The Duniyadari: Raipur/नई दिल्ली- नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अव्यवस्थाओं के बाद केंद्र सरकार अब 21 जून को प्रस्तावित री-टेस्ट को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार कई बड़े और सख्त कदमों पर काम कर रही है। इसी क्रम में प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों के इस्तेमाल का विकल्प भी गंभीरता से चर्चा में है।
सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि परीक्षा प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह पूरी तरह अभेद्य बनाया जाए।
जानकारी के अनुसार, वायुसेना के विमानों की मदद से प्रश्नपत्रों को सीधे सुरक्षित केंद्रों तक पहुंचाने की योजना पर विचार किया गया, ताकि किसी भी स्तर पर लीक या छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है। सूत्र बताते हैं कि इस संबंध में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय खुद इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया की लगातार निगरानी कर रहा है। पेपर सेटिंग से लेकर प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षा तक हर स्तर की रिपोर्ट सीधे पीएमओ तक पहुंच रही है।
बैठक में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। अधिकारियों ने परीक्षा संचालन से जुड़े सभी संवेदनशील पहलुओं की समीक्षा की। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों की चयन प्रक्रिया, सुरक्षित प्रिंटिंग सिस्टम, पेपरों की निगरानी और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया।
सरकार का उद्देश्य साफ है कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की चूक न हो और छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल किया जा सके।















