The Duniyadari: बिलासपुर- छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए इसे खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि विधेयक अभी कानून के रूप में लागू नहीं हुआ है, ऐसे में इसे चुनौती देना समय से पहले (Premature) है।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि प्रस्तावित विधेयक में कुछ प्रावधान ऐसे हैं जो नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि अभी यह केवल विधेयक है, जिसे कानून बनने की प्रक्रिया से गुजरना बाकी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई विधेयक विधिवत कानून बनकर लागू नहीं हो जाता, तब तक उसके प्रावधानों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में यह विधेयक कानून बनता है और उससे किसी के अधिकार प्रभावित होते हैं, तब संबंधित पक्ष कानूनी उपाय अपना सकते हैं।
इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका को निरस्त कर दिया। माना जा रहा है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है, जहां किसी प्रस्तावित कानून को लागू होने से पहले ही चुनौती दी जाती है।















