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ट्रैफिक चालान से बचने के लिए लड़की ने लगाया गजब का दिमाग, पुलिस के सामने यूं खुला भेद

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow News) में ठाकुरगंज पुलिस ने धोखाधड़ी के एक अजीबोगरीब मामले का खुलासा किया है. यहां चालान से बचने के लिए एक युवती ने अपनी स्कूटी पर दूसरी युवती की स्कूटी का नंबर लगा लिया. इस मामले का खुलासा हुआ तब हुआ जब असल नंबर वाली युवती के पास अक्सर चालान आने लगे. ठाकुरगंज पुलिस ने इस मामले में सफिया उर्फ अलीशा नाम की युवती को धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं में गिरफ्तार किया है.

डीसीपी पश्चिम सोमेन बर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया कि चालान से बचने के लिए आरोपी युवती अपनी स्कूटी पर पीड़ित युवती की नंबर प्लेट लगाकर चलती थी. थाना ठाकुरगंज के बालागंज इलाके के रहने वाले रविंद्र कुमार ने जून 2020 में लखनऊ ट्रैफिक पुलिस में शिकायत की थी कि उनकी बेटी की स्कूटी जुपिटर घर में खड़ी है, लेकिन उसके ऑनलाइन चालान आ रहे हैं.
हद तो तब हो गई जब इन चालानों की रक़म एक लाख रुपये तक पहुंच गई. रविंद्र की शिकायत पर ट्रैफिक पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज निकाला तो पूरे मामले का खुलासा हुआ. सीसीटीवी फुटेज से साफ हो गया कि पीड़िता की स्कूटी का नंबर आरोपी युवती ने अपनी स्कूटी पर लगा रखा था.

इस मामले में पीड़िता की शिकायत पर ठाकुरगंज पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी युवती के आने-जाने का रास्ता पुलिस को मिल गया, जिसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर सफिया उर्फ अलीशा को स्कूटी समेत गिरफ्तार कर लिया.

जीवन दीप समिति के कर्मियों का बढ़ेगा मानदेय…कलेक्टर की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई जेडीएस की बैठक में लिया गया निर्णय…

कोरबा ।जिला अस्पताल में जीवन दीप समिति के माध्यम से काम कर रहे लगभग 74 कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा। इसके साथ ही नवोदय विद्यालय, एकलव्य विद्यालय जैसे आवासीय शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले स्कूली छात्र-छात्राओं के मेडिकल सर्टिफिकेट निःशुल्क बनेंगे। ऐसे विद्यार्थियों को अब मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए जिला मेडिकल बोर्ड को कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। कलेक्टर श्रीमती रानू साहू की अध्यक्षता में आज हुई जीवन दीप समिति की बैठक में यह निर्णय लिये गये हैं। वीडियो कांफें्रसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में अपर कलेक्टर सुनील नायक, जिला पंचायत के सीईओ नूतन कवंर, समिति के सचिव और जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. के.एल.धु्रव, सीएमएचओ डॉ. बी.बी.बोडे, नगर निगम आयुक्त प्रभाकर पाण्डेय, सदस्य डॉ. देवेन्द्र गुर्जर एवं अन्य अधिकारी भी शामिल हुए।
बैठक में जीवनदीप समिति के माध्यम से नियोजित अंशकालीन कर्मचारियों की मानदेय वृद्धि पर गहन चर्चा हुई। समिति के सचिव डॉ. के.एल.धु्रव ने बताया कि मरीजों के पंजीयन और अन्य शुल्कों से समिति को प्रतिमाह लगभग साढ़े आठ लाख रूपये की आय होती है। इस आय के मुकाबले प्रतिमाह का व्यय लगभग 13 लाख रूपये का है। कलेक्टर श्रीमती साहू ने आय-व्यय को ध्यान में रखते हुए जीवनदीप समिति के कर्मियों की कार्य अवधि के आधार पर मानदेय वृद्धि का सुझाव दिया। बैठक में सर्व सम्मति से तय किया गया कि 10 वर्ष से अधिक की सेवा अवधि वाले जेडीएम कर्मियों का मानदेेेय एक मुश्त प्रतिमाह एक हजार रूपये बढ़ाया जायेगा। दस वर्ष से कम सेवा अवधि वाले कर्मियों का मानदेय पांच सौ रूपये प्रतिमाह बढ़ाया जायेगा। समिति के इस निर्णय से जिला अस्पताल में काम कर रहे लगभग 74 कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। बैठक में कोविड कॉल के दौरान ईएसआईसी अस्पताल, आईसीयू और कोविड सेम्पलिंग के लिए नियोजित किए गये अंशकालीन स्वास्थ्य कर्मियों को भी मानदेय देने पर सहमति बनी। जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा और आकस्मिक ईलाज के समय उपयोग के लिए खरीदे गये पावर जनरेटर के बिल भुगतान को भी बैठक में मंजूरी मिली।
बैठक में नवोदय विद्यालय, एकलव्य आवासीय विद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों में प्रवेश करने वाले जिले के मेधावी विद्यार्थियों को मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए शुल्क छूट पर भी निर्णय लिया गया। ऐसे विद्यार्थियों को यह छूट मेडिकल बोर्ड से सर्टिफिकेट बनवाने पर ही मिलेगी। पहले ऐसे विद्यार्थियों को फिटनेश सर्टिफिकेट बनाने के लिए मेडिकल बोर्ड में 520 रूपये शुल्क पटाना पड़ता था। बैठक में निर्णय के बाद अब इन विद्यार्थियों को यह शुल्क नहीं पटाना पड़ेगा।

ब्रेकिंग: छत्तीसगढ़ के इस जिले में एक और हाथी की मौत, मौके पर पहुंचे अफसर

रायपुर/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में सूरजपुर में करंट की चपेट में आने से एक और हाथी की मौत हो गई। सूचना पर अफसरों की टीम मौके पर पहुंची है।

हाथी की मौत प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के दरहोरा गांव में हुई है। हादसे के तुंरत बाद गांव के लोगों ने इस बात की सूचना वन विभाग की टीम को दी। सूचना के बाद मौके पर डीएफओ समेत वन अमला मामले की जांच कर रहा है।

रायपुर/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में सूरजपुर में करंट की चपेट में आने से एक और हाथी की मौत हो गई। सूचना पर अफसरों की टीम मौके पर पहुंची है।

हाथी की मौत प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के दरहोरा गांव में हुई है। हादसे के तुंरत बाद गांव के लोगों ने इस बात की सूचना वन विभाग की टीम को दी। सूचना के बाद मौके पर डीएफओ समेत वन अमला मामले की जांच कर रहा है।

कौन हैं अमित पालेकर?: मां सरपंच थीं, खुद नामी वकील, भूख हड़ताल से गोवा सरकार को हिला चुके हैं, जानिए सबकुछ

न्यूज डेस्क।आम आदमी पार्टी ने अमित पालेकर को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके गोवा में बड़ा दांव खेला है। अमित भंडारी समाज से आते हैं। गोवा में भंडारी समाज की 35% आबादी है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बार-बार भंडारी समाज का जिक्र किया। बोले, ‘गोवा में एक बहुत बड़ा समाज का हिस्सा है भंडारी समाज। 30-35 से लेकर 40 प्रतिशत लोग हैं। 1961 में गोवा आजाद हुआ था। तब से लेकर आज तक साठ साल में इस समाज से एक आदमी ढाई साल के लिए सीएम बना था। हमने कहा कि हम भंडारी समाज से सीएम चेहरा देंगे।’

केजरीवाल ने आगे कहा, ‘कुछ पार्टियों ने हम पर आरोप लगाया कि हम जाति की राजनीति कर रहे हैं। भंडारी समाज के किसी चेहरे को उन पार्टियों ने सीएम नहीं बनाया। इस समाज के लोगों ने खून-पसीने से गोवा की तरक्की में योगदान दिया। अभी तक गोवा में एक बहुत बड़ा समाज का हिस्सा है, भंडारी समाज, उनके मन में इंजस्टिस की फिलिंग है।’

कौन हैं अमित पालेकर?
अमित पालेकर गोवा में काफी प्रसिद्ध हैं। पेशे से वकील हैं लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी उनकी काफी पहचान है। वह हमेशा से भ्रष्टाचार का मसला उठाते रहे हैं। पालेकर लंबे समय से गोवा के सांता क्रूज इलाके में सक्रिय हैं। यूं तो 2017 से ही वह आम आदमी पार्टी से जुड़े, लेकिन उनके लिए राजनीति नई नहीं हैं। उनकी मां दस साल तक सरपंच रह चुकी हैं।

अमित पालेकर ने कोरोनाकाल में लोगों की खूब मदद की। जब पूरे देश के अस्पतालों में बेड का संकट था, तब पालेकर ने अपने पास से एक स्थानीय अस्पताल को 135 बेड दान किए थे। मरीजों को इलाज दिलाने के अलावा, लॉकडाउन में सफर कर रहे परिवारों की मदद भी की थी।

भूख हड़ताल से सरकार को हिला दिया
पिछले दिनों गोवा में अमित पालेकर खूब चर्चा में रहे। उन्होंने ओल्ड गोवा हैरिटेज परिसर में अवैध तरीके से बनाए जा रहे एक बंग्ले के खिलाफ भूख हड़ताल की थी। उनके इस कदम से गोवा की सरकार भी सकते में आ गई। सरकार को उनके आगे झुकना पड़ा और विवादित ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी। अमित के भूख हड़ताल के दौरान अरविंद केजरीवाल उनसे मिलने पहुंचे थे।

अगर ATM से मिले कटे फटे नोट तो बैंक होगा जिम्मेदार, बदलने से इनकार पर इतना जुर्माना

अक्सर ATM से कटे-फटे या फिर गंदे नोट निकल आते हैं. ऐसे नोट हाथ में आते ही लोग परेशान हो जाते हैं. वे सोच में पड़ जाते हैं कि अब इस नोट का क्या करें? क्योंकि खुले बाजार में तो इसे कोई लेगा नहीं. कटे-फटे नोट ATM से निकलने के बाद बिल्कुल घबराने की जरूरत नहीं है. आप आसानी से ऐसे नोट को बदल सकते हैं.
एटीएम से निकले फटे नोट (Damage Note) को आप उस बैंक में ले जाइए, जिस बैंक से वो ATM लिंक्ड है. किस बॉन्च से ATM लिंक है, इसकी जानकारी आपको ATM पर तैनात गार्ड से या फिर ATM के अंदर ही ब्रांच का नाम और नंबर लिखा मिल जाएगा.

तुरंत बदला जाएगा नोट

ATM लिंक्ड ब्रॉन्च में जाकर आपको एक अप्लीकेशन लिखनी होगी. जिसमें आपको पैसे निकालने की तारीख, समय, जिस जगह से निकाला है उसका नाम मेंशन करना होगा. अप्लीकेशन के साथ एटीएम से निकली उस स्लिप की कॉपी भी लगानी होती है. अगर स्लिप नहीं निकली हो तो फिर मोबाइल पर आए ट्रांजेक्शन डिटेल की जानकारी देनी होगी. आप जैसे ही बैंक को सारा ब्यौरा देंगे, तुरंत बदले में नए नोट मिल जाएंगे.

RBI का नियम साफ कहता है कि अगर ATM से कटे-फटे निकलते हैं तो बैंक बदलने से इनकार नहीं कर सकता. अगर बैंक मना करता है कि फिर उसके खिलाफ जुर्माने का भी प्रावधान है. जुलाई 2016 में RBI ने एक सर्कुलर में कहा था कि अगर बैंक खराब नोट बदलने से इनकार करते हैं, तो उन पर 10000 रुपये का जुर्माना लगेगा और ये सभी बैंकों की सभी ब्रांचों पर लागू होता है.

कटे-फटे नोट के लिए बैंक जिम्मेदार

RBI के मुताबिक ATM से खराब या नकली नोट निकलने की जिम्मेदारी सिर्फ बैंक की होती है. उस एजेंसी की भी नहीं, जिसने नोट ATM में डाले होते हैं. नोट में कोई खराबी है, तो ये बैंक कर्मचारी द्वारा चेक की जानी चाहिए. अगर नोट पर सीरियल नंबर, गांधीजी का वॉटरमार्क और गवर्नर की शपथ दिख रही है, तो बैंक को नोट बदलना ही होगा.

हालांकि कुछ स्थितियों में नोटों को बदला नहीं जा सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, बुरी तरह जले हुए, टुकड़े-टुकड़े होने की स्थिति में नोटों को नहीं बदला जा सकता. इस तरह के नोटों को आरबीआई के इश्यू ऑफिस में ही जमा कराया जा सकता है.

सन्नी देओल की फिल्म ‘इंडियन’ देख कांस्टेबल हुआ इतना प्रभावित, दिन-रात मेहनत कर बन गया IPS अधिकारी

Success Story: आज हम आपको एक ऐसे IPS अधिकारी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने सनी देओल की फिल्म ‘इंडियन’ देखकर अपनी जिंदगी बदल डाली. जहां कुछ लोग फिल्मों से बुरी आदतें सीख लेते हैं, वहीं इन्हें फिल्म में सनी देओल का पुलिस अधिकारी वाले किरदार से प्रेरणा मिली. इसके बाद इन्होंने दिन रात मेहनत कर पुलिस अधिकारी की वर्दी जीत ली.

‘इंडियन’ फिल्म देखकर शख्स को IPS अधिकारी बनने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि बीच में मिली तीन सरकारी नौकरियों को भी इन्होंने छोड़ दिया और तब तक चैन की सांस नहीं ली, जब तक अपना लक्ष्य पा नहीं लिया. हम जिस IPS अधिकारी के जज्बे की कहानी आपको बता रहे हैं उनका नाम मनोज रावत है. वह राजस्थान के जयपुर के एक गांव श्यामपुरा के रहने वाले हैं.

19 साल की उम्र में मिली थी पुलिस की नौकरी
इस समय मनोज रावत IPS अधिकारी के पद पर तैनात हैं. मनोज रावत एक सामान्य परिवार में जन्मे थे. बचपन से ही उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था. उन्हें सबसे ज्यादा पुलिस अधिकारी की फिल्में अपनी ओर आकर्षित करती थीं. हालांकि पढ़ाई के बाद उन्होंने अपना और अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए कॉन्सटेबल की नौकरी कर ली. मात्र 19 साल की उम्र में वह राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए.

इसके बाद भी मनोज रावत ने अपनी पढ़ाई बंद नहीं की और उन्होंने पॉलिटिकल साइंस से एमए किया. जैसे ही उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. वैसे ही पुलिस कांस्टेबल की नौकरी छोड़ उन्होंने कोर्ट में क्लर्क की नौकरी शुरू की. इसके बाद वह सिविल सर्विस की तैयारी के लिए उन्होंने क्लर्क की नौकरी भी छोड़ दी. सिविल सर्विस की तैयारी करते समय मनोज को CISF की नौकरी भी मिली, लेकिन उन्होंने यह नौकरी करने से भी इनकार कर दिया. क्योंकि मनोज रावत बस अब अपने लक्ष्य की ओर ही देख रहे थे.
पुलिस की नौकरी के दौरान देखी ‘इंडियन’ फिल्म
मनोज रावत बताते है कि जब वह कांस्टेबल की नौकरी कर रहे थे तो उन्होंने सनी देओल की फिल्म ‘इंडियन’ देखी थी. इसके बाद से ही उन्होंने ठान लिया था कि वह IPS अधिकारी बनकर रहेंगे. फिर वह अपने निश्चय पर डट गए और पूरे आत्मविश्वास के साथ मेहनत शुरू कर दिया. आखिरकार साल 2017 में मनोज रावत ने UPSC का एग्जाम क्लियर किया और देशभर में 824वां रैंक प्राप्त किया. उन्होंने 35 मिनट लंबा इंटरव्यू देकर IPS अधिकारी का पद अपने नाम कर लिया.

KORBA: कोरोना से दो लोगों की मौत… मौत का आंकड़ा पहुंचा…

कोरबा। उर्जाधानी में एक बार फिर कोरोना मरीजो की आकंड़ा के साथ मौत की संख्या भी बढ़ रही है। बुधवार को एक बार फिर दो मरीजो की कोरोना से मौत हुई है।

बता दें कि कोरबा में फिर कोरोना से दो लोगों की मौत हुई है।जानकारी के मुताबिक एक मृतक 58 वर्षीय पोड़ी उपरोड़ा का निवासी है। वही दूसरा 48 वर्षीय दर्री सीएसईबी कॉलोनी निवासी है । संक्रमित मरीजो का उपचार ईएसआईसी कोविड अस्पताल में चल रहा था। अब तक 892 लोगों की हो मौत हो चुकी है। इसके बाद भी लोग कोविड गाइड लाइन का पालन नही कर रहे है। आम जन अभी भी बिना मास्क और सोशल डिस्टेंस के बेफिक्र होकर घूम रहे है।

जेल में अलग सेल में बीती निलंबित आईपीएस जीपी सिंह की पहली रात, कैदियों को दिया जाने वाला खाना ही परोसा गया

रायपुर। निलंबित IPS जीपी सिंह ने मंगलवार रात रायपुर की सेंट्रल जेल में बिताई। उन्हें अलग सेल में रखा गया है। जेल के भीतर सुरक्षाकर्मी जीपी सिंह की निगरानी करेंगे। जेल में पहली रात तो जीपी ने कैदियों को दिया जाने वाला खाना ही खाया, मगर सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य-गत कारणों से जेल के डॉक्टर सलाह पर उनके खाने का अलग बंदोबस्त किया जा सकता है।

बता दें कि जीपी सिंह को मंगलवार को अदालत ने 14 दिनों की रिमांड पर जेल भेजा। इस बीच उनके वकील ने दावा किया है कि जेल में जीपी सिंह की जान को खतरा है। अधिवक्ता आशुतोष पांडे ने कहा- जीपी सिंह एक डेकोरेटेड अफसर रहे हैं। वो दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर के IG थे। कई हाई प्रोफाइल मामलों को इन्वेस्टिगेट किया है। उनकी वजह से कई अपराधी जेल गए हैं। उसी जेल में अब जीपी सिंह जाएंगे तो उन पर हमला हो सकता है। उनकी जान को खतरा है।

जीपी सिंह के वकील की दलील सुनने के बाद रायपुर की अदालत ने जीपी सिंह को जमानत तो नहीं दी मगर, जेल सुपरिटेंडेंट को जीपी सिंह की सुरक्षा का जिम्मा दिया है। अब जेल में उनकी सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया है। अलग सेल में उन्हें रखा गया है। जेल के भीतर सुरक्षाकर्मी जीपी सिंह की निगरानी करेंगे।

खाने-पीने का भी अलग बंदोबस्त

जेल में स्वास्थ्य-गत कारणों से जीपी सिंह के लिए खाने-पीने का अलग बंदोबस्त किया जा सकता है। कोर्ट में जीपी सिंह की तरफ से कहा गया है कि उनका हार्ट और ब्लड प्रेशर का इलाज चल रहा है। अब ऐसे में खान-पान का विशेष ध्यान देना होता है।

हस्तिनापुर से लड़ रहीं ‘बिकिनी गर्ल’ अर्चना गौतम का फूटा गुस्‍सा, बोलीं- हेमा मालिनी को तो कोई कुछ नहीं कहता

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। इस चुनावी महासमर में मेरठ की हस्तिनापुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी माहौल भी गरमाया हुआ है। इस सीट से कांग्रेस की तरफ से अर्चना गौतम मैदान में हैं। अर्चना गौतम के चर्चाओं के आने के पीछे उनकी वायरल तस्वीरें हैं। बिकनी पहनी उनकी तस्वीरों के वायरल होने के बाद अर्चना हिंदू महासभा के निशाने पर आ गई हैं। इस पर अर्चना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लोग उनके पेशे और राजनीतिक करियर को मिक्स न करें। साथ ही, उन्होंने कहा कि मथुरा में भी तो हेमा मालिनी को लोगों ने जिताया था।

न्यूज18 से बात करते हुए अर्चना गौतम ने कहा, ”मैं इतना ही बोलना चाहती हूं कि जो बोल रहे हैं कि हस्तिनापुर जैसी पावन नगरी में मुझे टिकट दिया गया, तो लेकिन मथुरा जैसी पावन नगरी में हेमा मालिनी को भी जिताया था न। मेरे साथ ऐसा भेदभाव क्यों?”

मुलायम की बहू अपर्णा कल भाजपा में शामिल होंगी, सपा को झटका,दिल्ली रवाना


नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में भाजपा के मंत्रियों को एक के बाद एक तोड़कर अपने खेमे में ला रही समाजवादी पार्टी (सपा) को बुधवार को बड़ा झटका लग सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव कल भाजपा में शामिल हो रहीं हैं। वह देर शाम लखनऊ से दिल्ली निकल गईं हैं। हालांकि, अभी इस बारे में न तो अपर्णा और न ही भाजपा ने किसी भी तरह की ऑफिशियल पुष्टि की है।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, अपर्णा बुधवार सुबह 10 बजे दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता लेंगी। दो दिन पहले भी अपर्णा के भाजपा में शामिल होने की चर्चा थी। सियासी जानकारों ने बताया कि अपर्णा लखनऊ कैंट सीट से सपा का टिकट चाहती हैं। यह सीट बेहद सेफ है।

हालांकि, सपा सुप्रीमो और अपर्णा के जेठ अखिलेश यादव उन्हें इस सीट से टिकट देने के लिए अब तक तैयार नहीं हुए हैं। इसी कारण वह भाजपा में जा रही हैं। याद दिलाना जरूरी है कि अपर्णा, प्रतीक यादव की पत्नी हैं। प्रतीक, मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे हैं।

लखनऊ कैंट से ही चुनाव हार गई थीं अपर्णा

अपर्णा लखनऊ कैंट विधानसभा से सपा के टिकट पर 2017 में विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं। चुनाव हारने के बाद भी अपर्णा यादव लखनऊ कैंट क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता की भी है।

हालांकि अपर्णा के लिए भाजपा में भी चुनावी टिकट पाना बहुत आसान नहीं होगा। साल 2017 में चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं रीता बहुगुणा भी इस सीट से अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रही हैं।