The Duniyadari: मरवाही वनमंडल में वर्ष 2022 के पौधारोपण कार्य के नाम पर हुए बहुचर्चित गोबर खरीदी घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नवा रायपुर स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने मरवाही वन परिक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर रमेश कुमार खैरवार को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें बिलासपुर स्थित सीसीएफ कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इससे पहले कैंपा फंड शाखा के प्रभारी सहायक ग्रेड-दो भूपेंद्र कुमार साहू पर भी कार्रवाई हो चुकी है।
पूरा मामला गोबर खाद खरीदी के नाम पर करीब 14 लाख 77 हजार 600 रुपये के संदिग्ध भुगतान से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि मिश्रित प्रजाति पौधारोपण कार्य के लिए फर्जी बिल, वाउचर और दस्तावेज तैयार कर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि तत्कालीन एसडीओ के जाली हस्ताक्षर कर फाइलों का सत्यापन कराया गया और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भुगतान को मंजूरी दी गई।
जांच के दौरान खुरपा (छुआबहरा बीट) के वन प्रबंधन समिति सचिव एवं फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार ने कई चौंकाने वाले बयान दर्ज कराए। उन्होंने बताया कि समितियों के खातों में राशि पहुंचने के बाद रकम वापस निकलवाई गई। आरोप है कि रेंजर स्तर से यह कहा गया था कि पैसा “ऊपर तक” पहुंचाना है।
बताया जा रहा है कि अक्टूबर 2024 में गोबर खाद सप्लाई दर्शाने के लिए कथित सप्लायरों की फर्जी सूची तैयार की गई। फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें निलंबन की धमकी देकर डीएफओ कार्यालय बुलाया गया और खाली वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए गए। बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्रक्रिया पूरी कराई गई।
21 अक्टूबर 2024 को एचडीएफसी बैंक के जरिए कथित सप्लायरों के खातों में लगभग 14.77 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि भुगतान के तुरंत बाद संबंधित खातों से नकदी निकलवाई गई और रकम रेंजर को सौंप दी गई। इस पूरे प्रकरण से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, जिसके बाद मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया।
हालांकि पूरे मामले में सबसे अधिक सवाल तत्कालीन डीएफओ रौनक गोयल की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। जांच रिपोर्ट में उनका नाम सामने आने के बावजूद अब तक उनके खिलाफ किसी प्रकार की विभागीय या आपराधिक कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखी जा रही है।
लोगों की मांग है कि मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग को लेकर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की















