Sunday, August 23, 2026
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नई शिक्षा सत्र की शुरुआत में एनसीईआरटी पुस्तकों का संकट, अभिभावक महंगी निजी किताबें खरीदने को मजबूर

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The Duniyadari: भोपाल- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई है, लेकिन बाजार में एनसीईआरटी की किताबों की कमी ने अभिभावकों और विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ा दी है। विशेष रूप से गणित, विज्ञान और हिंदी जैसे मुख्य विषयों की पुस्तकें पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

इस वर्ष कक्षा पहली से आठवीं और नौवीं तक के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। खासतौर पर कक्षा नौवीं के सभी विषयों की किताबों में बड़े स्तर पर संशोधन किए गए हैं। यही वजह है कि बाजार में नौवीं की नई एनसीईआरटी किताबें अभी तक नहीं पहुंच पाई हैं। किताबें उपलब्ध नहीं होने के कारण अभिभावकों को मजबूरन निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।

बुक डिपो संचालकों का कहना है कि नौवीं कक्षा का पाठ्यक्रम पूरी तरह से बदला गया है, जिसके चलते नई किताबों की छपाई जारी है। उनका अनुमान है कि नई पुस्तकें बाजार में आने में अभी 15 से 20 दिन का समय लग सकता है।

नई व्यवस्था के तहत कक्षा नौवीं के पाठ्यक्रम को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। इसमें भाषा एवं संवाद कौशल, कोर विषय (गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान) तथा कौशल आधारित विषय शामिल किए गए हैं। वहीं सामाजिक विज्ञान को अब एकीकृत रूप में पढ़ाया जाएगा। पहले इतिहास, भूगोल, राजनीति और अर्थशास्त्र अलग-अलग पढ़ाए जाते थे, लेकिन अब इन्हें एक साथ जोड़ा गया है। साथ ही नए पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा पर विशेष जोर दिया गया है।

कीमतों में भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। जहां एनसीईआरटी की किताबें 50 से 60 रुपये तक उपलब्ध होती हैं, वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 300 से 400 रुपये तक बिक रही हैं। ऐसे में एनसीईआरटी की पांच किताबें जहां 300 से 400 रुपये में मिल जाती हैं, वहीं निजी प्रकाशकों के पूरे सेट की कीमत तीन से चार हजार रुपये तक पहुंच रही है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।