The Duniyadari: कोंडागांव। बस्तर अंचल की लोकसंस्कृति में दशहरा उत्सव की अपनी अलग पहचान है। यहां ग्रामीण परंपराओं को जीवंत रखने के साथ हर साल कुछ नया करने का प्रयास भी करते हैं। इसी कड़ी में केशकाल विधानसभा क्षेत्र के मैनपुर गांव में आयोजित दशहरा मेले में इस बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रतीकात्मक आगमन को दर्शाती हेलीकॉप्टर की झांकी चर्चा का केंद्र रही। ग्रामीणों ने अपनी कल्पनाशीलता और मेहनत से इस दृश्य को तैयार किया, जिसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

ग्रामीणों की कलाकारी ने मेले को बनाया खास
मैनपुर के दशहरा मेले में हेलीकॉप्टर का मॉडल लोगों के लिए खास आकर्षण रहा। इसके साथ सजावटी रथ और अलग-अलग विषयों पर आधारित झांकियां भी तैयार की गई थीं। ग्रामीणों ने समसामयिक घटनाओं और चर्चित हस्तियों को अपनी रचनाओं में शामिल कर पारंपरिक आयोजन को एक नया स्वरूप दिया। यही वजह रही कि मेले में लोगों की उत्सुकता बनी रही और झांकियों को देखने के लिए भीड़ जुटी।

एक महीने तक जुटे रहे ग्रामीण
इस आयोजन को तैयार करने के लिए गांव के लोगों ने करीब एक महीने तक मेहनत की। झांकियों के निर्माण से लेकर उनकी सजावट और अंतिम रूप देने तक ग्रामीणों ने मिलकर जिम्मेदारियां निभाईं। सीमित साधनों के बीच आकर्षक मॉडल तैयार करना उनके कौशल और सामूहिक सहयोग को दर्शाता है। मेले की तैयारियों में लोगों की भागीदारी इस आयोजन को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि गांव की एकजुटता को भी सामने लाती है।

सांसद और विधायक भी पहुंचे मेले में
मैनपुर के दशहरा आयोजन में कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर सांसद महेश कश्यप और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम शामिल हुए। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा बनाई गई झांकियों और रथों का अवलोकन किया। इस तरह के आयोजनों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखने का माध्यम माना जाता है। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से भी मेले का उत्साह बढ़ा।

रावण दहन के साथ संपन्न हुआ आयोजन
दिनभर मेले में लोगों की आवाजाही जारी रही। हेलीकॉप्टर के मॉडल, सजे हुए रथों और अन्य झांकियों को देखने के लिए ग्रामीणों में खास उत्साह दिखाई दिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच रावण दहन के साथ दशहरा उत्सव का समापन हुआ।

मैनपुर का यह आयोजन बताता है कि लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने में ग्रामीणों की रचनात्मकता और सामूहिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अपनी अलग कल्पना और मेहनत से गांव के लोगों ने दशहरा मेले को ऐसा रूप दिया, जिसने इसे क्षेत्र के चर्चित आयोजनों में खास पहचान दिलाई।















