The Duniyadari: रायपुर में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर उपकरणों की खरीदी में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में Economic Offences Wing और Anti Corruption Bureau (EOW/ACB) ने अहम कार्रवाई की है। लंबी जांच के बाद एजेंसी ने सोमवार को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया।
इस मामले में EOW/ACB ने अपराध क्रमांक 38/16 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत जांच की थी। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने तीन आरोपियों के खिलाफ अदालत में प्रकरण पेश किया।
स्कूलों के लिए कंप्यूटर योजना में गड़बड़ी
जांच में सामने आया कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन के अंतर्गत कंप्यूटर समर्थित शिक्षा योजना के लिए राज्य के उस समय के 18 जिलों की शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं में एलएफडी/टीएफटी मॉनिटर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव था। इसके लिए दो चरणों में कुल 638 मॉनिटर की मांग की गई थी। पहले चरण में वर्ष 2010-11 के दौरान 246 और दूसरे चरण में वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर की आपूर्ति दर्शाई गई।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे सप्लाई
विवेचना के दौरान पता चला कि मिनी इंफोटेक रायपुर के संचालक आलोक कुशवाहा ने 2010-11 में 246 मॉनिटर सप्लाई किए, जबकि ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन रायपुर ने 2011-12 में 392 मॉनिटर उपलब्ध कराए। आरोप है कि इस प्रक्रिया में एचपी और एग्माटेल कंपनियों के नाम से फर्जी और कूटरचित ऑथराइजेशन लेटर तैयार कर शासन को गुमराह किया गया।
कीमत बढ़ाकर करोड़ों का नुकसान
जांच में यह भी पाया गया कि जिन मॉनिटरों की वास्तविक बाजार कीमत लगभग 57,950 रुपये प्रति यूनिट थी, उन्हें शासन को 1,26,500 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी दर्शाकर सप्लाई किया गया। इस हेरफेर के कारण सरकार को करीब 4 करोड़ 72 लाख 88 हजार 462 रुपये का नुकसान हुआ।
तीन आरोपियों पर केस, अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश
EOW/ACB ने मामले में आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा को आरोपी बनाते हुए विशेष न्यायालय में चालान दाखिल किया है। साथ ही जांच में लापरवाही और मिलीभगत की आशंका को देखते हुए संबंधित शासकीय अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा भी संबंधित विभाग को भेजी गई है।















