Wednesday, August 19, 2026
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सीमांकन के भरोसे तोड़ा प्रधानमंत्री आवास, अब रिपोर्ट के लिए भटक रहा परिवार

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The Duniyadari: मुंगेली। कलेक्टर जनदर्शन में मंगलवार को ग्राम सेमरकोना के देवेंद्र कुमार ने अपनी जमीन और प्रधानमंत्री आवास से जुड़े मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि प्रशासन की टीम ने निर्माणाधीन मकान का सीमांकन किया था, जिसके बाद उन्हें मकान का कुछ हिस्सा सरकारी और कुछ हिस्सा निजी जमीन पर होने की जानकारी दी गई। इसी आधार पर परिवार ने निर्माणाधीन मकान को खुद ही तोड़ दिया, लेकिन अब तक उस सीमांकन की लिखित रिपोर्ट उन्हें नहीं मिली है।

मामला ग्राम बेलसरी के खसरा नंबर 143/3 से जुड़ा है। देवेंद्र के मुताबिक, परिवार की सदस्य विमला बाई के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मकान स्वीकृत हुआ था। निर्माण शुरू होने के बाद जमीन की सीमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद तहसीलदार लोरमी ने 29 जनवरी 2026 को निर्माण पर रोक लगा दी। 4 जून को रोक हटाई गई, लेकिन 8 जून को दोबारा निर्माण कार्य बंद करा दिया गया।

शिकायतों के बाद मौके पर पहुंची टीम

निर्माण रुकने के बाद देवेंद्र ने जिला प्रशासन के समक्ष कई बार आवेदन दिया। जनदर्शन में भी शिकायत रखी गई। परिवार ने मामले के समाधान की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना भी दिया। इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच के लिए जिला स्तरीय टीम गठित की।

13 जुलाई 2026 को टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन और निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास का सीमांकन किया। देवेंद्र का कहना है कि मौके पर अधिकारियों की ओर से उन्हें बताया गया कि मकान का एक हिस्सा शासकीय भूमि और दूसरा हिस्सा निजी जमीन में आ रहा है।

आशियाना तोड़ा, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली

देवेंद्र के अनुसार, लंबे समय से चल रहे विवाद और सरकारी दफ्तरों के चक्कर से परेशान होकर उन्होंने प्रशासन द्वारा बताई गई स्थिति को स्वीकार कर लिया। इसके बाद परिवार के साथ मिलकर निर्माणाधीन मकान को स्वयं तोड़ दिया।

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास परिवार के लिए बेहद जरूरी था और उसे अपने हाथों से तोड़ना उनके लिए बेहद कठिन फैसला था। अब वे चाहते हैं कि जिस सीमांकन के आधार पर मकान हटाया गया, उसकी आधिकारिक रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराई जाए।

जनदर्शन में कलेक्टर ने दिए निर्देश

मामला सामने आने के बाद कलेक्टर कुन्दन कुमार ने संबंधित तहसीलदार को जनदर्शन में ही फटकार लगाई। उन्होंने जिला स्तरीय टीम द्वारा किए गए सीमांकन की रिपोर्ट की प्रति और उससे जुड़े दस्तावेज आवेदक को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

देवेंद्र ने सीमांकन रिपोर्ट के साथ पंचनामा, नक्शा, मौके का प्रतिवेदन और अन्य संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं। उन्होंने अपनी 13 डिसमिल निजी जमीन की सीमा स्पष्ट करने तथा यदि मकान का कोई हिस्सा सरकारी भूमि में पाया गया था तो उसकी माप और स्थिति भी रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की है।

राजस्व व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने सीमांकन और भूमि विवादों के निपटारे को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। जनदर्शन में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और जमीन से जुड़े विवादों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें छोटे राजस्व कार्यों के लिए भी बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

कुछ शिकायतकर्ताओं द्वारा निचले स्तर के राजस्व अमले पर काम में देरी और अनियमितता के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

देवेंद्र कुमार का मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि परिवार ने प्रशासन से मिली जानकारी के आधार पर अपना निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास ही हटा दिया, लेकिन उस कार्रवाई का आधार बताई जा रही सीमांकन रिपोर्ट अब तक उनके हाथ नहीं लगी। अब कलेक्टर के निर्देश के बाद निगाह इस बात पर है कि संबंधित अभिलेख कितनी जल्दी उपलब्ध कराए जाते हैं और मामले का अंतिम समाधान किस तरह किया जाता है।