Monday, August 3, 2026
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बरबसपुर पहुंचे जयसिंह अग्रवाल, आबकारी विभाग को दो टूक—ग्रामीणों पर दबाव बर्दाश्त नहीं

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The Duniyadari: KORBA-  बरबसपुर गांव में प्रस्तावित शराब दुकान के खिलाफ चल रहे ग्रामीणों के आंदोलन को उस समय नई ऊर्जा मिली, जब पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल धरना स्थल पहुंचे और खुलकर ग्रामीणों के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। महिलाओं और ग्रामीणों से बातचीत के बाद उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता की इच्छा के विरुद्ध कोई भी फैसला स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

धरना स्थल पर जयसिंह अग्रवाल ने आबकारी विभाग के अधिकारी से फोन पर बात करते हुए ग्रामीणों पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाने की बात कही। उन्होंने मांग की कि विभाग सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि बरबसपुर में शराब दुकान खोलने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। बातचीत के दौरान उनका यह रुख भी सामने आया कि जनभावनाओं के खिलाफ किसी भी कदम का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले आबकारी विभाग की टीम संभावित शराब दुकान के लिए स्थान का निरीक्षण करने बरबसपुर पहुंची थी। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं विरोध में उतर आए। बढ़ते विरोध को देखते हुए विभागीय टीम को बिना आगे की कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा।

धरना स्थल से जयसिंह अग्रवाल ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को अवैध शराब और अधिक कीमत पर बिक्री जैसे मुद्दों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी गांव में जनता की राय और सामाजिक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर निर्णय लेना उचित नहीं है।

इस बीच आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि बरबसपुर में नई शराब दुकान खोलने का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उनके अनुसार विभाग की टीम केवल संभावित स्थान का निरीक्षण करने गई थी और आगे का निर्णय नियमानुसार लिया जाएगा।

पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि गांव में शराब दुकान खुलने से सामाजिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उचित निर्णय लेने की अपील की।

फिलहाल बरबसपुर में विरोध प्रदर्शन जारी है और ग्रामीण अपनी मांग पर अडिग हैं। आंदोलन को पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के समर्थन के बाद यह मुद्दा अब जिले की राजनीति का प्रमुख विषय बन गया है। अब सबकी नजर प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी है।