The Duniyadari: बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिता की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए बेटे को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा कम कर दी है। अदालत ने उम्रकैद को घटाकर 10 वर्ष की कठोर कारावास में बदल दिया है। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि घटना अचानक हुए विवाद और आवेश में हुई थी, इसलिए इसे पूर्व नियोजित हत्या नहीं माना जा सकता। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को यह जानकारी थी कि उसका कृत्य जानलेवा साबित हो सकता है।
मामला वर्ष 2020 का है, जब हरिहरपुर गांव में लकड़ी रखने को लेकर पिता और बेटे के बीच विवाद हुआ था। यह घटना रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई थी। विवाद के दौरान बेटे महात्मा यादव ने गुस्से में आकर अपने पिता जंगली यादव को पिकअप वाहन से कुचल दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद घायल पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लगभग नौ दिनों तक इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया और अदालत में चार्जशीट पेश की।
ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद माना कि घटना अचानक हुई थी और पूर्व नियोजित हत्या का इरादा साबित नहीं हो सका। इसी आधार पर अदालत ने सजा को कम करते हुए 10 वर्ष कठोर कारावास में परिवर्तित कर दिया।















