The Duniyadari: डिप्टी सीएम अरुण साव से फोन पर मां ने लगाई गुहार, बोलीं—बेटी की मौत के जिम्मेदार लोगों को मिले उम्रकैद; 28 अक्टूबर को फिर होगी न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी सुनवाई

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के ग्राम नेवासपुर में 17 वर्षीय किशोरी की हत्या का मामला अब न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ित परिवार की मांगों को लेकर चर्चा में है। बेटी को खोने के बाद परिवार गहरे सदमे में है। इसी बीच सोमवार को कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उनकी परेशानियां सुनीं। इस दौरान मृतका की मां अपनी पीड़ा बताते हुए भावुक हो गईं और उन्होंने बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
मां का कहना था कि बेटी की हत्या के बाद परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन आरोपियों को जेल में नहीं देख पाने से उनकी तकलीफ और बढ़ गई है। उन्होंने दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलाने की मांग की। परिवार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के साथ उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
फोन पर डिप्टी सीएम से हुई बात, मां ने रखी अपनी मांग
परिवार से मुलाकात के दौरान कलेक्टर ने मृतका की मां की छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव से फोन पर बातचीत कराई। इस दौरान मां ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बेटी की हत्या के मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग रखी। उन्होंने कहा कि परिवार को न्याय मिलना चाहिए और मामले में दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम में परिवार की भावनात्मक स्थिति और न्याय की प्रतीक्षा प्रमुख रूप से सामने आई।
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी आश्वासन
कलेक्टर ने परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना समेत शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने के संबंध में भी पूछा। प्रशासन की ओर से भरोसा दिलाया गया कि पात्रता के बावजूद यदि परिवार किसी योजना के लाभ से वंचित है, तो संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक पहल की जाएगी। हालांकि, परिजनों की सबसे बड़ी अपेक्षा बेटी की हत्या के मामले में न्याय और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित होने की है।
न्यायिक रिमांड की अर्जी खारिज होने के बाद बढ़ा विवाद
इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने हत्या के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में न्यायिक रिमांड के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया, लेकिन अदालत ने प्रक्रियागत कमियों के चलते आवेदन स्वीकार नहीं किया। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा किया गया। इस घटनाक्रम के बाद परिवार और ग्रामीणों में नाराजगी सामने आई।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि न्यायिक रिमांड से जुड़ी अर्जी खारिज होना अपने आप में हत्या के आरोप से दोषमुक्त होने का फैसला नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेशों और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
पहले भी प्रशासन से लगाई थी गुहार
इससे पहले मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच, आर्थिक सहायता और परिवार की सुरक्षा की मांग की थी। परिजनों ने धमकी मिलने की शिकायत भी पुलिस से की थी। परिवार की मांग है कि मामले में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उन्हें किसी प्रकार के खतरे से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
अब 28 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
नेवासपुर की इस घटना ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। मां की मांग है कि उनकी बेटी को न्याय मिले और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई हो। प्रशासन की ओर से परिवार की समस्याएं सुनने और योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया है। अब मामले में 28 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित अगली सुनवाई और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।















