Saturday, March 28, 2026
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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में चमकी ओडिशा की अंजलि, तैराकी में जीता पहला महिला स्वर्ण

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The Duniyadari: रायपुर- कभी-कभी जिंदगी का एक छोटा फैसला भविष्य की दिशा बदल देता है। ओडिशा की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। साल 2022 में स्कूल के खेल चयन के दौरान उन्होंने तैराकी को चुना था। उस समय यह सिर्फ एक नया अनुभव था, लेकिन आज वही निर्णय उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला चुका है।

जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की रहने वाली अंजलि ने रायपुर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ वे प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता भी बन गईं।

साधारण परिवार से आने वाली अंजलि चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता स्थानीय फैक्ट्री में वैन चालक के रूप में काम करते हैं। महज 10 साल की उम्र में अंजलि कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से जुड़ीं, जहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा के साथ खेल प्रशिक्षण मिला। यहीं से उनके तैराकी करियर की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा निखरती गई।

हालांकि शुरुआत में अंजलि अपनी बड़ी बहन से प्रेरित थीं, जो तीरंदाजी में सक्रिय हैं, लेकिन उन्होंने तैराकी को ही अपना लक्ष्य बनाया। मेहनत का परिणाम भी जल्दी मिला और प्रशिक्षण शुरू करने के एक साल के भीतर उन्होंने स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

अंजलि अपनी सफलता का श्रेय अपने कोचों और खेल मंत्रालय की ‘अस्मिता लीग’ पहल को देती हैं। वर्ष 2024 में संभलपुर में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने दो रजत पदक जीते, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद गुवाहाटी में आयोजित ईस्ट जोन अस्मिता स्विमिंग लीग में भी उन्होंने दो रजत पदक हासिल किए।

फिलहाल अंजलि का लक्ष्य अपने 2:25 के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय को और बेहतर करना है। लगातार यात्रा और थकान के बावजूद उन्होंने रायपुर में शानदार प्रदर्शन किया। अब उनकी नजर आगामी स्पर्धाओं—50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली—पर है, जहां वे नए रिकॉर्ड बनाने के इरादे से उतरेंगी।

अंजलि मुंडा की यह सफलता न केवल उनकी मेहनत और लगन की कहानी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय मंच पर चमक सकती हैं।