न्यूज डेस्क।मेटल और माइनिंग ग्रुप Vedanta Ltd केचेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता अपने अहम बिजनेस वर्टिकल्स को अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में विभाजित करने की योजना की रूपरेखा मार्च के अंत तक घोषित कर देगी । उन्होंने कहा कि ऐसा करने का लक्ष्य निवेशकों के लिए वैल्यू क्रिएट करना, कंपनी के कारोबार को सरल और आसान करना है।

बता दें कि कंपनी का जिंक बिजनेस पहले से ही एक सब्सिडियरी के तौर पर बाजार में लिस्टेड है। इसके अलावा अब कंपनी के एल्युमिनियम, आयरन और स्टील के साथ ही तेल और गैस कारोबार को भी अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों के रुप में गठित करने की योजना है।
पीटीआई को दिए गए इंटरव्यू में अनिल अग्रवाल ने कहा कि इससे कंपनी के स्टेक होल्डरों के लिए वैल्यू अनलॉक होगी और यह अलग-अलग कंपनियां ज्यादा बेहतर तरीके से अपने सेक्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेगी और लॉन्ग टर्म में बेहतर ग्रोथ दे सकेंगी।

उन्होंने इस बातचीत में कहा कि यह डीमर्जर स्वाभाविक प्रक्रिया के तौर पर हो रहा है। बाजार काफी अच्छा है और वेदांता के अलग-अलग डिवीजन में अच्छा प्रोडक्शन हो रहा है। हमारा मानना है कि अलग-अलग कारोबार के लिए अलग-अलग कंपनियों के गठन से अच्छी वैल्यू क्रिएट होगी। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि अगले 1 से डेढ़ महीने में या मार्च के खत्म होने से पहले हम अपनी इस डीमर्जर की रूपरेखा पेश कर देंगे।

बताते कि वेदांता ने पिछले साल नवंबर में एलान किया था कि उसके बोर्ड ने कंपनी के एल्युमीनियम, आयरन और स्टील और ऑयल एंड गैस बिजनेस को अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों के रुप में गठित करने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टरों की एक समिति का गठन किया है। कंपनी ने तब यह भी बताया था कि कमिटी के सिफारिश के आधार पर कंपनी का बोर्ड स्ट्रेटजिक भागीदारी जैसे दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।

इस डीमर्जर के बाद वेदांता ग्रुप से टूट कर 3 नई लिस्टेड कंपनियां बनेंगी । इसके बाद लंदन स्थिति पेरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेस ग्रुप में 5 लिस्टेड कंपनियां होगी। इन 5 लिस्टेड कंपनियों में से 4 लिस्टेड कंपनियां ऐसी होगी जिनकी शेयरहोल्डिंग सामान होगी। इन 4 कंपनियों में Vedanta Ltd औऱ 3 नई लिस्ट होने वाली कंपनियां शामिल होंगी। ग्रुप की पहले से ही लिस्टेड सब्सिडियरी Hindustan Zinc Limited (HZL) में वेदांता लिमिटेड की 64.9 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी।

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