उदयपुर। राजस्थान कांग्रेस का चिंतन शिविर शुरु होने से पहले पोस्टर विवाद हो गया है। चिंतन शिविर में लगे सचिन पायलट के पोस्टरों को हटा दिया गया है। पायलट के होर्डिंग्स-पोस्टर हटाने को लेकर सियासत शुरू हो गई।
बता दें कि सचिन के समर्थकों ने उनके स्वागत के लिए होटल-एयरपोर्ट के आसपास और उदयपुर के कई इलाकों में होर्डिंग्स लगवाए थे। समर्थकों का दावा है कि शहर के अलग-अलग इलाकों से रातो रात पायलट के होर्डिंग्स-पोस्टर हटवा दिए गए।
पोस्टर विवाद पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि शिविर से संबंधित सभी काम AICC देख रही है। मुझे इस संबंध कोई जानकारी नहीं है। न ही मैंने इस बारे में किसी भी तरह के निर्देश दिए हैं।
उदयपुर कलेक्टर ताराचंद मीणा ने कहा कि प्रशासन का पोस्टर लगाने-हटाने में कोई रोल नहीं है। जो भी है पार्टी स्तर पर है। इसके अलावा अन्य नेताओं के समर्थकों ने भी अपने फोटो के साथ चहेते नेता के पोस्टर शहर में लगाए थे। उनमें से भी कुछ पोस्टर हटाए गए हैं।
0.इवेंट कंपनियां तैयारियों में जुटी
कांग्रेस के चिंतन शिविर की तैयारियों का जिम्मा इवेंट कंपनी को दिया गया है। नेताओं के खाने-पीने से लेकर उनके ठहरने तक की पूरी जिम्मेदारी इवेंट कंपनी ने संभाल रखी है।
शिविर की सभी बैठकें होटल ताज अरावली में ही होंगी। एक दिन में कई सेशन होंगे। काॅमन बैठक के लिए बड़ा डोम तैयार किया गया है। इसकी क्षमता करीब 500 लोगों के बैठने की होगी। शिविर के दौरान देश के करीब 10 राज्यों से शैफ बुलाए गए है।
नई दिल्ली। दुनिया में डाक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है मगर जब दुनिया के भगवान ही शैतान बन जाए तो लोगों का विश्वास उन पर से उठने लगता है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका में सामने आया। मामले की जांच के दौरान उन महिला मरीजों के बच्चों की डीएनए जांच (DNA test) हुई तो ये फर्टिलिटी डॉक्टर (fertility doctor) उन (father of 94 children) 94 बच्चों का ‘बाप’ निकला।
डॉक्टर की इस करतूत का खुलासा उसकी खुद की बेटी ने किया था। डॉक्टर की बेटी का नाम (Jacoba Belaid) जैकोबा बेलाईड है। रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर के ऊपर बनी डाक्यूमेंट्री में जैकोबा ने इस बारे में खुद बताया है। एक अन्य महिला ने भी डॉक्टर की हरकत के बारे में बात करते वाले खुलासे किए हैं।
जांच में यह पता चला कि ये डाक्टर अपने यहां आनेवाले मरीजों में अपना स्पर्म डाल दिया करता था। यह सब वह तब करता था जब वह मरीजों को बेहोश कर देता था। यह डॉक्टर महिला मरीजों को बिना जानकारी दिए ऐसा काम करता था।
दरअसल, यह घटना अमेरिकी के एक डॉक्टर से संबंधित है। द मेट्रो की एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर का नाम (Donald Kline) डोनाल्ड क्लाइन है। वह अपने यहां आनेवाले मरीजों में अपना स्पर्म डाल दिया करता था। यह सब वह तब करता था जब वह मरीजों को बेहोश कर देता था। यह डॉक्टर महिला मरीजों को बिना जानकारी दिए ऐसा काम करता था।
महिला को बेहोश करके करता था ये काम
रिपोर्ट के मुताबिक महिला ने बताया कि मुझे पता भी नहीं चला और डॉक्टर क्लाइन द्वारा इलाज के दौरान यह सब हुआ है। हालांकि यह घटना कई साल पहले हुई थी जब डॉक्टर ने यह काम इलाज के नाम पर किया था।
तब के प्रावधानों के मुताबिक उसने कोई क्रिमिनल कानून को नहीं तोड़ा था। उससे सिर्फ करीब 40 हजार रुपए का फाइन वसूला गया। लेकिन अब जबकि उसके ऊपर फिल्म बनी तो वह एक बार खबरों में आ गया।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS जीपी सिंह को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने जीपी सिंह को 50 हज़ार के बाण्ड पर सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि जीपी सिंह राज्य के बाहर रहेंगे और सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट में बुलाए जाने पर पेशी पर आना होगा।
बता दें कि EOW की टीम ने जीपी सिंह को 11 जनवरी को नोएडा से गिरफ्तार किया था। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके साथ ही मामले की केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
क्या है जीपी सिंह के खिलाफ मामला :
आईपीएस जीपी सिंह के ठिकाने पर एक जुलाई को एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीमों ने रायपुर, राजनांदगांव और ओडिशा में एक साथ छापा मारा था। जीपी सिंह पर एफआईआर दर्ज की गई। दिन भर की जांच के बाद पांच करोड़ की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ। 10 करोड़ की संपत्ति मिलने और इसके बढ़ने की आधिकारिक जानकारी दी गई।
अन्य आरोपों में रायपुर में एक युवक से मारपीट, भिलाई में सरेंडर करने वाले नक्सल कमांडर से रुपयों का लेन-देन, रायपुर में एक केस में आरोपित की मदद का आरोप जीपी सिंह पर लगा। इसके साथ ही जीपी सिंह के घर से कुछ डायरियां भी मिली। जिसमे सरकार के खिलाफ साजिश रचने के संकेत मिले थे। जिसके बाद जीपी सिंह को निलंबित किया गया और केस रजिस्टर्ड हुआ।
कोरबा। तौकीर अहमद खान के विरुद्ध कलेक्टर कोरबा द्वारा जिला बदर आदेश पारित कर 01 वर्ष के लिए जिला कोरबा सहित सीमावर्ती जिलों से जिला बदर किया गया है । आरोपी तौकीर खान कलेक्टर कोरबा के आदेश का उल्लंघन करते हुए कोरबा में लुक छिपकर रह रहा था , कल दिनांक 11 मई 2022 को धनंजय साहू नामक व्यक्ति को गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दिया गया है । आरोपी तौकीर अहमद खान के विरुद्ध 02 अलग-अलग एफआईआर दर्ज किया गया है ।
बता दें कि कलेक्टर कोरबा द्वारा आरोपी तौकीर अहमद खान पिता सलाउद्दीन खान निवासी रिसदी चौक रामपुर के विरुद्ध 01 सितंबर 2021 को आदेश पारित कर जिला कोरबा सहित सीमावर्ती जिलों से 01 वर्ष के लिए जिला बदर किया गया है, इसके बावजूद भी कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन कर आरोपी तौकीर अहमद खान कोरबा में निवास कर रहा था जिसकी जानकारी होने पर आरोपी तौकीर अहमद खान के विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज किया गया है ।
साथ ही प्रार्थी धनंजय साहू पिता स्वर्गीय हरीराम साहू निवासी रिसदी चौक कोरबा के द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराया गया है कि आरोपी तौकीर अहमद खान दिनांक 11.05.2022 को प्रार्थी धनंजय साहू को गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी दिया है । प्रार्थी के रिपोर्ट पर आरोपी तौकीर अहमद खान के विरुद्ध धारा 294,506 भादवि के अंतर्गत अलग से एफआईआर दर्ज किया गया है ।
आरोपी तौकीर अहमद खान के द्वारा कलेक्टर कोरबा के आदेश का उल्लंघन कर कोरबा में निवास करने के मामले को पुलिस अधीक्षक कोरबा श्री भोजराम पटेल ने गंभीरता से लिया है । इसकी सूचना कलेक्टर कोरबा को भेजा जा रहा है ताकि जिला बदर आरोपी के विरुद्ध अग्रिम वैधानिक कार्यवाही किया जा सके ।
यूपी । मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को अब रोजाना राष्ट्रगान गाना होगा. सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में रोजाना जन-मन-गण गाना अनिवार्य कर दिया है. योगी सरकार के इस फैसले पर मुस्लिम समाज ने आपत्ति जताई है. मौलानाओं का कहना है कि जब मदरसों में 15 अगस्त और 26 जनवरी को राष्ट्रगान गाया जाता है तो उसे रोजाना अनिवार्य करने की क्या जरूरत है. वहीं सरकार ने इस फैसले मुस्लिम समाज के हित में बताया है.
‘मदरसों में राष्ट्रवाद बढ़ाएगा रोजाना राष्ट्रगान’
यूपी मदरसा बोर्ड (UP Madrasa Board) के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद (Dr. Iftikhar Ahmed Javed) ने कहा कि प्रदेश में आज से मदरसे खुल गए हैं और उनमें आलिमों का पढ़ाई के लिए आना शुरू हो गया है. मदरसे के ये बच्चे देश की मुख्यधारा में आएं और उनके अंदर राष्ट्रप्रेम की भावना बढ़े. इसके लिए सुबह पढ़ाई शुरू होने से पहले की जाने वाली अन्य दुआओं के साथ राष्ट्रगान गाना भी अब अनिवार्य होगा.
‘दूसरे बच्चों की तरह दिखाई देंगे मदरसों के बच्चे’
मदरसा बोर्ड (UP Madrasa Board) के चेयरमैन ने कहा कि मदरसों के बच्चे दूसरे सामान्य स्कूलों के बच्चों की तरह दिखाई दें और देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाएं, इसके लिए बोर्ड लगातार प्राथमिकता के आधार पर काम करता रहेगा.
मजहबी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा भी जरूरी’
डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद (Dr. Iftikhar Ahmed Javed) ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का कहना है कि मुसलमानों के बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में कंप्यूटर हो. यह उनकी मुस्लिम समाज को आगे बढ़ाने की सकारात्मक सोच को दर्शाता है. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए अब बोर्ड (UP Madrasa Board) ने फैसला लिया है कि नए सत्र से मदरसों के बच्चे मजहबी शिक्षा की पढ़ाई के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी अनिवार्य रूप से पढ़ेंगे. साथ ही राष्ट्रवाद की भावना को आगे बढ़ाने के लिए वे रोजाना राष्ट्रगान भी गाया करेंगे.
न्यूज डेस्क।दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने बुधवार को कहा कि यह अदालतों पर निर्भर है कि वे जटिल सामाजिक मुद्दों से संबंधित निर्णय लें, न कि उन्हें छोड़ दें।” हालांकि मैरिटल रेप पर विभाजित फैसले में अपवाद को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति शकधर ने अपने फैसले में कहा, “चूंकि यह संविधान का मत है और इसलिए, एक कर्तव्य और दायित्व जिसे संविधान के तहत ली गई शपथ के लिए सच रहना है, तो उसे पूरा किया जाना चाहिए। इस प्रकार, संस्था की ओर से दोष यह है कि किसी न किसी तरह से इस मुद्दे को बहुत पहले ही खत्म कर दिया जाना चाहिए था।”
न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक आत्म-संयम का सिद्धांत उन मामलों में लागू नहीं होता है जिनमें नागरिक अधिकारों या मानवाधिकारों के उल्लंघन के संदर्भ में राज्य द्वारा मौलिक अधिकारों का कथित हनन शामिल है। जस्टिस शकधर ने कहा “इस प्रकार, यह तय करने के लिए कि अदालत के अधिकार में क्या आता है और इसे कार्यपालिका और/या विधायिका पर छोड़ देना, मेरे विचार से कर्तव्य का परित्याग और वह भूमिका जिसे संविधान ने अदालतों के लिए परिभाषित किया है।”
धारा 375 के अपवाद 2 पर निर्णय, जो आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने से उन पुरुषों को बचाता है, जिन्होंने अपनी पत्नियों को गैर-सहमति संभोग करने के लिए विवश किया है।
आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने से अपनी पत्नियों के साथ गैर-सहमति संभोग करने वाले पुरुषों की रक्षा करने वाली धारा 375 के अपवाद 2 पर फैसला सुनाते हुए, न्यायमूर्ति शकधर ने कहा, “(ए) सेक्स वर्कर को कानून द्वारा ‘नहीं’ कहने का अधिकार मिला है, लेकिन विवाहित महिला के पास ऐसा अधिकार नहीं है। पीड़िता के पति से जुड़े गैंगरेप में सह-अभियुक्त को रेप कानून का खामियाजा भुगतना पड़ेगा; लेकिन अपराधी पति को नहीं, क्योंकि पीड़िता के साथ उसके अपने संबंध हैं।”
उन्होंने कहा कि एक महिला को, जिसके साथ उसके पति ने यौन शोषण का सबसे घृणित तरीका अपनाया, यह कहने का कोई जवाब नहीं है कि कानून उसे अन्य उपाय प्रदान करता है। उन्होंने कहा, अन्य कोई भी क़ानून दुष्कर्म के अपराध को अपने दायरे में नहीं लाता है,
न्यायाधीश ने कहा कि विवाह को बचाने में राज्य का सुखद “वैध हित” नहीं हो सकता है, जब वही “अत्याचार” हो। इस तर्क पर कि राज्य ने यौन अपराधों के अन्य रूपों को मान्यता दी है और केवल पारिवारिक संरचना की रक्षा को अपवाद माना है, न्यायमूर्ति शकधर ने कहा कि यह “घृणित सामान्य कानून सिद्धांत को मान्यता देने के बराबर है कि एक विवाहित महिला और कुछ नहीं बल्कि संपत्ति है जो एक बार जब वह विवाह कर लेती है तो यौन साधन को खो देती है।”
न्यायाधीश ने कहा कि जब एक महिला के साथ उसका पति “निजी और सार्वजनिक जगह तय करके” जबरन यौन संबंध बनाता है, तब भी कानून को दूर रखने का प्रयास “उसे उस माध्यम और स्वायत्तता से वंचित करना है जो संविधान उसे प्रदान करता है।” मैरिटल रेप में साक्ष्य के सवाल पर न्यायाधीश ने कहा कि केवल इसलिए कि यह साबित करना मुश्किल है, बलात्कार के लिए कोई अपनी आंखें बंद नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि पति द्वारा यौन उत्पीड़न को बलात्कार कहा जाना चाहिए, “क्योंकि यह उन तरीकों में से एक है जिसमें समाज अपराधी के आचरण के बारे में अपनी अस्वीकृति व्यक्त करता है।”
जस्टिस शकधर ने अपवाद के बारे में कहा “यह सहवास के संबंध में उनकी यौन माध्यम को कम करता है और उन्हें पैदा करने या प्रजनन से दूर रहने का अधिकार देता है। अधिक मौलिक रूप से, गर्भनिरोधक पर बातचीत करने की उनकी शक्ति, यौन संचारित रोग से खुद को बचाने और सुरक्षा के माहौल की तलाश करने के लिए, उसके दुर्व्यवहारों के चंगुल से दूर होना पूरी तरह से समाप्त हो गई है।”
उन्होंने पति की अपेक्षा पर तर्क से निपटने के दौरान कहा, दाम्पत्य अपेक्षा तब तक मान्य है जब तक कि पत्नी की सहमति के बिना यौन संबंध रखने के लिए उम्मीद के बराबर नहीं है।
राजस्थान के भरतपुर में दहेज नहीं देने पर विदाई के समय सजी-धजी दो दुल्हनों को छोड़ कर दूल्हे चले गए. दरअसल वहां दो चचेरी बहनों की शादी दो सगे भाइयों के साथ बीती रात संपन्न हुई और सुबह जब विदाई होनी थी तो दूल्हे पक्ष के लोगों ने दहेज की मांग कर दी.
मामला बयाना थाना के सिकंदरा गांव का है, जहां के निवासी दो चचेरी बहन सुषमा भारती और राजकुमारी की शादी बीती रात संपन्न हुई थी. सुबह दोनों दुल्हनों की विदाई होनी थी मगर विदाई के समय दूल्हे के परिजनों ने ढाई लाख रुपये और मोटरसाइकिल दहेज में देने की मांग की. दुल्हनों के माता-पिता ने जब उनकी मांग पूरी नहीं की.
फिर दोनों दूल्हे विदाई के समय सजी-धजी दोनों दुल्हनों को छोड़कर चले गए. इस घटना के बाद दोनों दुल्हन अपने परिजनों के साथ बयाना थाने पहुंची व दहेज के लोभी दूल्हों के परिजनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. बताया जा रहा है कि दोनों की शादी रामपुरा निवासी गौरव और पवन के साथ हुई थी.
बीती रात दोनों दूल्हे बारात लेकर आए थे. रात में शादी हो गई थी और सात फेरे भी पड़ गए थे. शादी संपन्न होने के बाद आज सुबह जब दोनों दुल्हनों की विदाई होने वाली थी, तभी दूल्हे के परिजन दहेज की मांग के लिए अड़ गए. जब दहेज की मांग पूरी नहीं की तो सजी-धजी दुल्हनों को छोड़कर दोनों दूल्हे बारात को लेकर वापस लौट गए.
फिलहाल पुलिस ने शिकायत ले ली है और जांच की जा रही है. इस मामले में दुल्हन सुषमा भारती ने कहा कि हम दोनों बहनों की शादी संपन्न हो गयी थी और फेरे भी पड़ गए थे, आज सुबह हमारी ससुराल के लिए विदाई होनी थी मगर दूल्हे के परिजनों ने 5 लाख रूपये, मोटर साइकिल और सोने के कुछ आभूषण दहेज़ में मांगे थे.
वहीं, पूर्व सरपंच तेज सिंह ने बताया कि गांव में दो चचेरी बहनों की शादी हुई थी लेकिन सुबह विदाई के वक्त दूल्हे के परिजन 5 लाख रूपये और बाइक मांगने लगे, जब दहेज़ नहीं दिया तो दुल्हनों को छोड़कर चले गए है, उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की जा रही है.
न्यूज डेस्क।कभी-कभी कुछ लोग नशे की लत में कुछ ऐसी हरकत कर बैठते हैं, जिसकी कोई उम्मीद भी नहीं करता. शराब की तलब में एक शख्स ने ऐसा चौंकाने वाला काम किया, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता. एक 22 वर्षीय व्यक्ति ने शुक्रवार की सुबह 2:30 बजे 100 डायल किया और पुलिस से उसे दो बोतल बीयर लाने को कहा. घटना तेलंगाना (Telangana) के विकाराबाद जिले (Vikarabad District) की है.
पुलिस को फोन लगाकर दो बोतल बीयर लाने को कहा
हैदराबाद में रहने वाले दौलताबाद के मूल निवासी मधु के रूप में पहचाने जाने वाले व्यक्ति ने 100 डायल किया और दावा किया कि वह संकट में था क्योंकि लोगों का एक समूह उस पर हमला करने की धमकी दे रहा था. गश्ती दल मौके पर पहुंचा तो पुलिस ने उसे नशे की हालत में पाया. पास ही एक कार्यक्रम चल रहा था. जब पुलिस ने उसकी समस्या के बारे में पूछताछ की, तो उसने उनसे दो बोतल बीयर लाने को कहा. पुलिस द्वारा उसके खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद मधु की काउंसलिंग की गई और उसे छोड़ दिया गया.
कुछ दिन पहले भी हुई थी कुछ ऐसी ही घटना
पिछले दिनों कुछ ऐसी ही एक घटना सामने आई थी. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन में एक व्यक्ति ने मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और आबकारी विभाग को एक लिखित शिकायत भेजी कि दो बोतल शराब पीने के बाद भी उसे नशा नहीं हुआ. उन्होंने अपनी शिकायत के साथ शराब की बची हुई बोतलें भी सबूत के तौर पर पेश कीं. जब उनकी शिकायत पर कोई जांच नहीं हुई तो उन्होंने कहा कि वह उपभोक्ता फोरम का रुख करेंगे.
नई दिल्ली/रांची। झारखंड मनरेगा घोटाले के आरोप में पकड़ी गईं झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल ने जेल लाए जाने पर चक्कर आने तबीयत बिगड़ गई। जेल प्रशासन ने कहा कि फिलहाल आईएएस पूजा सिंघल की तबीयत सामान्य है।
गिरफ्तारी के बाद पूजा सिंघल ने पहली रात बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में काटी। रात के 10 बजे उन्होंने जेल में जैसे ही प्रवेश किया और मेन गेट खुला तो उनका ब्लड प्रेशर काफी अधिक बढ़ गया। उन्होंने चक्कर आने की शिकायत की और इसके बाद डॉक्टरों को जांच के लिए बुलाया गया। रिमांड पर ली गई पूजा सिंघल ने पानी पी पीकर जेल में अपनी रात गुजारी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक जेल प्रशासन के दो सिपाही आनन-फानन में दवा दुकान पहुंचे और ब्लड प्रेशर की दवा लाकर पूजा सिंघल को दी गई। दवा खाने के बाद पूजा सिंघल का ब्लड प्रेशर नार्मल हुआ और उनकी स्थिति ठीक हुई। इसके बाद पूजा सिंघल को महिला वार्ड में भेज दिया गया।
बता दें कि आईएएस पूजा सिंघल को मनरेगा के फंड का गबन करने के आरोप में बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें 5 दिनों के लिए ईडी की रिमांड में भेजने का फैसला लिया गया था। उनकी रिमांड आज से शुरू हो रही है। ईडी उनसे लगातार 5 दिनों तक पूछताछ करेगी।
हनुमानगढ़। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर शहर में दो समुदायों में झड़प के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस झड़प में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के ब्लॉक अध्यक्ष सतवीर सहारन घायल भी हुए हैं। तनाव के बाद जिला प्रशासन ने हनुमानगढ़ जिले के नोहर समेत दो अन्य शहरों में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि सहारन को चोट आई है और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। नोहर के अडिशनल एसपी सुरेश जांगीर ने कहा, कल दो समूहों के बीच मामूली झड़प हुई, जिसमें एक व्यक्ति सतवीर घायल हो गया और उसे अस्पताल ले जाया गया। दो अन्य को मामूली चोटें आई हैं। स्थिति नियंत्रण में है।
पुलिस के मुताबिक, नोहर के रामदेव मंदिर के पास सहारन द्वारा लड़कियों से छेड़छाड़ करने से रोकने पर सात से आठ लोगों ने विहिप नेता पर हमला कर दिया। पुलिस ने मामले में अदीस और अमीन नाम के दो आरोपियों को हिरासत में लिया है।