Friday, April 17, 2026
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झाबू राखड़ बांध कांड—“राख का खेल” या सुनियोजित साजिश? शंकर इंजीनियरिंग पर उठे गंभीर सवाल

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The Duniyadari: KORBA: झाबू राखड़ बांध से जुड़ा मामला अब सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि एक बड़े खेल का रूप लेता नजर आ रहा है। बांध की ऊंचाई बढ़ाने के नाम पर राख लोडिंग के दौरान जो घटनाक्रम हुआ, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। बांध फूटने के बाद दूषित पानी सीधे हसदेव नदी में बहा, जिससे पर्यावरण और आसपास के लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा गया।

मामला सामने आते ही सीएसईबी प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारी को हटाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन असली सवाल वहीं का वहीं है—क्या पूरा दोष सिर्फ एक अधिकारी का है?

अब उंगलियां सीधे ठेकेदार कंपनी शंकर इंजीनियरिंग पर उठ रही हैं, जो झाबू राखड़ बांध से राख शिफ्टिंग और सप्लाई का काम देख रही थी। सूत्रों के अनुसार, जितनी राख कागजों में उठाई गई दिखाई गई, हकीकत में उतनी निकासी हुई ही नहीं। इसी गड़बड़ी के चलते बांध पूरी तरह भर गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि कुछ स्थानीय लोगों का दावा है—यह कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि बांध के ओवरफ्लो होने के बाद मामला दबाने और सबूत मिटाने के लिए कथित तौर पर जानबूझकर राख को हसदेव नदी की ओर बहा दिया गया। आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि प्लानिंग के तहत बांध को कमजोर कर फोड़ने जैसी स्थिति बनाई गई, ताकि बढ़ते दबाव और गड़बड़ी पर पर्दा डाला जा सके

“राख से रकम” बनाने वाले नेटवर्क की चर्चा भी अब खुलेआम होने लगी है। अंदरखाने यह सवाल गूंज रहा है कि क्या ठेकेदार को बचाने के लिए कोई सेटिंग चल रही है? क्या जांच केवल छोटे स्तर तक सीमित रख दी जाएगी?

सबसे बड़ा सवाल अब प्रशासन के सामने है—क्या शंकर इंजीनियरिंग पर सख्त कार्रवाई होगी? क्या कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा या फिर उसे बचाने के लिए पूरा सिस्टम ढाल बन जाएगा?

अगर ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संकेत होगा कि जिम्मेदारों को बचाने का खेल जारी है। ऐसे में यह मामला और ज्यादा भड़क सकता है और जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।

फिलहाल, निगाहें प्रशासन की अगली चाल पर टिकी हैं—क्योंकि अब यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जवाबदेही और ईमानदारी की असली परीक्षा बन चुका है।