Wednesday, May 27, 2026
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युवा कांग्रेस चुनाव से गरमाई सियासत, 4 साल बाद शुरू होगा नेतृत्व का महासंग्राम

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The Duniyadari: Raipur- प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद युवा कांग्रेस चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। 29 मई से नामांकन खुलने के साथ ही संगठन के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बार चुनाव केवल युवा नेतृत्व चुनने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस के अंदरूनी शक्ति संतुलन की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई युवा चेहरे मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बड़े नेताओं की रणनीति और समर्थन पर टिका हुआ है। माना जा रहा है कि इस चुनाव में वही दावेदार मजबूत स्थिति में रहेगा, जिसकी संगठन में पकड़ मजबूत होगी और जो सदस्यता अभियान में बढ़त हासिल करेगा।

सदस्यता अभियान बनेगा सबसे बड़ा हथियार

युवा कांग्रेस ने इस बार प्रदेशभर में 20 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। यही आंकड़ा चुनावी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। पिछले चुनाव में लाखों सदस्य जुड़े थे, लेकिन मतदान का अधिकार सीमित सदस्यों को ही मिला था। इस बार वोटरों की संख्या पहले से अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है।

संगठन के भीतर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि सदस्यता प्रक्रिया में वैचारिक प्रतिबद्धता और सक्रियता को लेकर स्पष्ट मापदंड नहीं होने से चुनावी प्रतिस्पर्धा और ज्यादा दिलचस्प हो सकती है।

चुनावी प्रक्रिया का पूरा खाका

युवा कांग्रेस चुनाव के तहत 29 मई से नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ होगी। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन जून के दूसरे सप्ताह में भरे जाएंगे। 18 से 35 वर्ष तक के युवाओं को सदस्यता देने की व्यवस्था रखी गई है। सदस्यता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से होगी, जिसमें मोबाइल नंबर और पहचान पत्र के जरिए सत्यापन किया जाएगा।

सदस्यता सत्यापन के बाद उम्मीदवारों की सक्रियता, संगठनात्मक कार्य, आंदोलन में भागीदारी और नेतृत्व क्षमता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व और स्क्रीनिंग कमेटी की प्रक्रिया के बाद सामने आएगा।

कई युवा चेहरे दावेदारी में सक्रिय

प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर कई नाम राजनीतिक चर्चाओं में बने हुए हैं। इनमें शांतनु झा, भावेश शुक्ला, लोकेश वशिष्ठ, अनिमेश सिंह, सजल चंद्राकर, शैलेंद्र बंजारे, सुनील पटेल, महेश सेन, हनी बग्गा, विनोद कश्यप, बाला बोखरे और प्रांजल तिवारी जैसे युवा नेताओं की दावेदारी की चर्चा तेज है।

अंदरूनी समर्थन तय करेगा भविष्य

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में केवल युवा चेहरों की लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ नेताओं का समर्थन भी निर्णायक साबित होगा। आने वाले दिनों में संगठन के भीतर बैठकों, रणनीति और शक्ति प्रदर्शन का दौर और तेज होने की संभावना है।