The Duniyadari: Bilaspur- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल शिक्षक पद की निर्धारित योग्यता न होने के आधार पर किसी आश्रित के आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने ऐसे निर्णय को अनुचित और मनमाना करार दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने दुर्ग जिला पंचायत द्वारा जारी अस्वीकृति आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदक की शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप उपलब्ध स्वीकृत रिक्त पदों, विशेष रूप से चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति की संभावना पर पुनर्विचार किया जाए।
प्रकरण दुर्ग जिले के सहायक शिक्षक (पंचायत) चमन लाल वर्मा से जुड़ा है, जिनका वर्ष 2015 में सेवा के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पुत्र राकेश कुमार वर्मा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। लेकिन जिला पंचायत ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि उनके पास शिक्षक पद के लिए आवश्यक डीएड, बीएड या टीईटी जैसी अनिवार्य योग्यताएं नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि अनुकंपा नियुक्ति संबंधी नीतियों में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं। पहले जहां पात्र आश्रितों को शिक्षक पद पर नियुक्ति का अवसर मिलता था, वहीं बाद में अन्य पदों पर समायोजन का प्रावधान भी किया गया। ऐसे में प्रशासन को केवल शिक्षक पद की योग्यता के आधार पर आवेदन खारिज करने के बजाय आवेदक की पात्रता के अनुसार किसी अन्य उपयुक्त पद पर नियुक्ति पर विचार करना चाहिए था।
हाईकोर्ट के इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक निर्णय माना जा रहा है, जिससे भविष्य में समान परिस्थितियों वाले आश्रितों को राहत मिल सकती है।















