The Duniyadari: कोरबा। एसईसीएल की मानिकपुर विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। आठ गांवों के ग्रामीणों ने पर्यावरणीय जनसुनवाई का विरोध करते हुए कहा है कि जब तक वर्षों पुराने विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होता, तब तक वे जनसुनवाई नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने यहां तक कहा कि इसके लिए उन्हें लाठी-डंडे खाने पड़ें या जेल जाना पड़े, वे पीछे नहीं हटेंगे।

मंगलवार को प्रभावित ग्रामीणों ने पूर्व राजस्व मंत्री एवं पूर्व विधायक जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने बताया कि उनकी जमीन का अर्जन वर्ष 1964 में किया गया था। छह दशक से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद कई परिवार आज भी पुनर्वास, उचित मुआवजा और रोजगार जैसे अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन चली गई, खेती का सहारा छिन गया, लेकिन विस्थापन के बाद उन्हें ऐसा स्थायी आधार नहीं मिल सका, जिससे परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके। कुछ परिवारों की जमीन पर खनन शुरू हो चुका है, जबकि कुछ की जमीन का हिस्सा अब भी उनके कब्जे में है। ग्रामीणों ने शेष भूमि के लिए प्रस्तावित करीब साढ़े छह लाख रुपये के मुआवजे पर भी सवाल उठाए हैं।
“पहले पुराने घाव भरें, फिर विस्तार की बात हो”
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनके लिए यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि परिवारों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने मांग की कि पुराने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और अन्य लंबित मामलों का पहले निराकरण किया जाए। इसके बाद ही मानिकपुर विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
सीएमडी को पत्र लिखकर जनसुनवाई निरस्त करने की मांग
ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन को पत्र भेजा। उन्होंने मानिकपुर विस्तार परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
अग्रवाल ने कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ पहले बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी जाएं और लंबित पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार तथा मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों का समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय करके नहीं चुकाई जा सकती।
जनसुनवाई हुई तो आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
पूर्व मंत्री ने कहा कि आठों प्रभावित गांवों के पुराने और नए प्रभावित परिवारों को साथ बैठाकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं के समाधान से पहले जनसुनवाई कराई जाती है तो ग्रामीणों का विरोध और अधिक व्यापक हो सकता है।
मानिकपुर विस्तार का विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन भले ही छह दशक पहले चली गई हो, लेकिन विस्थापन का दर्द आज भी खत्म नहीं हुआ है। उनकी मांग है कि नई परियोजना के विस्तार से पहले पुराने प्रभावित परिवारों को उनका लंबित हक और सम्मान दिया जाए।



































