नई दिल्ली। आपने अब तक चोर, हत्यारे और डाकू को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की खबरें पढ़ीं और सुनीं होगी। लेकिन, अलीगढ़ में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने सड़क हादसे के आरोप में एक भैंस को गिरफ्तार किया है।
अब आप सोच कर परेशान हो रहे होंगे कि भला भैंस कैसे किसी का एक्सीडेंट कर सकती है। लेकिन, यह सच है। दरअसल जब भैंस अपने मालिक के साथ सड़क पर जा रही थी तभी अचानक पीछे से आ रही एक गाड़ी के हॉर्न से वो इस कदर घबरा गई कि पुल से नीचे कूद गई और सीधे पुल के नीचे खड़े ऑटो पर जा गिरी।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक भैंस जिस ऑटो पर गिरी उसमें चार लोग बैठे थे जो घायल हो गए और ऑटो भी पूरी तरह से टूट गया। हादसे के बाद भगदड़ मचने पर मौके पर पहुंची पुलिस को देख भैंस का मालिक तो गायब हो गया लेकिन, पुलिस भैंस को अपने साथ थाने ले गई और वहीं उसे बांध दिया।
हादसे में घायल लोगों को अस्पताल भिजवा दिया गया है। ऎसे में पुलिस के सामने ब़डा सवाल ख़डा हो गया है कि इस एक्सीडेंट में आगे क्या कार्रवाई की जाए। हालांकि अभी तक कोई भैंस लेने नहीं आया। अब जब भैंस का मालिक सामने आएगा तो आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।
नई दिल्ली। कुमार विश्वास द्वारा दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल पर खालिस्तान के संदर्भ में लगाए आरोप पर किसान नेता राकेश टिकैत ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, केजरीवाल आंदोलनकारी तो हैं लेकिन ऐसे लगते नहीं हैं। कुमार विश्वास तो इनकी पार्टी में थे। उन्हें (कुमार विश्वास) को राज्यसभा मिल जाती तो वे यह आरोप नहीं लगाते।
बता दें कि कुमार विश्वास ने एक साक्षात्कार में दिल्ली के सीएम और आप आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को लेकर कहा था कि वे अलगाववादियों के समर्थक हैं। वहीं कवि कुमार विश्वास ने आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनौती देते हुए कहा है कि वह खालिस्तान के खिलाफ बोलकर दिखाएं।
न्यूज डेस्क। पंजाब चुनाव में इस बार चुनाव लड़ने वाले करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या बढ़ गई है। 2017 में जहां, अलग-अलग दलों के 37% प्रत्याशी करोड़पति की सूची में थे, वहीं इस बार 41% हो गए हैं। पंजाब की सियासत में धनबल कितना हावी है, ये आप इन आंकड़ों के जरिए समझ सकते हैं।
किस दल ने दिए कितने टिकट
सबसे ज्यादा शिरोमणि अकाली दल के 93% उम्मीदवार करोड़पति हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के 92% और फिर भाजपा के 85% उम्मीदवार करोड़पति हैं। बहुजन समाज पार्टी इस मामले में चौथे, शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) पांचवे और आम आदमी पार्टी छठवें स्थान पर है। बसपा के 80%, शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के 79% और आम आदमी पार्टी के 69% उम्मीदवार करोड़पति हैं। कांग्रेस से अलग होने के बाद पंजाब लोक कांग्रेस बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी 59% करोड़पति प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारे हैं।
प्रत्याशियों की संपत्ति संख्या
पांच करोड़ से अधिक.226
दो से पांच करोड़ तक.176
50 लाख से दो करोड़ तक.244
10 लाख से 50 लाख तक.287
10 लाख से कम.343
ये हैं पंजाब के टॉप-10 अमीर प्रत्याशी
1. कुलवंत सिंह : साहिबजादा अजीत सिंह नगर के एसएएस नगर सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कुलवंत सिंह पंजाब के सभी 1304 प्रत्याशियों में सबसे अमीर हैं। कुलवंत के पास कुल 238 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
2. सुखबीर सिंह बादल : फाजिल्का के जलालाबाद सीट से शिरोमणि अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल खुद चुनाव लड़ रहे हैं। पंजाब के सबसे अमीर प्रत्याशियों की सूची में बादल दूसरे नंबर पर हैं। इनके पास कुल 202 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
3. करण कौर : श्रीमुक्तसर साहिब के मुक्तसर सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी करण कौर अमीर प्रत्याशियों की सूची में तीसरे नंबर पर हैं। करण के पास 155 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है।
4. राणा गुरजीत सिंह : कपूरथाला सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी राणा गुरजीत सिंह चौथे सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। गुरजीत के पास कुल 125 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है।
5. रणधीर सिंह : लुधियाना नॉर्थ से लोक इंसाफ पार्टी के उम्मीदवार रणधीर सिंह पंजाब के पांचवें सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। रणधीर के पास 111 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है।
6. सुरिंदर सिंह : फाजिल्का के जलालाबाद सीट से पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल को चुनौती दे रहे निर्दलीय प्रत्याशी सुरिंदर सिंह छठवें सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। सुरिंदर के पास कुल 108 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है।
7. अमन अरोरा : संगरुर के सुनमान सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अमन अरोरा भी टॉप-10 अमीर प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं। अमन के पास कुल 95 करोड़ की संपत्ति है।
8. आदेश प्रताप सिंह : तरन तारन के पट्टी सीट से चुनावी मैदान में शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर कूद चुके आदेश प्रताप सिंह आठवें सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। आदेश के पास कुल 83 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
9. रंजीत सिंह गिल : साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ सीट से शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी रंजीत सिंह गिल नौवें सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। रंजीत के पास कुल 84 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है।
10. सरबजीत सिंह मक्कड़ : जालंधर कैंट से प्रत्याशी सरबजीत सिंह पंजाब के टॉप-10 अमीर प्रत्याशियों की सूची में इकलौते भाजपा के उम्मीदवार हैं। सरबजीत के पास कुल 73 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
नई दिल्ली। अंडरवर्ल्ड का भगोड़ा गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम ( Dawood Ibrahim ) भारत को निशाना बनाने की फिराक में है। दरअसल वो एक बार फिर देश में बड़ा हमला कर सकता है। इसक हमले के लिए उसने एक विशेष यूनिट का गठन किया है। ये खुलासा राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने किया है।
दरअसल एनआईए की FIR से पता चला है कि दाऊद इब्राहिम अपनी स्पेशल यूनिट के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा भड़काने के उद्देश्य से विस्फोटक और घातक हथियारों का उपयोग करके देश पर हमला करने की योजना बना रहा। उसकी हिट लिस्ट में देश के कुछ बड़े शहर, नेता और बिजनेसमैन भी हैं।
बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हाल में भारत के मोस्ट वांटेड अंडरवर्ल्ड डॉन और अमरीका से ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किए गए दाऊद इब्राहिम और उसके गैंग मेंबर्स के खिलाफ (FIR) दर्ज की थी। इसी प्राथमिकी पर ईडी ने मनी लांड्रिंग का केस भी दर्ज किया है।
इस तरह तैयार हो रही योजना
NIA ने इस FIR में खुलासा करते हुए कहा है कि दाऊद इब्राहिम ने भारत को दहलाने के लिए स्पेशल यूनिट बनाई है। एफआईआर के मुताबिक दाऊद इब्राहिम की ये स्पेशल यूनिट हथियारों, विस्फोटकों और लीथल वेपंस के जरिए हमले की योजना बना रही है।
निशाने पर ये बड़े शहर
दाऊद की स्पेशल यूनिट के निशाने पर दिल्ली और मुंबई समेत कई बड़े शहर हैं। इसके अलावा ऐसी वारदातों को अंजाम देने की योजना है जिस से भारत के अलग अलग राज्यों में दंगे भड़कें।
बता दें कि कुछ महीनों पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने सेंट्रल एजेंसियों के साथ मिलकर दो पाकिस्तान ट्रेंड समेत कई लोगों को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया था।
इन पकड़ाए लोगों ने ISI और अंडरवर्ल्ड के नए टेरर मॉड्यूल का खुलासा किया था। पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने खुलासा किया था कि गिरफ्तार आरोपियों को दाउद इब्राहिम का भाई अनीस इब्राहिम धन उपलब्ध करवा रहा है। ये धनराशि हवाला के जरिए भिजवाई जा रही है। इसके साथ ही बम धमाके के लिए IED भी मुहैया करवाया था।
कोरबा। शहर में अचानक पुराने विवाद को लेकर दो पक्षों का झगड़ा बलवा में बदल गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आनन फानन में सख्ती से कार्यवाही करते हुए समय रहते हालात को काबू में कर लिया। जीहां ये हकीकत नहीं दरअसल कोरबा पुलिस ने बलवा ड्रिल का अभ्यास में इसका प्रदर्शन किया।
शनिवार को पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देश पर पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में बलवा ड्रिल परेड का रिहर्सल किया गया। इस अवसर पर जिले के पुलिस कप्तान स्वयं उपस्थित रहे। बलवा ड्रिल का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर बलवा ड्रिल के महत्व को समझाते हुए पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने बताया कि समाज मे शांति व्यवस्था बनाए रखने एवम कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए कई बार पुलिस को बल का प्रयोग करना आवश्यक हो जाता है। बल प्रयोग कब और किस सीमा तक किया जाना चाहिए ,यह घटना की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
पुलिस बल को समझाइश देते हुए एसपी ने बताया कि मानवाधिकारों की रक्षा करते हुए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग कब और किन परिस्थितियों एवं किस सीमा तक किया जाना चाहिए , इसकी जानकारी सभी पुलिस अधिकारियों एवं कार्यपालक दंडाधिकारियों को स्पष्ट होना चाहिए। ताकि मानव अधिकारों की रक्षा करते हुए कम से कम बल प्रयोग कर कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटा जा सके।
पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में बलवा परेड का नेतृत्व अभिषेक वर्मा के द्वारा किया गया, कार्यपालिक दंडाधिकारी दंडाधिकारी के रूप में अतिरिक्त कलेक्टर सुनील नायक,एसडीएम हरि शंकर पैकरा, तहसीलदार पंचराम सलामे सहित अन्य कार्यपालिक दंडाधिकारी उपस्थित रहे।
रक्षित निरीक्षक अनथ राम पैकरा द्वारा कानून व्यवस्था में लगे बल के कमांडर की भूमिका निभाई गई। दंगा फसाद कर रहे बलवाइयों को पहले चेतावनी देकर बिखर जाने का आदेश दिया गया ,इसके पश्चात वाटर केनन का इस्तेमाल, अश्रु गैस का प्रयोग, बेंत एवम लाठी का प्रयोग कर दंगा समाप्त करने का प्रयास किया गया। सभी प्रयास असफल हो जाने पर अंत में गोली चालन का प्रदर्शन किया गया। दंगा समाप्त होने के पश्चात घायलों को अस्पताल पहुंचाने, उनका उपचार कराने एवं संपूर्ण घटनाक्रम का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ट्रैफिक डीएसपी शिवचरण परिहार, रक्षित निरीक्षक अनथराम पैकरा, सूबेदार भुनेश्वर कश्यप सहित जिले के सभी थाना चौकी प्रभारी उपस्थित रहे।
Girl on Bullet Bike Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक लड़की रात के अंधेरे में अकेले बुलेट बाइक चलाती दिखाई दे रही है. इस दौरान लड़की बिना हेलमेट और एक हाथ छोड़कर बुलेट बाइक चला रही है. जिसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हैं. कई लोग लड़की को दबंग बता रहे हैं तो कई लोग बुलेट बाइक चलाने को लेकर लड़की की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
रात के अंधेरे में अकेले बुलेट लेकर निकली लड़की
बुलेट बाइक को लेकर युवाओं में अलग ही क्रेज देखने को मिलता है. कई लोग बुलेट चलाते हुए अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं. इसमें लड़कियां भी पीछे नहीं हैं. आपने भी लड़कियों को बाइक चलाते हुए इंस्टाग्राम रील्स वीडियो देखा होगा. इन वीडियो को व्यूज भी काफी मिलते हैं. ऐसे वीडियो को इंटरनेट यूजर्स काफी पसंद करते हैं और वीडियो झट से वायरल हो जाती है.
हालांकि इस वीडियो में लड़की का ऐसे बिना हेलमेट और एक हाथ छोड़कर बुलेट चलाते हुए देखकर कुछ यूजर्स भड़क गए हैं. वीडियो में लड़की की कुछ बातें सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद नहीं आ रही हैं. इंटरनेट यूजर्स इस लड़की को कमेंट के माध्यम से तरह-तरह की नसीहतें दे रहे हैं. कुछ लोग कह रहे हैं कि एक हाथ छोड़कर गाड़ी चलाना सही नहीं है, वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि बिना हेलमेट गाड़ी चलाने के लिए लड़की पर जुर्माना लगाना चाहिए. देखें वीडियो-
वीडियो देखकर भड़के लोग
वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक लड़की जींस और जैकेट पहनकर अंधेरी रात में अकेले बुलेट लेकर निकलती है. वह बुलेट को फुल स्वैग के साथ चलाती दिखाई देती है. वीडियो में आप देख सकते हैं कि बिना हेलमेट बुलेट चलाते उसके बाल लहरा रहे हैं. वहीं वह एक हाथ से ही बुलेट बाइक को कंट्रोल करती दिखाई दे रही है. इस दौरान लड़की स्माइल करती भी नजर आ रही है. वीडियो में बाइक की स्पीड भी अच्छी-खासी नजर आ रही है. वीडियो में देख सकते हैं कि लड़की हंसते हुए फुट गार्ड पर पैर रखे हुए है, जिससे गाड़ी का बैलेंस बिगड़ सकता था.
नई दिल्ली। वेबसीरीज या मूवी का टाइटिल ‘बेस्टसेलर’ लिखना आसान है, लेकिन क्या उसे बेस्ट सेलर बनाना भी इतना आसान है. सीरीज के पहले सीन से ही पता चल जाता है कि किसी दूसरे की किताब पर आधारित ये सीरीज बनाने वाले स्क्रीन प्ले राइटर्स ने अपनी रिसर्च ढंग से नहीं की है. जिस लोकोक्ति ‘रांड सांड सीढ़ी संन्यासी, इनसे बचो तो पावो काशी’ को इस मूवी का आधार बनाया गया है, उसे कबीर का दोहा बता दिया गया है. जबकि बनारस में ऐसा कोई नहीं मानता. इसका अर्थ भी गलत ढंग से बताया गया है, ऐसा लगता है कि इन सबसे बचना है, जबकि यही काशी की पहचान हैं, कइयों ने इन्हें काशी का दायित्व बताया है. ये अलग बात है कि इस वेबसीरीज में गालियों से बचने के लिए मेकर्स ने ‘काशी’ को ‘राजसी’ कर दिया है.
इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि इस वेबसीरीज को बनाने के लिए रिसर्च का क्या स्तर रहा होगा. उसमें जाने से पहले जान लेते हैं कि इस वेबसीरीज की कहानी क्या है? कहानी है एक ऐसे लेखक ताहिर वजीर (अर्जन बाजवा) की, जिसकी पहली किताब बुरी तरह फ्लॉप होती है और दूसरी किताब ‘रांड सांड सीढ़ी संन्यासी’ इतनी ज्यादा सुपरहिट होती है कि वो 10 साल तक उसकी कमाई खाता है और फिर कोई किताब नहीं लिख पाता. फिर उसकी कहानी में आती है मीतू माथुर (श्रुति हसन), जो उसकी जबरा फैन है और चाहती है कि उसकी जिंदगी की कहानी पर ताहिर अपनी अगली किताब लिखे.
नहीं है कोई सस्पेंस
दूसरी समानांतर कहानी चल रही है ताहिर की पत्नी मयंका (गौहर खान) की जिंदगी में जो एडमेकर है, उसकी जिंदगी में एक युवा असिस्टेंट पार्थ (सत्यजीत दुबे) जो धीरे-धीरे उसके इतना करीब आता है कि उसके साथ हमबिस्तर तक हो जाता है. इस वेबसीरीज के साथ सबसे बुरी और सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें सस्पेंस नाम की कोई चीज ही नहीं है, सबको पता है कौन कर रहा है और क्यों कर रहा है, उसका अंदाजा भी लोग जल्द ही लगा लेते हैं. आप चाहें तो आखिर के 2 एपिसोड ना भी देंखें तो काम चल जाता है. ये भी तय मानिए कि हिंदी के लेखकों को करोड़ों का साइनिंग एमाउंट मिलना, और जिस तरह से लेखक का अंदाज दिखाया गया है, वो भी कहीं से वास्तविकता के आसपास भी नहीं फटकता.
कई चीजें लगेंगी बेमतलब की
पार्थ ताहिर का कम्यूटर हैक कर लेता है और उसके कैमरे के जरिए उसकी सारी बातें देख सुन रहा होता है. इसकी भी कोई तुक नहीं लगती कि इसका फायदा ऐसा क्या होता है और वो जो करना चाहता है, उसमें उसका क्या फायदा आखिर में होता है. लेकिन शुरूआती सस्पेंस बनाए रखने में ये एंगल अच्छा लगता है. कुछ जानकारियां मिल जाती हैं. ये भी समझ नहीं आता कि ताहिर को ट्विटर पर धमकाकर वो क्या करना चाहता है? क्योंकि ताहिर उसे ब्लॉक कर देता और सब दिक्कत खत्म हो जाती. इधर मीतू माथुर भी ताहिर के साथ हमबिस्तर होती है, लेकिन अंत तक जस्टीफाई नहीं होता कि इसकी उसे क्या जरूरत थी. अगर पार्थ अपने मिशन पर था, और मीतू अपने मिशन पर तो उन्हें इतना लम्बा रूट लेने की जरूरत क्या थी?
कई चीजों को किया गया इग्नोर
अगर जैसा कि क्लाइमेक्स है, ताहिर को किसी की हत्या की साजिश में फंसाना था, तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ पता चल जाना था कि हत्या कई दिन पहले हुई है. डायरेक्टर ने इसके लिए बुरी तरह जली हुई लाश को बहाना बनाया है. फिर डीएनए ताहिर के कपड़ों पर कैसे आ सकता है, उसका तो लाश से कोई कांटेक्ट हुआ नहीं? ऐसा लगता था कि ताहिर जैसा बड़ा लेखक कोई बड़ा वकील भी नियुक्त नहीं कर सकता था, जो एक सरकारी वकील से भिड़ सके. तेजतर्रार अधिकारी मिथुन चक्रवर्ती भी इतने बड़े ढक्कन थे, कि आसपास के सीसीटीवी चैक करने की भी जहमत नहीं उठाई, ना आरोपी का मेडिकल करवाते वक्त उसकी गर्दन का निशान देखा और ना ये जाना कि आरोपी जलाने के बाद खुद ही बेहोश क्यों हो गया था?
सवाल कई हैं लेकिन जवाब नहीं
सवाल कई हैं कि पुलिस ताहिर के लैपटॉप की क्लोनिंग समझने के बावजूद क्लोन करने वाले को क्यों नहीं पकड़ पाई थी? उसने जांच क्यों रोक दी? पुलिस संजय की हत्या के सीसीटीवी के हैंग हो जाने के बाद फुटेज को फिर से रिकवर करने में क्यों नहीं जुटी? ताहिर एक किताब लिखने के बाद क्यों दूसरी किताब नहीं लिख पा रहा था? अगली किताब का विषय फायनल करने से पहले ही 1 करोड़ का साइनिंग एमाउंट उसने क्यों लिया? शालू ताहिर से मीतू को 2 मिनट में मिलवा सकती थी और अगर वो ऐसा नहीं करना चाहती थी, तो उसके पीजी में ही जाके रहने की क्या जरुरत थी? गौहर को पता था कि पार्थ आईटी एक्सपर्ट है, फिर उसपर शक क्यों नहीं किया? लाश को काशी से मुंबई लाना और फिर इतने दिनों तक संभालकर रखना, वो भी बिना बदबू के कैसे मुमकिन हुआ? वो भी तब जब मीतू को घर के किराए के लिए कानों के झुमके बेचने पड़ते हैं? कई मामलों में दर्शकों को संतुष्ट करने के लिए, उनके मन में ज्यादा सवाल ना उठें, उसके लिए स्क्रीन प्ले राइटर्स को काफी मेहनत करनी होती है, और यहां तो सवाल ही सवाल उठ रहे थे.
किरदारों को रचने में कई झोल
कहानी को इन्वेस्टीगेशन के नजरिए से जब आप सोचते हो, तो बारीक से बारीक बातों पर ध्यान नहीं देते हो, खासतौर पर विलेन के किरदार को रचते वक्त. सोचिए जो लड़की अपना नाम बदलकर शहर में है, लेकिन अपने पुराने नाम का डेबिट कार्ड इस्तेमाल कर रही है, उसको मुंबई में कहीं नौकरी कैसे मिली होगी? पीजी में उसे कैसे रखा होगा? उसकी सेलरी कौन से एकाउंट में आती होगी? फर्जी आईकार्ड तो ना उसने ही बनाए और ना ही पार्थ ने फिर दोनों ने ही नौकरी में अपने कौन से कागज दिए और इससे पहले कहां काम करने का तजुर्बा दिखाया? सो काफी झोल है, किरदारों को रचने में भी.
एक्टिंग ने बचा लिया
उस पर बार-बार मीतू को अपनी किताब लिखते दिखाना, हर एपिसोड के अंत में पार्थ का ये बोलना कि चैप्टर वन, चैप्टर टू… ताहिर को जरूरत से ज्यादा गधा दिखाना, मानो वो एक लाइन भी किसी से सुने बिना नहीं लिख सकता था. ऐसे में जाहिर है कि अच्छी खासी वेबसीरीज का कचरा तो होना ही था. वो भी तब जब रवीन्द्र सुब्रमण्यिन के उपन्यास ‘द बेस्टसेलर शी रोट’ पर आधारित थी ये वेबसीरीज यानी मूल कहानी तो पहले से ही तोहफे में उसी तरह मिली थी, जैसे सीरीज में ताहिर को. हालांकि श्रुति हसन और सत्यजीत दुबे की एक्टिंग ने काफी कुछ बचाए भी रखा इस सीरीज को, क्योंकि गौहर खान तो फिर एक ग्लेमर डॉल ही बनकर रह गईं. मेकर्स को समझना चाहिए, ‘रांड, सांड, सीढी, संन्यासी’ काशी के दायित्व हैं, किसी वेबसीरीज को सुपरहिट बनाने के महज फॉर्मूले नहीं.
कोरबा। सड़क निर्माण के लिए चल रहे आंदोलन 36 घन्टा बाद समाप्त हो गया है।प्रदर्शनकारियों को तहसीलदार ने जूस पिलाकर सड़क निर्माण कराने की आश्वाशन के बाद हड़ताल को समाप्त किया है।
बता दें कि जर्जर सड़क निर्माण के लिए चल रहे सर्वदलीय आंदोलन को आज नायब तहसीलदार सोनू अग्रवाल और बांकी मोंगरा टीआई राजेश जांगड़े ने सुलह कराकर समाप्त कराया है।शुक्रवार की सुबह से चल रहे जैलगांव चौक में चल रहे आंदोलन को आम आदमी पार्टी और भाजपा ने साथ देकर जान फूंक दिया था।यही वजह है कि प्रदर्शनकारियों को प्रशासनिक टीम लगातार गुमराह करने में रही, पर आंदोलनकारी सड़क निर्माण की मांग पर डटे रहे। आखिरकार शुक्रवार से चल रहे आंदोलन में बढ़ रही भीड़ को देखते हुए प्रशसान ने सड़क निर्माण की सहमति देते हुए अंशनन समाप्त कराया है।आपको यह बताना लाजमी होगा क सड़क पर चल रहे सर्वदलीय अनशन पर प्रशसन दबाव में आया और सड़क मरम्मत तत्काल शुरू करा कर मामला शांत करने का प्रयास किया। आंदोलन के बाद शुरू हुए सड़क मरम्मत के बाद कांग्रेसी नेता आंदोलन को खत्म करने का मूड बना लिए और आंदोलन को स्थगित करने का प्रयास किया, लेकिन दूसरे गुट के नेताओ ने सड़क निर्माण शुरू होते तक आंदोलन में बैठने की बात कही। बात बिगड़ता देख सत्ता पक्ष ने आंदोलन से हाथ खींच लिया। कमजोर पड़ रहे आंदोलन को साथ खड़ा होकर आम आदमी पार्टी ने आंदोलन को और तेज कर दिया है। अब जाकर आया ऊंट पहाड़ के नीचे की तर्ज पर प्रशासन की टीम ने अनोदलंकारियो की बातों को तव्वजो देते हुए हड़ताल समाप्त कराया है।
वॉशिंगटन। दुनिया के दूसरे नंबर के रईस व अमेरिकी कंपनी टेस्ला के मालिक एलन मस्क को भी क्या कोई प्रताड़ित कर सकता है? बकौल मस्क हां, ऐसा हो रहा है। उन्होंने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) पर आरोप लगाया कि उन्हें अंतहीन और अविश्वसनीय जांच के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
एसईसी द्वारा लंबे समय से की जा रही जांच को मस्क ने अपनी अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार पर अंकुश जैसा बताया है। मस्क व टेस्ला के वकील एलेक्स स्पिरो ने यह आरोप लगाते हुए मैनहट्टन के जिला जज को पत्र लिखा है। स्पिरो ने 2018 में टेस्ला की एक डील को लेकर एसईसी से समझौते में मस्क की कंपनी का नेतृत्व किया था। यह विवाद मूल रूप से एलन मस्क के एक ट्वीट से पैदा हुआ था। यह ट्वीट टेस्ला द्वारा अहम खरीदी से जुड़ा था।
अमेरिकी सरकार के आलोचक हैं मस्क
स्पिरो ने पत्र में आरोप लगाया कि अमेरिकी एजेंसियां लगातार जांच करते हुए जानबूझकर मस्क को निशाना बना रही हैं, क्योंकि वह मुखर व सरकार के आलोचक हैं। वकील ने यह भी कहा कि एसईएस के प्रयास मस्क की आवाज दबाने के लिए किए जा रहे हैं।
वकील का यह पत्र टेस्ला द्वारा किए गए इस खुलासे के कुछ हफ्तों बाद सामने आया है कि कि एसईसी ने नवंबर 2021 में उसे एक आदेश जारी किया था। यह आदेश 2018 के करार को लागू करने के बारे में था।
दरअसल मस्क ने 2018 में ट्वीट किया था कि वह टेस्ला के शेयर 420 डॉलर प्रति शेयर के मान से वापस खरीद सकते हैं और इस लेनदेन के लिए पैसा सुरक्षित रख लिया गया है, लेकिन हकीकत इससे उलट थी। खरीदी जल्द नहीं होने वाली थी। इस पर एसईसी ने आरोप लगाया था कि मस्क जानते थे कि यह बड़ा लेनदेन अनिश्चित है और यह कई जोखिम से जुड़ा है।
नई दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) के भैया विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष के साथ अब पार्टी के अंदर भी सवाल उठने लगे हैं। पंजाब चुनाव प्रचार के आखिरी दिन पार्टी सांसद मनीष तिवारी ने इस विवाद को हवा देते हुए कहा कि पंजाब में इस तरह की सोच की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस बीच, पार्टी चन्नी के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार करने से पहले स्थिति का आकलन कर रही है।
अमेरिका के अश्वेत मुद्दे से तुलना
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भैया विवाद की तुलना अमेरिका के अश्वेत मुद्दे से की है। उन्होंने एक साथ कई ट्वीट कर कहा कि यह हरित क्रांति की शुरुआत में पंजाब आने वाले प्रवासियों के खिलाफ एक दुर्भाग्यपूर्ण और संस्थागत सामाजिक पूर्वाग्रह को दर्शाता है। अपने परिवार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी मां जाट सिख होने और मेरे पिता पंजाब की सियासत के प्रमुख नेता होने के बावजूद पंजाबी-पंजाबियत, हिंदू-सिख एकता के लिए अपना जीवन लगा दिया।
तिवारी ने कहा कि नाम के कारण उनके पीठ पीछे कहा जाता है कि ‘एह भैया किठो आगा’। बकौल उनके, यह पंजाबी के सबसे अच्छे अपशब्दों में शुमार है। हमें इसे जड़ से खत्म करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे विचारों का पंजाब के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इस बीच, पार्टी ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार के कार्यक्रम को अंतिम रुप नहीं दिया है।
यूपी से रखा जा सकता है दूर
प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री चन्नी अपने बयान पर सफाई दे चुके हैं। पर उनके यूपी प्रचार में उतरने से यह मुद्दा बन सकता है। इसलिए, पार्टी को उन्हें चुनाव प्रचार में उतारने से पहले विवाद थमने का इंतजार करना चाहिए। दरअसल, पंजाब में 20 फरवरी को मतदान है। इसके बाद पार्टी चन्नी को चुनाव प्रचार में उतारने की तैयारी कर रही थी। पर अब पार्टी स्थिति का आंकलन कर रही है।
पहले सरकार बनाने लायक बहुमत तो लाएं : दिग्विजय सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सिंह ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर परोक्ष रूप से हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की आदिवासी या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से मुख्यमंत्री से पहले राज्य में सरकार बनाने लायक बहुमत लाने की प्राथमिकता है।
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भैया वाले बयान को लेकर उन्होंने कहा कि उसे गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि चन्नी के मुताबिक बाहर के नेता यहां आकर नेतागिरी न करें, पंजाब दरअसल पंजाबियत और पंजाबियों का है।