Saturday, April 18, 2026
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नाबालिग से संबंध के मामले में युवक बरी, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला किया रद्द

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The Duniyadari: Bilaspur- पॉक्सो एक्ट और अपहरण के मामले में दोषी ठहराए गए कबीरधाम निवासी दीपक वैष्णव को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया।

मामले के अनुसार, आरोपी पर आरोप था कि उसने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस मामले में पॉक्सो कोर्ट मुंगेली ने आरोपी को आईपीसी की धारा 363, 366 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से मोबाइल पर बातचीत होती थी। पीड़िता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह आरोपी के साथ अपनी इच्छा से गई थी। दोनों ने मुंगेली, रायपुर, हैदराबाद और विजयवाड़ा सहित कई स्थानों की यात्रा की और करीब एक महीने तक साथ रहे। इस दौरान पीड़िता ने कहीं भी विरोध या शिकायत नहीं की।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं मिली और एफएसएल रिपोर्ट भी नकारात्मक रही। यौन संबंध को लेकर भी कोई ठोस चिकित्सीय प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। इन परिस्थितियों में अदालत ने अभियोजन पक्ष की कहानी को कमजोर माना।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों — एस. वर्धराजन बनाम स्टेट ऑफ मद्रास और टिल्कू उर्फ तिलक सिंह बनाम स्टेट ऑफ उत्तराखंड — का हवाला देते हुए कहा कि यदि लड़की अपनी इच्छा से आरोपी के साथ जाती है और किसी तरह का दबाव या प्रलोभन साबित नहीं होता, तो इसे अपहरण नहीं माना जा सकता।

हालांकि पीड़िता की उम्र लगभग 15 साल 10 माह थी, लेकिन अदालत ने कहा कि परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर जबरन शोषण साबित नहीं हुआ। पीड़िता के व्यवहार और बयान से स्वेच्छा का संकेत मिलता है, इसलिए संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को सभी आरोपों से बरी कर दिया।