The Duniyadari: Bilaspur में जमीन गिरवी रखकर फर्जी ऋण लेने के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुप तिग्गा की अदालत ने एक बुजुर्ग किसान की कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बैंक से लोन हासिल करने वाले चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
प्रकरण के अनुसार, मुंगेली जिले के ग्राम गोइंद्रा निवासी 104 वर्षीय मोहन बंजारे की लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि को निशाना बनाकर आरोपियों ने सुनियोजित साजिश रची। बिना मालिक की जानकारी और अनुमति के भूमि संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकंडा स्थित एक्सिस बैंक की सीपत रोड शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के नाम पर करीब 9.50 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत करा लिया गया। आरोप है कि ऋण की राशि बाद में आरोपियों ने आपस में बांट ली।
धोखाधड़ी का पर्दाफाश तब हुआ जब मोहन बंजारे के पोते शिवचरण बंजारे ने ऑनलाइन भू-अभिलेख की जांच की। रिकॉर्ड में जमीन बैंक के पास बंधक दर्ज दिखाई देने पर परिवार के सदस्य बैंक पहुंचे और ऋण से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी ली। जांच के दौरान पता चला कि लोन फाइल में मोहन बंजारे के नाम पर किसी अन्य व्यक्ति की तस्वीर लगाकर दस्तावेज तैयार किए गए थे।
मामले की शिकायत सरकंडा थाने में दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस जांच में फर्जीवाड़े और साजिश की पुष्टि हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने बैंक के तत्कालीन लोन अधिकारी सुमन कार्तिक रथ सहित चार आरोपियों को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी मानते हुए सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को बैंकिंग धोखाधड़ी और भूमि संबंधी फर्जीवाड़े के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा















