Wednesday, April 15, 2026
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कटघोरा-कोरबा वनमंडल में अवैध कटाई पर सवाल, लकड़ी जब्ती के बाद विभाग की निगरानी पर उठे प्रश्न

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The Duniyadari: KORBA- जिले के कोरबा और कटघोरा वनमंडल में अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

जंगलों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले मैदानी अमले की उदासीनता और निगरानी में कमी का फायदा उठाकर तस्कर खुलेआम पेड़ों की कटाई कर रहे हैं।

विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति ग्रामीणों के बीच विश्वास की कमी भी सूचना तंत्र को कमजोर बना रही है, जिससे कई मामलों की जानकारी समय पर सामने नहीं आ पाती।

जानकारी के अनुसार, कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होने के बाद ही विभाग हरकत में आया। कटे हुए पेड़ों को गांवों तक पहुंचाने और आगे की प्रक्रिया में कई दिन लगने के बावजूद जिम्मेदार अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में सूचना मिलने पर कटे हुए लकड़ी के सिलपटों को जब्त कर कार्रवाई का दावा किया गया, जबकि कटाई के दौरान ही सख्ती बरती जाती तो स्थिति अलग हो सकती थी।

कटघोरा वनमंडल में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कीमती इमारती लकड़ियों को काटकर लंबे समय तक जंगल में छोड़ दिया गया और बाद में रात के समय उन्हें ले जाते हुए ग्रामीणों की सतर्कता से मामला पकड़ा गया। इससे विभागीय निगरानी और सूचना तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी बीच कोरबा वनमंडल के बालको परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सतरेंगा और आसपास के इलाकों में विभाग ने व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। करीब 55 अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने छह अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में अवैध लकड़ी जब्त की। कार्रवाई के दौरान तेजराम के घर से 254 नग, मेहतार सिंह से 73 नग, घासीराम से 18 नग, देवलाल से 10 नग और भारतराम के यहां से 4 नग साल, बीजा सहित अन्य प्रजातियों की लकड़ी बरामद की गई।

वन विभाग के अनुसार कुल 359 नग लकड़ी जब्त की गई, जिसका आयतन करीब 5.405 घनमीटर और अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 4.25 लाख रुपये आंका गया है। इस कार्रवाई में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सदस्यों और ग्रामीणों का सहयोग भी मिला, जिसकी विभाग ने सराहना की है।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि जिस सक्रियता से लकड़ी जब्ती संभव हुई, वही सतर्कता अवैध कटाई के दौरान क्यों नहीं दिखाई दी। अब देखना होगा कि विभाग जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करता है या फिर कार्रवाई के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।