गौरव (45) का शव मिल गया। वह 31 अगस्त यानी 9 दिन पहले सेल्फी लेने के दौरान गंगा में बह गए थे। आदित्यवर्धन सिंह हेल्थ विभाग में डिप्टी डायरेक्टर थे। वाराणसी में पोस्टेड थे। उनकी पत्नी श्रेया मिश्रा महाराष्ट्र के अकोला में जज हैं।

रविवार रात 8 बजे आदित्यवर्धन का शव कानपुर में गंगा बैराज गेट नंबर 1 पर फंसा मिला। नवाबगंज थाना पुलिस ने शव मिलने की सूचना बिल्हौर पुलिस को दी। इसके बाद परिजनों को सूचना दी गई। आदित्यवर्धन के दोस्त संतोष पटेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव की शिनाख्त की।

शव पोस्टमॉर्टम के लिए नवाबगंज भेजा गया है। शव को गांव लाया जाएगा। उसी नानामऊ घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहां वे डूब गए थे। हादसे के बाद जज की तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएससी के 200 से ज्यादा जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे थे।

करीब 45 किमी गंगा में उनकी तलाश की गई थी। ड्रोन से भी इलाके को खंगाला गया। हालांकि, 7 दिन तक सर्च ऑपरेशन के दौरान उनका शव नहीं मिला था। इसके बाद गंगा में सर्च ऑपरेशन बंद कर दिया था। हालांकि, पुलिस ने हर घाट पर तीन -तीन पुलिस कर्मी एक दरोगा को तैनात किया था।

आदित्यवर्धन बांगरमऊ क्षेत्र के कबीरपुर गांव के मूल निवासी थे। वे लखनऊ के इंदिरानगर में रहते थे। 31 अगस्त को आदित्यवर्धन मोहल्ले के दो दोस्तों प्रदीप तिवारी और योगेश्वर मिश्रा के साथ कार से बिल्हौर (उन्नाव) के नानामऊ घाट पहुंचे थे। पास में ही उनका गांव था। ऐसे में वह घाट पर ही दोस्तों के साथ नहाने लगे। पुलिस ने बताया था कि आदित्यवर्धन सिंह को तैरना आता था। ओवर कॉफिडेंस में वह सेल्फी लेने के लिए गहरे पानी में डूब गए थे।

आदित्यवर्धन के चचेरे भाई अनुपम कुमार सीनियर आईएएस हैं। वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव हैं। भाभी प्रतिमा सिंह भी बिहार कैडर की IAS हैं। बहन प्रज्ञा आस्ट्रेलिया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। हादसे के वक्त आदित्यवर्धन के माता-पिता भी आस्ट्रेलिया में थे। बेटे के डूबने की खबर सुनकर वह आनन-फानन में उन्नाव पहुंच गए। आदित्यवर्धन के एक बेटी है, जो उनकी पत्नी के साथ अकोला में रहती है।

गंगा में सर्च के दौरान आस्ट्रेलिया से आए आदित्यवर्धन के पिता रमेश चंद्र, मां शशि प्रभा और बहन प्रज्ञा 4 दिन तक घाट किनारे आस लगाए बैठे रहे। हालांकि, सर्च ऑपरेशन के बंद होने के बाद परिवार इंदिरा नगर स्थित घर लौट आया था। मां और पिता ने बातचीत के दौरान कहा था कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि क्या करें? जब तक बेटे की लाश नहीं मिल जाएगी, उसे मरा हुआ नहीं मान सकते।

मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते पुलिस-प्रशासन ने आदित्यवर्धन सिंह की तलाश में पूरी सर्चिंग की। डीसीपी वेस्ट राजेश कुमार सिंह ने बताया था कि कानपुर से लेकर प्रयागराज तक गंगा की सीमा से जुड़े सभी थानों पर हादसे की जानकारी दी गई है। इससे कि गंगा में कानपुर से प्रयागराज तक कोई भी शव मिलते, तो उसकी जांच-पड़ताल हो सके। इसके साथ ही लापता डिप्टी डायरेक्टर के पोस्टर और तस्वीरें भी जारी की गई थीं।