Tuesday, September 8, 2026
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भुलसीडीह जंगल में सागौन की अवैध कटाई का मामला, 26 लट्ठों से भरी पिकअप जब्त; वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

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The Duniyadari: कोरबा। भुलसीडीह के जंगल से सागौन की लकड़ी अवैध रूप से काटकर ले जाने के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए 26 लट्ठों से भरी एक पिकअप वाहन को पकड़ा है। विभाग के अनुसार जब्त लकड़ी की मात्रा करीब 2 घन मीटर है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 85 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई के बाद वन विभाग ने इसे अवैध कटाई के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता बताया है, लेकिन घटना ने जंगलों की सुरक्षा और विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जंगल के भीतर सागौन के पेड़ों की कटाई कब और कहां हुई। पेड़ों को काटकर उनके लट्ठे तैयार किए गए, उन्हें एकत्र किया गया और फिर पिकअप में लोड कर जंगल से बाहर ले जाने की तैयारी हुई। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस पूरी गतिविधि की जानकारी वन अमले को समय रहते क्यों नहीं मिल सकी।

सिर्फ वाहन पकड़ लिए जाने से कार्रवाई पूरी नहीं मानी जा सकती। जांच में यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि जब्त किए गए लट्ठे जंगल के किस हिस्से से काटे गए थे, कितने पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया और इस अवैध कटाई के पीछे कौन लोग सक्रिय थे। यदि लकड़ी को व्यवस्थित तरीके से काटकर परिवहन के लिए तैयार किया गया था, तो इसके पीछे किसी संगठित गतिविधि की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था होने के बावजूद इतनी मात्रा में सागौन की लकड़ी तैयार होकर वाहन तक पहुंच जाना विभाग की पेट्रोलिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। खासकर ऐसे इलाकों में जहां बहुमूल्य इमारती लकड़ी मौजूद है, वहां निगरानी कितनी प्रभावी है, यह जांच का विषय है।

अब लोगों की नजर वन विभाग की आगे की कार्रवाई पर है। क्या जांच केवल पिकअप वाहन और बरामद लकड़ी की जब्ती तक सीमित रहेगी या फिर लकड़ी के स्रोत का पता लगाकर पेड़ काटने वाले लोगों और इस पूरे काम से जुड़े अन्य व्यक्तियों तक भी जांच पहुंचेगी?

वन संपदा की सुरक्षा केवल अवैध परिवहन के दौरान वाहन पकड़ने से सुनिश्चित नहीं होगी। जंगल में पेड़ों की कटाई रोकना, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाना और अवैध कटाई के पीछे सक्रिय लोगों की पहचान कर कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है। भुलसीडीह की घटना के बाद वन विभाग के सामने अब यही चुनौती है कि वह कार्रवाई को केवल जब्ती तक सीमित न रखकर पूरे मामले की तह तक पहुंचे।