Friday, June 5, 2026
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100 साल से अधिक पुराना वटवृक्ष बना आस्था और सुकून का प्रतीक, राहगीरों को देता है शीतल छांव

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The Duniyadari: मनेंद्रगढ़- राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर कठौतिया तिराहे के समीप खड़ा विशाल वटवृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और प्रकृति संरक्षण का जीवंत प्रतीक बन चुका है। बताया जाता है कि यह वटवृक्ष एक शताब्दी से भी अधिक समय से यहां मौजूद है और कई पीढ़ियों का साक्षी रहा है।

स्थानीय ग्रामीण इस वृक्ष को श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। इसकी छांव तले स्थापित पूजा स्थल पर प्रतिदिन लोग दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। सुबह और शाम के समय यहां धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है, वहीं दिनभर राहगीर इसकी घनी छांव में कुछ पल विश्राम कर राहत महसूस करते हैं।

मनेंद्रगढ़-बैकुंठपुर मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए यह स्थान वर्षों से एक प्राकृतिक विश्राम स्थल के रूप में पहचान बनाए हुए है। गर्मी के मौसम में भी इसकी ठंडी छाया लोगों को सुकून देती है और प्रकृति के महत्व का एहसास कराती है।

यह वटवृक्ष आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी देता है कि पूर्वजों द्वारा लगाए गए पेड़ केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि समाज को आस्था, शांति और जीवनदायिनी ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। ऐसे वृक्ष हमारी धरोहर हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।