Wednesday, October 28, 2026
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एक नंबर पर दो गाड़ियां! एक्टिवा के नंबर पर दौड़ रही थी स्प्लेंडर, कोरबा में मचा हड़कंप

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The Duniyadari: कोरबा। सड़क पर दौड़ रही एक बाइक की नंबर प्लेट ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया कि मामला सीधे पुलिस चौकी तक पहुंच गया। मानिकपुर चौकी क्षेत्र के दादर रोड पर एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर की दो अलग-अलग गाड़ियां सामने आने का मामला उजागर हुआ है। एक्टिवा के नंबर पर स्प्लेंडर चलती देख वाहन मालिक के परिजन को संदेह हुआ। उन्होंने बाइक सवार को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। अब सवाल है कि आखिर एक वाहन का नंबर दूसरी बाइक पर क्यों लगाया गया था?

मिली जानकारी के अनुसार, एक्टिवा क्रमांक CG 12 BP 4887 पहले अरुण सिंह के पास थी, जिसे बाद में अंचल अग्रवाल उर्फ जिमी अग्रवाल को बेच दिया गया। बताया जा रहा है कि वर्तमान में एक्टिवा अंचल अग्रवाल के पास है। इसी बीच दादर रोड पर उनके भाई लोकेश अग्रवाल ने इसी नंबर की स्प्लेंडर बाइक देखी। एक ही नंबर दो अलग-अलग वाहनों पर देखकर उन्हें शक हुआ और उन्होंने बाइक को रुकवा लिया।

बताया गया है कि स्प्लेंडर चला रहे व्यक्ति की पहचान अरुण सिंह के रूप में हुई। लोकेश अग्रवाल ने वाहन के दस्तावेजों के संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बाइक और चालक को मानिकपुर चौकी पुलिस के सुपुर्द कर दिया।

नंबर प्लेट का खेल या दस्तावेजों का मामला?

प्रारंभिक जानकारी में दावा किया जा रहा है कि स्प्लेंडर बाइक सेकंड हैंड खरीदी गई थी। यह भी बताया जा रहा है कि उसके वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण एक्टिवा का नंबर इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। बाइक किससे खरीदी गई, उसके वास्तविक कागजात कहां हैं और दूसरे वाहन का नंबर लगाने की वजह क्या थी, इसका जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा।

किसी हादसे में फंस सकता था दूसरा वाहन मालिक!

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल वाहन की पहचान को लेकर है। यदि दूसरे वाहन के नंबर पर चल रही बाइक किसी दुर्घटना या आपराधिक घटना में शामिल होती, तो शुरुआती जांच में नंबर के वास्तविक पंजीकृत वाहन और उसके मालिक तक पुलिस पहुंच सकती थी। ऐसे में निर्दोष वाहन मालिक को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। यही वजह है कि दूसरे वाहन की नंबर प्लेट का इस्तेमाल गंभीर जांच का विषय बन जाता है।

पुलिस जांच से खुलेगा पूरा राज

अब पुलिस के सामने बाइक के इंजन और चेसिस नंबर का मिलान करने, वास्तविक पंजीयन की जानकारी जुटाने तथा वाहन की खरीद-बिक्री से जुड़े तथ्यों की जांच करने जैसे अहम सवाल हैं। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित नंबर का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी।

फिलहाल मामले में किसी अन्य अपराध से संबंध या किसी बड़ी साजिश की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सभी संभावनाओं पर निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

एक नंबर, दो गाड़ियां और कई सवाल! मानिकपुर चौकी क्षेत्र में सामने आए इस मामले का पूरा सच अब पुलिस जांच से ही उजागर होगा। लोगों की नजर इस बात पर है कि बाइक की वास्तविक पहचान क्या निकलती है और दूसरे वाहन का नंबर इस्तेमाल करने के मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।