The Duniyadari: 25 सितंबर की जनसुनवाई से पहले मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास की लंबित मांगों के निराकरण की उठी आवाज
कोरबा, 13 सितंबर। SECL की मानिकपुर ओपन कास्ट कोल परियोजना के प्रस्तावित विस्तार को लेकर प्रभावित ग्रामीणों की चिंता एक बार फिर सामने आई है। 25 सितंबर 2026 को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले मानिकपुर खदान से प्रभावित आठ गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने SECL मानिकपुर प्रभावित (भू-विस्थापित) समिति के बैनर तले पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात की। इस दौरान ग्रामीणों ने कलेक्टर, कोरबा के नाम तैयार ज्ञापन की प्रति उन्हें सौंपते हुए वर्षों से लंबित समस्याओं के जल्द निराकरण की मांग रखी।

ग्रामीणों के मुताबिक मानिकपुर खदान की प्रस्तावित क्षमता बढ़ाए जाने से आसपास के कई गांवों और परिवारों पर इसका असर पड़ रहा है। भिलाई खुर्द क्रमांक 1, 2 एवं 3, बरबसपुर, कर्रानाला, कदमहाखार, इमलीडुग्गू, रामपखरा, मानिकपुर, दादरखुर्द, ढेलवाडीह और कुदरी बस्ती सहित अन्य क्षेत्रों के प्रभावित परिवारों की जमीन, मकान और आजीविका परियोजना से जुड़ी हुई है।
जमीन के साथ आजीविका और भविष्य का भी सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण और विस्थापन को केवल जमीन के हस्तांतरण तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ परिवार की आय, बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और भविष्य की सुरक्षा भी जुड़ी होती है। वर्षों से अपनी जमीन और स्थानीय संसाधनों पर निर्भर परिवारों के लिए विस्थापन की स्थिति में स्थायी आय और जीवन-यापन की व्यवस्था सबसे बड़ी चिंता बन जाती है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रभावित परिवारों ने लंबित और न्यायसंगत मुआवजे का शीघ्र भुगतान, पात्र परिवारों को रोजगार, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) की उचित व्यवस्था तथा छूटे हुए मकानों और परिवारों का दोबारा सर्वे कराने की मांग की। इसके अलावा पात्रता के अनुसार सभी प्रभावित परिवारों को उनके अधिकार दिलाने की भी मांग रखी गई।
जनसुनवाई से पहले ठोस निर्णय की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और SECL प्रबंधन से आग्रह किया कि 25 सितंबर की जनसुनवाई से पहले लंबित मामलों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि परियोजना विस्तार की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों की आपत्तियों और समस्याओं को केवल औपचारिक प्रक्रिया न माना जाए, बल्कि प्रत्येक परिवार की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाए।
मुलाकात के दौरान पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं का लाभ क्षेत्र और प्रदेश को मिलना जरूरी है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। जिन लोगों को अपनी जमीन, घर और आजीविका छोड़नी पड़ रही है, उनके मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े अधिकारों का न्यायपूर्ण समाधान होना आवश्यक है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि जनसुनवाई तभी सार्थक मानी जाएगी, जब प्रभावित ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं और आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाए और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी जायज मांगों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने में वे सहयोग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहेंगे।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन और SECL प्रबंधन जनसुनवाई से पहले उनकी लंबित मांगों पर सकारात्मक पहल करेगा। उनका कहना है कि परियोजना का विकास आगे बढ़े, लेकिन इसके साथ प्रभावित और विस्थापित परिवारों के अधिकारों तथा भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।



















