The Duniyadari: 500 से अधिक ग्रामीणों ने भिलाईखुर्द में लिया संकल्प, मांगें पूरी नहीं हुईं तो 21 अगस्त की जनसुनवाई का करेंगे विरोध
कोरबा। मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना के प्रस्तावित विस्तार को लेकर प्रभावित क्षेत्र के आठ गांवों के ग्रामीण एकजुट हो गए हैं। 21 अगस्त को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई के विरोध में भिलाईखुर्द क्रमांक-1 में ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें 500 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनकी लंबित मांगों का समाधान किए बिना जनसुनवाई कराई गई तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार का मुद्दा प्रमुख
बैठक में ग्रामीणों ने मानिकपुर खदान विस्तार से प्रभावित परिवारों से जुड़े मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार, छूटे हुए मकानों और परिवारों को पात्रता में शामिल करने सहित कई लंबित मुद्दे उठाए। ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में पहले प्रभावित परिवारों की जायज मांगों का निराकरण किया जाना चाहिए और उसके बाद ही खदान विस्तार से संबंधित जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।

ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे जयसिंह अग्रवाल
ग्रामीणों की बैठक में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे। कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, बालको और दर्री सहित जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों की मांगों के प्रति अपना समर्थन जताया।

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि प्रभावित ग्रामीणों की समस्याएं नई नहीं हैं। उन्होंने पूर्व में भी SECL के CMD और स्थानीय प्रबंधन को पत्र लिखकर जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों की लंबित मांगों का समाधान करने की मांग की ‘ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होने देंगे’
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि विकास के नाम पर प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जिन लोगों की जमीन, मकान और आजीविका खनन परियोजना से प्रभावित हो रही है, उन्हें उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार सहित उनके सभी जायज अधिकार मिलना जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे उनकी जायज मांगों की लड़ाई में हर संभव सहयोग करेंगे। यदि SECL प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों का न्यायपूर्ण तरीके से समाधान करता है तो वे जनसुनवाई का समर्थन करेंगे। वहीं, मांगों की अनदेखी करते हुए जनसुनवाई कराने का प्रयास किया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध किया जाएगा।
जनसुनवाई के विरोध का लिया सामूहिक संकल्प
बैठक में मौजूद 500 से अधिक ग्रामीणों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और अन्य लंबित मांगों का समाधान किए बिना 21 अगस्त की प्रस्तावित जनसुनवाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि उनका विरोध विकास या खदान विस्तार मात्र के खिलाफ नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के उचित मुआवजे, न्यायपूर्ण पुनर्वास, रोजगार और अधिकारों की सुरक्षा को लेकर है। बैठक के बाद ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया कि पहले प्रभावित परिवारों के अधिकारों का समाधान होगा, उसके बाद ही खदान विस्तार की जनसुनवाई आगे बढ़नी चाहिए।
ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
बैठक में कांग्रेस जिला अध्यक्ष शहर मुकेश कुमार राठौर, प्रदेश कांग्रेस सचिव विकास सिंह, युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश पंकज, ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, पालूराम साहू, बसंत चन्द्रा, सुरती कुलदीप, भू-विस्थापित संघ के संरक्षक अमन पटेल, सुरेश पटेल, समय लाल, जीतेन्द्र राव धाकड़े, किशन यादव, मोतीराम यादव, अरुण यादव, दिलीप उरांव, शिवलाल उरांव, राम्मेलाल धीवर, कलीराम, जीतराम उरांव, राजकुमार उरांव, मनोज पटेल, आलोक पटेल, उदय पटेल, साधराम पटेल, शिव प्रसाद पटेल, धनसिंह पटेल, रामकुमार पटेल, शिव पटेल, रामचरण पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।



































