Saturday, October 31, 2026
Home सुकमा स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: इलाज के अभाव में मौत, खाट पर शव...

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: इलाज के अभाव में मौत, खाट पर शव ढोने को मजबूर हुआ परिवार

108

The Duniyadari : सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी है। जगरगुंडा इलाके के चिमलीपेंटा गांव के रहने वाले 40 वर्षीय बारसे रामेश्वर की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद समय पर इलाज और परिवहन की व्यवस्था नहीं हो पाई, जिसके चलते उनकी जान चली गई।

परिजनों के मुताबिक रामेश्वर को हाथ-पैर में सूजन और पेट दर्द की परेशानी थी। पहले भी वे जगरगुंडा के स्वास्थ्य केंद्र में उपचार करा चुके थे। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिवार उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गांव में किसी भी तरह का वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। मजबूरी में परिजन उन्हें मोटरसाइकिल से स्वास्थ्य केंद्र की ओर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया।

मौत के बाद भी परिवार की परेशानी खत्म नहीं हुई। परिजनों ने शव को गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की मांग की, लेकिन कोई सहायता नहीं मिल सकी। बताया गया कि एक एंबुलेंस चालक अस्वस्थ होने का हवाला देता रहा, जबकि दूसरा ड्यूटी पर उपलब्ध नहीं था। अंततः परिजन और ग्रामीण मिलकर शव को खाट पर रखकर करीब छह किलोमीटर तक पैदल ले जाने को मजबूर हुए।

घटना की जानकारी मृतक के भांजे मड़कम हिड़मा ने दी। उन्होंने इसे व्यवस्था की विफलता बताते हुए कहा कि यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।

इधर, जगरगुंडा की सरपंच नित्या कोसमा ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि अंदरूनी गांवों में आज भी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है। एंबुलेंस जैसी सुविधाएं होने के बावजूद जरूरत के समय उनका लाभ न मिल पाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने शासन-प्रशासन से क्षेत्र में स्वास्थ्य संसाधन मजबूत करने की मांग की है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। ग्रामीण इलाकों में समय पर इलाज और परिवहन की सुविधा न होने से आए दिन जान जोखिम में पड़ती है। लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए एंबुलेंस और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए।