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सीजी ब्रेकिंग: प्रेशर IED की चपेट में आने से 1 जवान घायल, एसपी ने की घटना की पुष्टि

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में प्रेशर IED की चपेट में आने से 1 जवान घायल हुआ है। घायल जवान सरैया तलंडी ज़िला बल में पदस्थ था। नक्सल पर्चे को निकालने के दौरान हादसा हुआ है। फिलहाल घायल जवान की स्थिति खतरे से बाहर है। घायल जवान को बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय के लिए रेफर किया गया है।

एसपी कमलोचन कश्यप ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि थाना से लगभग 1 किमी दूर संजयपारा के पास विस्फोट हुआ है। पूरा मामला इलमिडी थानाक्षेत्र का है।

`मैं करूंगा जिंदा, लाओ बॉडी`, तांत्रिक के कहने पर फैमिली ने खुलवाया मुर्दाघर का गेट

दमोह। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दमोह (Damoh) से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल यहां एक तांत्रिक (Tantrik) ने जिला अस्पताल में बहुत नौटंकी की. तांत्रिक ने दावा किया कि वो मुर्दाघर (Morgue) में मृत पड़े एक शख्स को जिंदा कर सकता है और मुर्दाघर खोलने की जिद करने लगा. जब मुर्दाघर नहीं खोला गया तो वो मृतक के परिजनों के साथ मिलकर हंगामा करने लगा.

तांत्रिक के साथ मुर्दाघर पहुंचे परिजन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दमोह में पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास रहने वाले सोनू आदिवासी नामक एक शख्स ने खुदकुशी कर ली थी, जिसके बाद उसका शव जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया था. परिजनों ने सोनू का शव खुद मुर्दाघर में रखवाया था. बता दें कि मृतक का शव रखकर उसके परिजन अपने घर चले गए थे. लेकिन कुछ देर बाद वो अपने साथ एक तांत्रिक को लेकर लौटे. तांत्रिक ने दावा किया कि सोनू के पास अभी समय है. अगर उसे मुर्दाघर से निकाला जाए तो वो उसे जिंदा कर देगा.

गेट नहीं खुलने पर भड़का तांत्रिक

लेकिन जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने तांत्रिक के दावे को नकारते हुए मुर्दाघर का गेट नहीं खोला. इसपर तांत्रिक भड़क गया और हंगामा करने लगा. इस हंगामे में मृतक के परिजनों ने भी उसका साथ दिया. इसके बाद भी जब मुर्दाघर नहीं खोला गया तो तांत्रिक मुर्दाघर का दरवाजा तोड़ने लगा.

मुर्दाघर के बाहर किया हंगामा

इसके बाद जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने पुलिस को फोन किया और मुर्दाघर के बाहर हंगामा होने की शिकायत की. खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाने की कोशिश की कि मुर्दाघर का दरवाजा खुलवाने से कुछ नहीं होगा डॉक्टर सोनू को मृत घोषित कर चुके हैं लेकिन परिजन नहीं माने.

अंबिकापुर: बेटा बेटी को जहर देकर सीमेंट व्यवसायी खुद फांसी पर लटका, बेटे की मौत, बेटी गंभीर

अंबिकापुर। गोधनपुर ईलाके में सीमेंट व्यवसायी ने अज्ञात कारणों से चार वर्षीया बच्ची और ढाई साल के बेटे को ज़हर खिला दिया और खुद फाँसी पर झूल गया। कल देर शाम हुई घटना की सूचना पर पुलिस मौक़े पर पहुँच जाँच में जुटी है।

जानकारी के अनुसार वसुंधरा विहार निवासी व्यवसायी सुदीप मिश्रा रात क़रीब नौ दस के बीच घर पहुँचने के बाद साले और पत्नी को बाज़ार भेज दिया। घर पर चार साल की बेटी और ढाई बरस के बेटे को कुरकुरे खिलाया और घर के उपरी तल पर फाँसी लगाकर ख़ुदकुशी कर लिया। व्यवसायी और बच्ची की मौत हो चुकी है,जबकि बच्चे की हालत बेहद नाज़ुक बनी हुई है। पुलिस ने मामले को जांच में लिया है।

ब्रेकिंग: NSE की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण गिरफ्तार, सीबीआई मुख्यालय में होगी पूछताछ

नई दिल्ली। को-लोकेशन घोटाला मामले में सीबीआई ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण को गिरफ्तार किया। सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि रामकृष्ण को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया, इसके बाद उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया। बाद में उन्हें सीबीआई मुख्यालय में रखा जाएगा। सीबीआई ने कहा कि चित्रा रामकृष्ण जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं, इसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

बता दें कि एनएसई के पूर्व प्रमुख पर कथित तौर पर ‘हिमालय में रहने वाले योगी’ के साथ एक्सचेंज के बारे में संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए जांच चल रही है।

कौन हैं चित्रा रामकृष्ण और आनंद सुब्रमण्यम

चित्रा रामकृष्ण साल 2013 से लेकर 2016 तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सीईओ और एमडी रहीं। 2013 में उन्हें सीईओ पद सौंप दिया गया। हालांकि, 2016 में उन्हें पद के गलत इस्तेमाल और एक घोटाले से नाम जुड़ने के बाद एनएसई से निकाल दिया गया था।

चित्रा पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाम के दौरान कई ऐसे फैसले लिए, जो कि शेयर बाजार के हित से नहीं जुड़ा था। इनमें एक फैसला था आनंद सुब्रमण्यम की नियुक्ति का, जिनके लिए चित्रा ने एनएसई में अधिकारी स्तर का पद तैयार किया था। साथ ही चित्रा ने अपने कार्यकाल के दौरान हर बार आनंद सुब्रमण्यम को प्रमोशन दिया।

आनंद सुब्रमण्यम एनएसई में शामिल होने से पहले बामर एंड लॉरी नाम की एक कंपनी में काम करते थे। जहां उनकी सैलरी केवल 15 लाख रुपये सालाना थी और शेयर बाजार और उससे संबंधित काम का कोई अनुभव नहीं था। बावजूद आंनद सुब्रमण्यम को 1.68 करोड़ रुपए का सैलरी पैकेज दिया गया।

हिमालय पर बैठे ‘योगी’ के आदेश पर चल रहा था NSE?

चित्रा रामकृष्ण कई सालों से अपने महत्वपूर्ण कारोबारी फैसलों में एक बाबा से सलाह ले रही थीं। एक ऐसा बाबा (योगी), जो हिमालय में रहता था और तीन वेदों के नाम वाली एक मेल आईडी का इस्तेमाल करता था। यह बाबा मेल पर रामकृष्ण को निर्देश देता था और फैसले हो जाते थे। खास बात यह है कि रामकृष्ण इस योगी से कभी मिली ही नहीं, लेकिन वह करीब 20 वर्षों से इस योगी से मेल पर बातचीत कर रही थीं।

इस मामले में कार्रवाई करते हुए सेबी ने रामकृष्ण पर तीन करोड़ रुपए, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर दो करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा एनएसई को कोई भी नया प्रोडक्ट पेश करने से छह महीने के लिए रोक दिया। साथ ही इसे 6 महीने तक पैसा जुटाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

अधिकारियों ने कहा कि CBI ने रामकृष्ण से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की और उनके आवास पर तलाशी ली। उन्होंने कहा कि वह जांच में सहयोग नहीं कर ही थी और ना ही उचित प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं।

जहां मैं जाता हूं वही चले आते हो…समाधान शिविर की जरूरत कलेक्टोरेट में..यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष की तलाश किसके गुट सजेगा सरताज….

नवा रायपुर में पुरानी बात….’ऊपरवाले’ पर भरोसा

नवा रायपुर के किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। पहले कृषि मंत्री समझाने आए जब बात नहीं बनी तो मंत्री मोहम्मद अकबर को सामने कर दिया कहने का मतलब है तुम्हारा विभाग है तुम जानों… दरअसल मामला किसानों का है….और किसानों के झमेले में पड़ना यानि सीधे सीधे हाईकमान की नजर में चढ़ना। अब बेचारे आवास मंत्री मोहम्मद अकबर को ही इस समस्या का हल निकलना पड़ेगा नहीं तो किसान सीधे राहुल गांधी से मिलने की धमकी दे रहे हैं। यानि मामला जोखिम बढ़ाने वाला है।

वैसे भी मंत्री मोहम्मद अकबर के लिए इस बार सत्ता आसान नहीं रही, पहले उनके पास खाद्य विभाग था जिसे लेकर कका ने अमरजीत भगत को दे दिया, फिर कवर्धा झंडा मामला से जैसे तैसे उबरे अब नवा रायपुर के किसान उनके पीछे पड़ गए हैं। सामने विधानसभा का सत्र भी है, अब इस परेशानी से तो ‘ऊपरवाला’ यानि…. की बचा सकता है।

जहां मैं जाता हूं वही चले आते हो….

56 के दशक में फ़िल्म चोरी चोरी का एक गाना हिट हुआ था। फीमेल वर्जन का ये गाना जहां मैं जाती हूँ वहीं चले आते हों ये तो बताओ तुम… यह गाना इन दिनों मेल वर्जन के साथ जिले एक थानेदार पर फिट बैठता दिख रहा है। और वो मजाकिया लहजे में गाना भी गुनगुना रहें है ..जहां जहां मैं जाता हूँ वहीं चले आते हो ये बताओ तुम… खैर जिस थाने की बात हम कर रहे हैं वो कोयलांचल का एक थाना है और नव पदस्थ थानेदार ने जिले में थानेदारी की शुरुआत वहीं से की थी। हां एक बात और इस थाने की खासियत है कि इस थाने में बिना थानेदारी किए कोई बड़ा थाना नहीं मिलता। रामपुर, दर्री, बांकी का पीछा नहीं छोड़ने वाले थानेदार भी अब वही गीत गाने लगे हैं। पीछे पीछे पाली से अब दर्री पता नहीं अब कितने घाट घाट का पानी पीना पड़ेगा। अब लोग कहने लगे हैं अच्छे थाने में पोस्टिंग पाना है तो एक बार दर्री बांकी जरूर जाए अब राकेश, विजय, राजेश, रामेन्द्र को ही ले लीजिए बांकी से अपने हुनर का जलवा बिखेरकर कोतवाली जैसे बड़े थाने की थानेदारी कर रहे हैं। यही नहीं इस थाने में 2016 के आसपास एक आईपीएस जो इन दिनों कप्तानी पारी खेल रहे हैं वे भी थाना प्रभारी रह चुके है। सो अब साहब का क्या इरादा है कोतवाली या दीपका… खैर अभी अभी पोस्टिंग हुई है तो अभी संभव नहीं है पर कोयला की तपिश बढ़ी तो कुछ भी हो सकता है।

नेताओं का किस्मत दांव पर और दावा सटोरियों का…

मिनी भारत कहे जाने वाले कोरबा में हर प्रान्त के लोग रहते हैं और अपने क्षेत्र की राजनीतिक खुमारी से पीछे नहीं रहते,यहीं वजह है चुनाव कहीं भी पर ऊर्जाधानी के ऊर्जावान नेता अपनी पार्टी की बातों में जितने कोई कसर नहीं छोड़ते। होना भी यही चाहिए क्योंकि समर्थक तो हर हाल में अपने नेताओं के सर ताज देखना चाहता है। अब यूपी का चुनाव को ही ले लीजिए चुनाव भले ही उत्तरप्रदेश में है पर चर्चा कोरबा में सर चढ़कर कर है। चुनाव वहां हो रहा है और हार जीत का दांव यहां लग रहा है। वैसे यूपी चुनाव में हमारे शहर के भी कुछ पार्टियों के सुरमा चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे हैं। अपने घर में भले ही 100 वोट ना जुटा पाए लेकिन उधर से आने के बाद शेख चिल्ली बन गए हैं, उस तुर्रा ये है कि उनके प्रचार से प्रत्याशी को जीत मिल चुकी है। परिणाम की घोषणा बाकी है। वैसे इन दिनों यूपी चुनाव को लेकर खास गहमागहमी है।

दिलचस्प तथ्य यह है शहर के राजनीतिक सुरमा भाजपा गठबंधन को सत्ता के करीब पहुंचा रहा है वहीं सपा गठबंधन को दूसरे नंबर पर है औऱ कॉंग्रेस को किंगमेकर बना रहे हैं। जिले की एक बड़ी आबादी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखती है, इसलिए तेल के साथ तेल की धार देखना उन्हें बखूबी आता है। अब परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि जिले के लालबुझक्कड़ टाइप नेताओं की भविष्यवाणी कहां तक सही होती है।

समाधान शिविर की जरूरत कलेक्टोरेट में…

एक खबर इन दिनों खूब चर्चा में रही कि अब आम लोगों की समस्या सुनने अधिकारी ग्रामीण अंचलों में शिविर लगाएंगे। शिविर लगाने की बात सुनकर चौक चौराहो में खबर आम होने लगी है कि कलेक्टर दफ्तर में लंबित मामलों के लिए भी एक शिविर लगाया जाए ताकि रोज रोज लोगों को दफ्तर का चक्कर लगाना न पड़े।

आयडिया बुरा भी नहीं है। क्योंकि वैसे तो आम ही या खास किसी का काम हो नहीं रहा। समस्या से ग्रसित जनमानस कार्यालय जाते हैं तो पता चलता है आज अधिकारी मीटिंग में हैं, दौरे में हैं। ऐसे में पब्लिक करें तो करें क्या अब अपने उच्च अधिकारी को सलाह तो दे नहीं सकते। तो चलो कम से कम चर्चा कर लेते हैं। सही भी है जब कलेक्टोरेट कार्यालय का ये हाल है तो गांव ने शिविर … लोगों की समस्या और निराकरण … की बातें बेमानी लगती है।

यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष की तलाश किसके गुट सजेगा सरताज

यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में चल रही गुटबाजी किसी से छुपा हुई नही है। बुजुर्गों की राजनीति में गुटबाजी हो तो युवा वर्ग इससे अछूता कैसे रहें ??

हाल ही में शहर के एक कद्दावर नेता गुट को एनएसयूआई का ताज पहनाया गया तो इसकी सुगबुगाहट राजधानी तक पहुंच गई । फिर क्या था। यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को उर्जानगरी आकार प्रेस वार्ता लेकर कहना पड़ा कि यूथ जिला अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द होगी। मतलब साफ है हम किसी से कम नही की तर्ज पर हो रही राजनीति से वर्चस्व की लड़ाई में अपनों के बीच दरार आ रही है। खैर अब देखना होगा कि यूथ कांग्रेस का नेतृत्व किस गुट को मिलता है??

कही बात दिल्ली लेबल पर गईं तो अगले 8-10 बरस तक युवा दावेदारी पेश करते हुए बुढ़ापे की शरण में पहुंच जाएंगे।

 

                  अनिल द्विवेदी, ईश्वर चन्द्रा

फिलिस्तीन में भारतीय राजदूत मुकुल आर्य का निधन, विदेश मंत्री एस जशंकर ने दी श्रद्धांजलि

कनई दिल्ली। फिलिस्तीन में भारत के राजदूत मुकुल आर्य का निधन हो गया है। आर्य के निधन पर केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो मुकुल आर्य रविवार को भारतीय दूतावास के अंदर ही मृत पाए गए। आर्य फिलिस्तीन के रमल्ला स्थित भारतीय एम्बेसी में तैनात थे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर लिखा किर मल्ला में भारत के प्रतिनिधि मुकुल आर्य के निधन की खबर से गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने मुकुल आर्य को प्रतिभाशाली अधिकारी बताया।

पुरानी बनाम नई पेंशन योजना: सरकारी कर्मचारी क्यों कर रहे विरोध; समझें OPS-NPS में अंतर

नई दिल्ली। राजनीति गलियारों में इस वक्त पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना को लेकर चर्चा हो रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले महीने कहा था कि सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल किया जाना है।

इसके बाद बीजेपी शासित हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों ने भी इसी तरह की मांग करना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते शिमला में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखा गया, जबकि मध्य प्रदेश में राज्य कर्मचारी भीमराव अंबेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल को एक बड़े प्रदर्शन के लिए तैयार हैं।

बता दें कि दिसंबर 2003 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को खत्म कर दिया था। इसके बदले में एक अप्रैल 2004 नई पेंशन योजना (NPS) लागू की गई थी। इस बीच, राजस्थान के बाद एक और कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ ने भी अगले वित्तीय वर्ष से पुरानी पेंशन योजना को फिर से शुरू करने की घोषणा करने के लिए तैयार है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पुरानी योजना पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से चर्चा की।

ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना में अंतर…

राष्ट्रीय पेंशन योजना और पुरानी पेंशन योजना  में अंतर

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) सरकार के लिए पेंशन देनदारियों से छुटकारा पाने के लिए शुरू की गई थी। 2000 के दशक की शुरुआत के एक शोध का हवाला देते हुए एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक भारत का पेंशन कर्ज बेकाबू स्तर पर पहुंच रहा था।

एनपीएस ग्राहकों (सरकारी कर्मचारियों) को यह तय करने की अनुमति देता है कि वे अपने पूरे करियर में पेंशन खाते में नियमित रूप से योगदान करके अपना पैसा कहां निवेश करना चाहते हैं। रिटायरमेंट के बाद वे पेंशन राशि का एक हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं और बाकी का इस्तेमाल वार्षिकी (annuity plan) खरीदने के लिए कर सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी की सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी। वहीं, नई पेंशन स्कीम में कर्मचारी की सैलरी से 10 फीसदी की कटौती की जाती है। साथ ही इसमें 14 फीसदी हिस्सा सरकार मिलाती है। पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ की सुविधा होती थी, लेकिन नई स्कीम में जीपीएफ की सुविधा नहीं हैष पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय की सैलरी की करीब आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी।

जबकि नई पेंशन योजना में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है। पेंशन योजना में आने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्त के बाद पूरी रकम मिलने के बाद बेसिक सैलेरी का करीब करीब 50 फीसदी हिस्सा पेंशन के तौर पर मिल जाता है।

पुरानी पेंशन योजना के समर्थन में ये राज्य

राजस्थान ने कहा है कि वह अगले वित्तीय वर्ष से राज्य में पुरानी पेंशन योजना को वापस लाएगा और छत्तीसगढ़ को भी इसका पालन करने की उम्मीद है। राहुल गांधी के साथ इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान गहलोत ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि केरल, आंध्र प्रदेश और असम की सरकारों ने भी पुरानी पेंशन योजना के संबंध में समितियों का गठन किया था।

2 सूत्रीय मांग के लिए अधिकारी व कर्मचारी महासंघ सौपेंगे ज्ञापन… सियान सदन में बनी रणनीति…

कोरबा। प्रदेश कर्मचारी व अधिकारी महासंघ के अगुवाई में चल रहे दो सूत्रीय मांग को लेकर कल कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा जाएगा। सोमवार को भोजनावकाश में ज्ञापन सौंपने के आज सियान सदन में रणनीति तैयार की गई।

बता दें कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी महासंघ रायपुर के प्रांतीय आह्वान पर प्रदेश भर के समस्त अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा 2 सूत्रीय मांगों को लेकर जिसमें 14% महंगाई भत्ता एवं गृह भाड़ा भत्ता को लेकर सोमवार को भोजन अवकाश में माननीय मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर कोरबा के माध्यम से ज्ञापन सौंपने की रणनीति तैयार की गई।

अधिकारी व कर्मचारी की मांग के लिए ज्ञापन सौंपने के लिए आज सियान सदन घंटा घर चौक कोरबा में बैठक आयोजित की गई l जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रदेश भर के समस्त अधिकारी कर्मचारियों का 14% महंगाई भत्ता एवं गृह भाड़ा भत्ता के मांगों को लेकर आईटीआई तानसेन चौक से कोरबा के समस्त अधिकारी कर्मचारी भोजन अवकाश पर रैली निकालकर ज्ञापन सौंपने हेतु निर्णय लिया गयाl बैठक में उपस्थित नरेंद्र चंद्रा कार्यवाहक अध्यक्ष टीचर्स एसोसिएशन संघ कोरबा, एवं एसके द्विवेदी अध्यक्ष तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ कोरबा, तरुण राठौर जी अध्यक्ष शिक्षक संघ कोरबा, यू आर महिलांगे अध्यक्ष जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल कोरबा, एफआर टंडन कोषाध्यक्ष अजाक्स संघ, आरके शर्मा अध्यक्ष पेंशनर संघ कोरबा, राजेंद्र मिश्रा जिला सचिव लिपिक संघ कोरबा, जेपी कोसले प्रांतीय सचिव शिक्षक कांग्रेश कोरबा, एम एल यादव अध्यक्ष शिक्षक कांग्रेस कोरबा, उपेंद्र राठौर अध्यक्ष टीचर्स एसोसिएशन करतला, चंद्रिका पांडे अध्यक्ष टीचर्स एसोसिएशन कटघोरा, दामोदर तिवारी अध्यक्ष पटवारी संघ कोरबा, देवव्रत शर्मा ब्लॉक अध्यक्ष टीचर्स एसोसिएशन कोरबा, एमके मिश्रा सचिव तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ, टी आर कुर्रे उपाध्यक्ष तृतीय कर्मचारी संघ ,एम एल द्विवेदी प्रधान पाठक कोरबा एवं अन्य कर्मचारी साथी गण उपस्थित रहेl

7 मिनट में 100 गालियां’, कांग्रेस विधायक ने SHO को धमकाया, ऑडियो क्लिप वायरल

जयपुर: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के एसएचओ (SHO) संजय कुमार ने एसीजेएम कोर्ट में सत्तारूढ़ पार्टी के एक विधायक (MLA) राजेंद्र सिंह बिधूड़ी के खिलाफ शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि विधायक ने आपराधिक अतिचार के एक मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिये उन पर दबाव बनाया और गालियां दीं. चित्तौड़गढ़ के विधायक राजेंद्र सिंह बिधूड़ी का 7.37 मिनट लंबा एक ऑडियो क्लिप (Audio Clip) वायरल हो रहा है जिसमें वो भैंसरोडगढ़ थाने के एसएचओ संजय कुमार को 100 से ज्यादा बार गालियां देते सुनाई दे रहे हैं.
फोन टैपिंग मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व अन्य को पेश होने का नोटिस

भैंसरोडगढ़ थाने के एसएचओ संजय कुमार और बेगुन, चित्तौड़गढ़ से कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह बिधूड़ी के बीच शुक्रवार को फोन कॉल बात हुई थी. हालांकि इस पूरे मामले पर विधायक ने कहा कि, ‘ऑडियो से छेड़छाड़ की गई है, मैं तो कभी गालियां देता ही नहीं हूं.’ सदन में भी विपक्षी दल बीजेपी ने इसपर हंगामा किया और मामले की जांच की मांग की है. जानकारी के अनुसार शनिवार को जारी एक पुलिस बयान में उल्लेख किया गया है कि एसएचओ संजय कुमार का बयान अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रावतभाटा की अदालत में दर्ज किया गया है और इस केस की अगली सुनवाई 7 मार्च के लिए निर्धारित की गई है.
इससे पहले, एसएचओ ने चित्तौड़गढ़ की पुलिस अधीक्षक प्रीति जैन को विधायक के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी और अनुरोध किया था कि उनका तबादला पुलिस लाइंस में कर दिया जाए.

ब्रेकिंग: रामानुजगंज के 2 दर्जन से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा में शामिल, क्षेत्रीय विधायक बृहस्पत सिंह की कार्यशैली से हैं नाराज

बलरामपुर/रामानुजगंज। रामानुजगंज के कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह की कार्यशैली से नाराज होकर कांग्रेस के करीब 25 ज्यादा कार्यकर्ता आज भाजपा में शामिल हुए।

बता दें कि रविवार को राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम रामचंद्रपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत गाजर पहुंचे थे जहां कार्यकर्ताओं ने बाइक रैली निकालकर सांसद नेताम का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।

इस दौरान करीबन 2 दर्जन से अधिक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी एवं क्षेत्रीय विधायक की कार्यशैली से रुष्ट होकर भाजपा में प्रवेश किया। भाजपा में प्रवेश करने वाले लोगों का सांसद नेताम ने माला पहनाकर सम्मान किया। इस दौरान कई भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामवासी महिला पुरुष उपस्थित रहे।