Friday, March 1, 2024
Homeदेश450₹ को बनाया 25,450 रुपये … कैग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, चंडीगढ़...

450₹ को बनाया 25,450 रुपये … कैग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, चंडीगढ़ पुलिस के खाते से 84 करोड़ गायब

न्यूज डेस्क। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने चंडीगढ़ पुलिस कर्मियों की बड़ी जालसाजी का खुलासा किया है। ऑडिट में पता चला कि कैसे सरल तरकीबों से पुलिसकर्मी अपने आवंटित भत्तों से अधिक धन प्राप्त कर रहे थे, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है।चंडीगढ़ प्रशासन के तहत कुछ विभागों के फाइनेंस का ऑडिट किया गया था, जिसमें अनियमितता पाई गई हैं। इसे लेकर कैग की रिपोर्ट 6 मार्च को चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित को सौंपी गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ पुलिस के हेड कांस्टेबलों के लिए 450 रुपये प्रति माह और कांस्टेबलों के लिए 400 रुपये प्रति माह का कनवेंस फाइनेंस दिया जाता था, लेकिन हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल मूलराशि के आगे 25 और 20 लिखकर इस राशि को 25,450 रुपये और 20,400 रुपये प्राप्त करते थे।

अपर लिमिट तय होने के कारण हुई ये गड़बड़ियां
जांच में पता चला कि कम से कम 53 हेड कांस्टेबलों ने 5450 रुपये से 25,450 रुपये के बीच अत्यधिक राशि निकाली, जबकि 13 कांस्टेबलों ने हर महीने 4,400 रुपये से 20,400 रुपये तक अतिरिक्त राशि प्राप्त की है। इससे सरकारी खजाने को कुल 51.48 लाख नुकसान हुआ।कैग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सॉफ्टवेयर में भुगतान किए जाने वाले कनवेंस अलाउंस पर अपर लिमिट तय नहीं की गई थी, जिस कारण पुलिस कर्मचारियों ने वाउचर पर तय राशि से ज्यादा अमाउंट लिखकर अधिक राशि प्राप्त कर ली। 66 कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल इस तरह की गड़बड़ करने में कामयाब रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, “सॉफ्टवेयर में ऊपरी सीमा की कैपिंग नहीं होने के कारण अतिरिक्त वाहन भत्ता का भुगतान किया गया था। डीडीओ वेतन बिल रजिस्टर की शुद्धता की जांच के लिए जिम्मेदार है और विफलता के मामले में, वे किसी भी परिणामी नुकसान की भरपाई करने के लिए उत्तरदायी हैं।”

84 करोड़ रुपये के बिल और वाउचर के बारे में नहीं दी गई कोई जानकारी

 

एक वरिष्ठ अधिकारी संजीव गोयल ने शुक्रवार को बताया कि साल 2020 में चंडीगढ़ के डीजीपी के आग्रह पर 2017-2020 के लिए यह स्पेशल ऑडिट किया गया था, जिसमें 84 करोड़ रुपये के बिल और वाउचर की कोई जानकारी नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा, “ई-सेवार्थ एप्लिकेशन के तहत कर्मचारियों को दिए जा रहे वेतन और अन्य भत्तों का ऑडिट किया गया था।पुलिस विभाग के सभी कर्मचारी ई-सेवार्थ एप्लीकेशन पर पंजीकृत हैं, जहां कर्मचारियों को उनके वेतन और भत्तों के सभी विवरणों के साथ नामांकित किया गया है और चौंकाने वाली चीजें सामने आई हैं। ऑडिट में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है और वेतन एवं भत्तों के वितरण में चूक के लिए जिम्मेदारियां तय की जानी चाहिए।”उन्होंने आगे कहा, “84 करोड़ रुपये के बिल और वाउचर ऑडिट के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए थे। उसके बाद कोई विवरण (राशि के संबंध में) नहीं मिला है। बताने के बावजूद… इन अनियमितताओं पर विभाग मौन है। अक्टूबर 2021 में हमारे विभाग को बताया गया कि मामला क्राइम ब्रांच को रेफर कर दिया गया है, लेकिन इस संबंध में कुछ भी नहीं किया गया है।”

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments