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Government Jobs: सरकारी नौकरी चाहने वालों के लिए खुशखबरी, SSC करेगा 42 हजार भर्तियां; जानें डिटेल

SSC announces government jobs: कर्मचारी चयन आयोग ( SSC) जल्द ही 15,247 पदों के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी करेगा. ये पत्र अगले कुछ महीनों में विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए जाएंगे. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के एक ट्वीट ने इस बात की पुष्टि की है.

PIB ने किया ट्वीट

PIB ने ट्वीट में कहा है कि दिसंबर 2022 से पहले 42,000 नियुक्तियां पूरी की जाएंगी. SSC ने अपनी आगामी परीक्षाओं के लिए 67,768 रिक्तियों को तुरंत भरने की योजना तैयार की है.

साल के अंत तक भरी जाएंगी रिक्तियां

वहीं, इस ट्वीट के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निश्चित रूप से सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ेगा, क्योंकि इन सभी रिक्तियों को साल के अंत से पहले भरने की योजना है.

15 हजार से अधिक पदों के लिए नियुक्ति पत्र जारी

हालांकि, SSC ने इतने बड़े पैमाने पर भर्तियों के लिए घोषणा ऐसे समय में की है, जब देश में ‘अग्निपथ’ (Agnipath) योजना को लेकर हिंसक विरोध हो रहा है. घोषणा के अनुसार, SSC 15,247 पदों के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया” करेगा, जो आने वाले महीनों में विभिन्न विभागों द्वारा जारी की जाएगी.

पीएम मोदी ने की थी घोषणा

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों ऐलान किया था कि आने वाले डेढ़ साल में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों व विभागों में 10 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया की जाएगी. ऐसे में सभी विभाग रिक्ति पदों पर जल्दी भर्ती पूरी करने की तैयारी में जुट गए हैं.

191 की जान बचाने वाली पायलट मोनिका खन्ना दिखने में परी से कम नहीं, खूबसूरती में तो बॉलीवुड की हिरोइनें भी फेल

न्यूज डेस्क। कैप्टन मोनिका खन्ना स्पाइस जेट विमान कंपनी की एक्सपीरियंस्ड पायलट हैं। उन्हें बचपन से ही आसमान में उड़ान भरने का शौक था। फ्लाइट्स उड़ाने के लिए मोनिका ने पढ़ाई के साथ-साथ कड़ी मेहनत भी की है। कहा जाता है कि एक पायलट में धैर्य होना चाहिए, मोनिका ने आग लगे प्लेन की सेफ लैंडिंग कराकर इसे साबित कर दिया।

किसी परी से कम नहीं लगतीं पायलट मोनिका खन्ना

इस तस्वीर में कैप्टन मोनिका खन्ना एक खेत में बैठी नजर आ रही हैं। उन्हें सिर्फ आसमान ही नहीं बल्कि प्रकृति भी पसंद है। रविवार को जब स्पाइसजेट की फ्लाइट SG-723 से धुआं निकलने लगा तो मोनिका ने बगैर समय गंवाए प्लेन को गंगा नदी की तरफ मोड़ दिया था, ताकि हालात बिगड़ने पर प्लेन में सवार ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके। लेकिन उनकी सूझबूझ ने ये नौबत नहीं आने दी।

पायलट मोनिका खन्ना को फैशन बेहद पसंद


इस तस्वीर में पायलट मोनिका खन्ना किसी परी से कम नहीं लग रहीं। मां-पिता की लाडली बेटी ने अपनी बहादुरी दिखा न सिर्फ इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया बल्कि अब तो वो पूरे देश की बेटी बन चुकी हैं। कैप्टन मोनिका खन्ना को जैसे ही केबिन क्रू उन्हें आग के बारे में बताया, वो हड़बड़ाई नहीं और न ही डरीं। उन्होंने सीधे आग लगे इंजन को बंद कर दिया। उस वक्त स्पाइसजेट की इस फ्लाइट में 2 बच्चों समेत 185 यात्री और 6 केबिन क्रू मेंबर भी थे। जहाज ने जब पटना से टेक ऑफ किया था, तो एक यात्री नीचे के नजारे का वीडियो बना रहा था, उसने आग की लपटें देख फौरन केबिन क्रू मेंबर को बताया। फौरन पता चल गया कि इंजन नंबर एक से आग और धुआं निकल रहा है। पायलट मोनिका खन्ना तक जैसे ही खबर पहुंची तो उन्हें शक हो गया कि जहाज बर्ड हिट का शिकार हुआ है।

कैप्टन मोनिका खन्ना ने पेश कर दी मिसाल

इसके बाद पायलट मोनिका खन्ना ने वो किया जो देश में एक मिसाल बन गया। चुंकि पटना हवाई अड्डे के दो छोरों में से एक पर ऊंचे पेड़ हैं और दूसरी तरफ रेलवे लाइन। ऐसे में आग से खराब हो चुके एक इंजन वाले प्लेन को लैंड कराना खुद में एक बड़ा जोखिम था। लेकिन मोनिका खन्ना ने अपना धैर्य नहीं खोया और उन्होंने प्लेन को पटना में रनवे पर उतारने का फैसला किया। वो दस सेकेंड अब एक मिसाल बन चुके हैं।

Paternity Leave: मां तो दूध पिलाती हैं, पापा का क्या काम? समझिए पैटरनिटी लीव की सिफारिश क्यों हो रही

नई दिल्ली।संतान का सुख सबसे बड़ा सुख होता है। तोतली भाषा में कानों में पड़े मम्मी-पापा के शब्द ऐसी अनुभूति कराते हैं जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। घर में किलकारी गूंजती है तो हर कोई उस नन्हे मेहमान के करीब रहना चाहता है। उसके साथ खेलना चाहता है, सुकून के पल बिताना चाहता है। ऐसे में माताओं के लिए सरकार और प्राइवेट कंपनियों में मातृत्व अवकाश और पिता के लिए पितृत्व अवकाश का प्रावधान किया गया है। मां को 6 महीने यानी 26 हफ्ते दिए जाते हैं जिसमें वह अपने बच्चे का लालन-पालन अच्छी तरीके से कर सके। इस दौरान वह शारीरिक रूप से भी मजबूत होती है और किसी तरह का वेतन नहीं काटा जाता है। हालांकि पिता को अवकाश कम हैं। इस समय केंद्रीय कर्मचारियों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) दिया जाता है। प्राइवेट सेक्टर की बात करें तो कुछ कंपनियों में 7 दिन का अवकाश है लेकिन कुछ कंपनियों में स्पष्ट नीति नहीं है। इसे यह कहकर टाल दिया जाता है कि पिता का बच्चे के साथ रहना उतना जरूरी नहीं, जितना मां का रहना जरूरी है। क्या ऐसा है? अब पितृत्व अवकाश बढ़ाने की मांग क्यों हो रही है? आइए समझते हैं।

मां पर बोझ होगा कम
मातृत्व लाभ अधिनियम पर आयोजित कानून समीक्षा चर्चा में कई विशेषज्ञों ने माताओं पर बच्चों की परवरिश का बोझ कम करने की बात कही। ऐसे में उन्होंने पितृत्व अवकाश को बढ़ाने की सिफारिश की है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने बताया है कि पितृत्व अवकाश को बढ़ाने के अलावा नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करना और ज्यादा महिला श्रमिकों को रोजगार देने के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्र को संवेदनशील बनाने जैसी सिफारिशें आई हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और 2017 के संशोधन पर अंतिम कानून समीक्षा परामर्श का आयोजन किया था। आयोग ने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य महिलाओं को प्रभावित करने वाले कानून की समीक्षा और उसका विश्लेषण करना तथा किसी प्रकार की कमी, अपर्याप्तता और त्रुटियों में सुधार करने के लिए संशोधन की सिफारिश करना था।

पराग अग्रवाल ने ली कई हफ्ते की छुट्टी
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की बात हो या कर्मचारी के अधिकारों की, दुनिया के कई देशों में बेहतर प्रावधान हैं। आपने पढ़ा होगा कि ट्विटर के भारतीय मूल के CEO पराग अग्रवाल ने कुछ महीने पहले कहा था कि वह अपने दूसरे बच्चे के जन्म के बाद कुछ हफ्ते की पैटरनिटी लीव लेंगे। क्या अपने देश में आप ऐसा सोच सकते हैं? भारत में मांओं को छुट्टी तो मिल जाती है लेकिन पिता के पितृत्व अवकाश की बात होने लगे तो इस गैरजरूरी या छुट्टी का बहाना समझा जाता है।

मां की मुश्किल समझिए
वास्तव में, आज के समय में गांव हो या शहर नवजात की देखभाल करना आसान नहीं है। सामूहिक परिवार में थोड़ी आसानी हो जाती है लेकिन आजकल फ्लैट में रहने वाले माता-पिता के पास मां के अलावा बच्चों को संभालने वाला कोई नहीं होता है। पहली बार माता-पिता बनने के बाद कई तरह की चुनौतियां आती हैं। इसमें समय और धैर्य की जरूरत होती है। प्रसव के बाद मां को कुछ महीने तक आराम करने और ज्यादा भागदौड़ न करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अगर पिता नौकरी पर जाए तो मां के लिए अकेले बच्चे को संभालना मुश्किल भरा होता है।

सोने का, उठने का पूरा रूटीन बदल जाता है
हाल में पिता बने नोएडा के राहुल कुमार कहते हैं कि नन्हे मेहमान के आने के बाद सोने का, उठने का… यूं समझिए पूरे दिन और रात का रूटीन बदल गया। पूरे घर में उस पर ही फोकस रहता। क्यों रोया, दूध पीया क्या, उसे हर पल अटेंशन देना पड़ता है। पत्नी कमजोर हैं तो घर में मेड के अलावा भी काम रहता है जो उन्हें करना पड़ता है। वह कहते हैं कि रात में नींद पूरी नहीं हो पाती क्योंकि बच्चा कई बार उठता है। ऐसे में पिता को भी कुछ हफ्ते मिलने चाहिए जिससे वह नई जिंदगी में रच-बस सके। इससे पत्नी की भी मदद हो जाएगी और ऑफिस-घर के कामकाज में संतुलन साधने में बड़ी हेल्प हो जाएगी।

एक एमएनसी कंपनी में काम करने वाले सर्वेश्वर तिवारी कहते हैं कि अगर बॉस विदेशी है तो वह इन सब चीजों को ज्यादा संवेदनशीलता से लेता है। लेकिन देश में paternity leave को लेकर देशव्यापी नीति न होने से काफी चीजें स्पष्ट नहीं हैं और हम इसकी मांग भी नहीं कर सकते हैं।

अब न दादा हैं न दादी तो कैसे पालें बच्चे
नोएडा के एक अपार्टमेंट में रहने वाली ऑफिस जाने वाली रुचि कहती हैं कि कुछ साल पहले जब लोग एक ही छत के नीचे दादा-दादी, चाचा-चाची के साथ रहते थे, घर में बच्चे को संभालने वाले कई लोग हुआ करते थे तो परिस्थितियां अलग थीं। आज न्यूक्लियर फैमिली में मां को अपनी सेहत दुरुस्त करने का समय ही नहीं मिलता। उसे प्रसव के बाद बच्चे की देखभाल करनी होती है। इसमें अगर पिता का साथ मिल जाए और वह कुछ हफ्ते घर पर ज्यादा समय दें तो एक मानसिक तनाव और पीड़ा कम होगी। इससे कंपनी को भी फायदा होगा क्योंकि कर्मचारी को मानसिक टेंशन कम रहा करेगी।

मां दूध पिलाएगी, पापा का क्या काम?
कुछ कंपनियों में 15 दिन की पैटरनिटी लीव लेने पर वरिष्ठ साथी यह कहकर मजाक बनाते हैं कि अच्छा है, उनके समय में तो एक दिन की भी छुट्टी नहीं थी। कुछ तंज कसते हैं कि दूध मां पिलाएगी तो तुम्हारा घर में क्या काम है? ऐसे में कर्मचारी पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बन जाता है कि वह जल्दी से ऑफिस जॉइन कर ले। जबकि एक्सपर्ट कहते हैं कि खासतौर से पहले बच्चे के जन्म पर मां-बाप की दुनिया ही बदल जाती है। कई अप्रत्याशित चीजें होती हैं। मां को शारीरिक और भावनात्मक रूप से एक साथ की जरूरत होती है, जो बच्चे की देखरेख में उसका साथ दे सके। यही वजह है कि अब देश में पैटरनिटी लीव बढ़ाने की मांग तेज हो गई है।

नेशनल हेराल्ड केस: राहुल घर से निकले, ED में आज फिर पेशी, जंतर मंतर पर सत्याग्रह पर बैठे कांग्रेसी

नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड केस में ED की पूछताछ में सवालों को जबाव देने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर जाने के लिए घर से निकल गए हैं। कार में उनके साथ प्रियंका गांधी भी सवार हैं। इससे पहले सोमवार सुबह प्रियंका वाड्रा उनके तुगलक रोड स्थित आवास पर पहुंची थीं। दोनों ने अपने वकील से पूछताछ को लेकर मशवरा लिया था।

3 दिन में 30 घंटे हो चुकी है पूछताछ

बता दें कि राहुल से ED की टीम अब तक 3 दिन में 30 घंटे की पूछताछ कर चुकी है। नेशनल हेराल्ड केस में राहुल के अलावा सोनिया गांधी, सुमन दुबे और सैम पित्रौदा भी आरोपी हैं। दो आरोपियों ऑस्कर फर्नांडिस और मोतीलाल वोरा का निधन हो चुका है।

कांग्रेस नेताओं का सत्याग्रह शुरू

राहुल गांधी से ED की पूछताछ के खिलाफ कांग्रेसियों ने जंतर-मंतर पर धरना देना शुरू कर दिया है। जंतर मंतर पर सत्याग्रह में मल्लिकार्जुन खड़गे, सलमान खुर्शीद, के सुरेश, वी नारायणसामी सहित छत्तीसगढ़ के कई नेता शामिल हैं।

आज भारत बंद, पंजाब से हरियाणा तक हाई अलर्ट, झारखंड में बंद रहेंगे स्‍कूल,रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सार्वजनिक जगहों पर पुलिस तैनात

नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की चार साल के लिए सेना में भर्ती के खिलाफ सोमवार को (20 जून) बंद बुलाया गया है। राज्‍यों में पुलिस, आरपीएफ और जीआरपी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। छत्तीसगढ़ में पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। सर्वाजनिक जगहों पर अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।

वहीं भारत बंद की घोषण के बीच कांग्रेस ने भी देशव्‍यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस ने राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की जांच और अग्निपथ योजना के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की है।

17 जिलों में इंटरनेट बंद

युवाओं की ओर से देश के विभिन्‍न राज्‍यों में लगातार किए जा रहे हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए पंजाब से लेकर हरियाणा पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इतना ही नहीं, बिहार के 17 जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया है। पंजाब में कोचिंग सेंटर्स के आसपास कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं तो वहीं, झारखंड में भारत बंद के ऐलान के चलते सरकार ने स्‍कूलों को बंद रखने का फैसला किया है।

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सार्वजनिक जगहों पर पुलिस तैनात

छत्तीसगढ़ में अग्निपथ योजना (Agneepath scheme) का विरोध प्रदर्शन को लेकर छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh police deployed at railway station and bus stand) को सतर्क कर दिया गया है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सार्वजनिक जगहों पर पुलिस को मुस्तैदी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।सोशल मीडिया पर विशेष नजर रखी जा रही है।

केंद्र से छत्तीसगढ़ पुलिस को मिले खुफिया इनपुट

छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय की तरफ से कहा गया है कि 20 जून को केंद्र सरकार के नए सैन्य भर्ती मॉडल अग्निपथ के विरोध में भारत बंद का आवाहन किया गया है।

गृह मंत्रालय भारत सरकार से मिले इनपुट के आधार पर पूरे प्रदेश की पुलिस को अलर्ट रहने को कहा गया है। कानून व्यवस्था, शांति और सुरक्षा के हर उपाय करने को कहा गया है।

CG: चपरासी से क्लर्क और फिर कैशियर बने क्राइम मास्टर की दास्तां… पढ़े कैसे किया 5.59 करोड़ का गबन!

रायपुर: एक कैशियर ने ही बैंक में करोड़ों के घोटाले को अंजाम दिया और फिर बड़े शातिर तरीके से अपना मोबाइल रायपुर में ही छोड़कर फरार हो गया. यही वजह है कि आरोपी को पकड़ने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
दरअसल, ये पूरा मामला राजेंद्र नगर यूनियन बैंक से जुड़ा हुआ है, जहाँ 5.59 करोड़ के घोटाले का मोस्ट वांटेड कैशियर किशन बघेल है. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आरोपी कैशियर किशन ने करोड़ों का घोटाला केवल 1 लाख 30 हजार के सिक्कों की आड़ में कर दिया।

5.59 करोड़ के घोटाले का मोस्ट वांटेड कैशियर किशन यूनियन बैंक में बतौर चपरासी भर्ती हुआ था। डेली वेजेस पर नौकरी करते करते वह परमानेंट हुआ। उसके बाद क्लर्क बना फिर उसका प्रमोशन कैशियर के पद पर हो गया। वह 2017 से कैशियर के पद पर काम कर रहा था। बैंक अफसरों को शक है कि उसी के बाद से किशन ने पैसों का गबन शुरू कर दिया था। मिल रही जानकारी के मुताबिक, किशन ने एक लाख तीस हजार के सिक्कों को बैंक के रिकार्ड में 5.59 करोड़ का दिखाया। उसके बाद अपने करीबियों और रिश्तेदारों के खाते किराए पर लिए और पैसे उसमें ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उनके खाते से पैसों का ट्रांजेक्शन अलग-अलग खातों में कर निकाल लिया।

बताया जाता है कि किशन गबन के पैसों से ब्याज का धंधा करता था, मार्केट में उसका करोड़ों का पैसा ब्याज में चल रहा था। इससे हर महीने उसे मोटी कमाई ब्याज के रूप में हो रही थी। किशन ने जिन लोगों को ब्याज में पैसे दिए हैं, उन्हीं में से 6 लोगों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए और उनके खातों को किराए पर ले लिया। किराए पर लेने के बाद वह उन खातों को खुद ऑपरेट करता था। उसने उन लोगों से बैंक पासबुक से लेकर एटीएम तक अपने कब्जे में लिए थे। वह उनके खातों में बैंक से पैसा ट्रांसफर कर खुद निकालता या किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर कर देता था। खाता जिसके नाम पर होता था उसे वह हर महीने चार-छह हजार रुपए बतौर कमीशन देता था। किशन ने जिन छह लोगों के खाते किराए पर लिए हैं, उन सभी से पूछताछ कर ली गई है।

आधी रात की बड़ी खबर: अग्निपथ योजना के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ा एक्शन, 35 वाॅट्सऐप ग्रुप बैन, 10 गिरफ्तार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रविवार देर रात सेना में भर्ती के लिए action against Agneepath scheme protesters लाई गई अग्निपथ योजना और अग्निवीरों को लेकर फर्जी खबरें फैलाने के लिए 35 वॉट्सऐप ग्रुप 35 WhatsApp group banned पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, अफवाह फैलाने और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के आरोप में कम से कम दस लोगों  10 arrested को गिरफ्तार किया गया है। गृह मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी।

गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र ने व्हाट्सएप फैक्ट-चेकिंग के लिए 8799711259 नंबर भी जारी किया है। बिहार जैसे राज्यों में विरोध प्रदर्शनों को जुटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विशेषकर व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने की खबरों के बीच यह कार्रवाई हुई है, कई ट्रेनों में आग लगाने की घटना देखऩे को मिली है।

कोचिंग सेंटरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में

17 जून को, बिहार सरकार ने रविवार तक 12 जिलों में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करते हुए कहा था कि जनता को भड़काने और जान-माल को नुकसान पहुंचाने के इरादे से अफवाहें फैलाने के लिए आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। पटना में जिला प्रशासन ने यह भी कहा कि गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के मोबाइल फोन से मिली जानकारी कोचिंग सेंटरों की भूमिका की ओर इशारा करती है।

Horoscope: ये हैं इस हफ्ते की लकी राशियां, टैरो राशिफल से जानें किसको मिलेगी कौनसी खुशखबरी?

यह सप्‍ताह 4 राशि वालों के लिए शानदार साबित हो सकता है. किस्‍मत की मदद से उन्‍हें कई मौके और सफलताएं मिलेंगी. आइए कायावल्ली हीलिंग सेंटर की फॉउंडर और टैरो कार्ड रीडर आचार्या रणमीत कौर से जानते हैं कि इस हफ्ते टैरो कार्ड रीडिंग के मुताबिक सभी राशि वालों का हाल कैसा रहेगा.

मेष (Aries) : नाइट ऑफ सोर्ड कार्ड संकेत कर रहा है कि इस सप्ताह कार्यक्षेत्र में पर्याप्त उन्‍नति करेंगे. आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ ही संघर्ष का भी सामना करना पड़ेगा. वैवाहिक जीवन में कुछ रूखापन अनुभव होता. छात्रों को सफलता के लिए कठिन श्रम करने की आवश्यकता है.

वृषभ (Taurus) : जस्टिस कार्ड संकेत करता है कि इस सप्ताह पुराने चले आ रहे विवाद में आपको विजय प्राप्त होगी. सत्य की शक्ति से आप जीवन में संतुलन बना पाएंगे. स्थान परिवर्तन अथवा यात्रा के योग भी बन रहे हैं. बढ़ते खर्चे मन को परेशान करेंगे.

मिथुन (Gemini) : नाइन ऑफ कप्स कार्ड संकेत कर रहा है कि इस सप्ताह आप अत्यधिक भाग्यशाली अनुभव करेंगे. प्रेम संबंध प्रगाढ़ होंगे और कार्यक्षेत्र में भी सफलता प्राप्त करेंगे. धन-लाभ से आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा. यात्रा और खानपान में सावधानी की आवश्यकता है.

कर्क (Cancer) : सेवन ऑफ सोर्डस संकेत कर रहा है कि इस सप्ताह अत्यधिक मानसिक श्रम करना पड़ेगा. ज्‍यादा भावुक होने पारिवारिक संबंध बिगड़ सकते हैं. माइग्रेन और उच्च-रक्तचाप के लिए सचेत रहे. संतान को लेकर कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा.

सिंह (Leo) : द लवर्स कार्ड संकेत कर रहा है कि इस सप्ताह आप आपके जीवन में प्रेम का प्रभाव रहेगा. पुरानी चली आ रही समस्याएं सुलझेंगी और आपके संबंध बेहतर होंगे. धन लाभ होने से मन प्रसन्न रहेगा. पेट और हृदय रोग की संभावना है.
कन्या (Virgo) : टू ऑफ कप्स कार्ड संकेत करता है कि इस सप्ताह वैवाहिक जीवन में एक नयापन आएगा और यदि अविवाहित हैं तो पार्टनर से मिलने के आसार हैं. कार्यक्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त करेंगे, जिससे आर्थिक स्थित सुदृढ़ होगी. परिवार के साथ धार्मिक कार्यक्रम में सम्मलित होने की संभावना है.

तुला (Libra) : द मैजिशियन कार्ड संकेत करता है कि यह सप्ताह दिमागी व्यायाम करने और भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए उत्तम है. आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी. परिवार के साथ संबंध मधुर रहेंगे. ननिहाल पक्ष से सहयोग प्राप्त होगा. कोई पुराना घाव फिर से ताजा होगा और भावनात्मक कष्ट देगा. पेट की समस्या रहेगी.

वृश्चिक (Scorpio) : द फूल कार्ड संकेत करता है कि इस सप्ताह किसी रोमांचक घटना अथवा यात्रा के कारण मन प्रफुल्लित रहेगा. इस सप्ताह रोमांच और सरप्राइज के लिए तैयार रहें और समय की धारा में बहकर चलें. जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहने की आवश्यकता है.

महुआ झरे…मंत्री झूमे,जंगल में मोर नाचा, किसने देखा..टेण्डर गेम में उलझे वेंडर,राज की नीति का मंथन…

एक आंदोलन ऐसा भी, हम चोर नहीं हैं…

कोरबा शहर में एक ऐसा आंदोलन भी हुआ जिसकी चर्चा अब तक लोगों के जुबां पर है। इस आंदोलन में पूर्व आईएएस की गिरफ्तारी की मांग करते हुए तख्ती पकड़ कर सफाई दे रहे थे..और कह रहे थे हम चोर नहीं है… हालांकि इस आंदोलन को लीड कौन कर रहा था ये अब तक साफ नही हो पाया है। हां ये बात अलग है कि आंदोलन को हिट करने का हर संभव प्रयास किया गया था। असल में बुधवार को अचानक कोसाबाड़ी चौक और एसपी कार्यालय के समीप दोनों तरफ बैरीगेटिंग लगा। आम जन को तो छोड़िए ड्यूटी कर रहे जवानों को भी नहीं पता कि कौन सी पार्टी का आंदोलन होने वाला है। कोई भाजपा का तो कोई कांग्रेस का समझता रहा।

हां ये बात अलग हैं कि पुलिस महकमा के बड़े अधिकारियों को आंदोलन की रूप रेखा की जानकारी थी। तभी तो आंदोलनकारी जब कोसाबाड़ी पंहुचे तो विभाग के अधिकारी ने कार में जाकर बैठ गए। क्योंकि उनको पता था कि आंदोलन में क्या होने वाला है। खैर अब इस आंदोलन को लोग समझने का प्रयास कर रहे है आखिर था किसका?

जंगल में मोर नाचा, किसने देखा..

सच और झूठ को लेकर अक्सर यह कहावत सुनने को मिलती है कि जंगल में मोर नाचा, किसने देखा…. इस कहावत को कोरबा फारेस्ट डिवीजन पूरी तरह से फालो करता है। तभी तो जंगल में करोड़ों का तालाब और सड़क बना दिया गया, वो भी बिना रोलर के। खबरीलाल की माने तो मुख्यालय के अलग अलग क्षेत्रों में डब्ल्यूबीएम की 6 से 8 सड़कें बनी हैं। कच्ची सड़क बनाने के लिए रोलर के साथ कंपेक्शन के लिए पानी यानी टैंकर का उपयोग अनिवार्य होता है, लेकिन ये बात भला वन विभाग के अधिकारियों कौन बताए कि सड़क बिना रोलर के साथ पानी के बनाना मतलब रोड के नाम पर खाना पूर्ति करने वाली बात है। उड़ती खबर तो यह भी है कि विभाग में आई एक तेज तर्रार रेंजर ने सामग्री वाउचर में साइन करने के पहले सवाल जवाब कर दिया, फिर क्या था सामग्री सप्लाई करने वाले ठेकेदार के हाथ पांव फूलने लगे हैं और अब धीरे धीरे विभाग की गड़बड़ियां उजागर होने लगी हैं।

टेण्डर गेम में उलझे वेंडर…

जिले के अधिकारियों के टेण्डर गेम में वेंडर यानी ठेकेदार उलझ कर रह गए हैं। बिना नियम निविदा में लग रहे कंडीशन के ताप की आंच अब निगम में भी पहुंच चुकी है। पहुंचे भी क्यों नहीं.. क्योंकि वही इंजीनियर निगम में भी मुख्य किरदार निभा रहे है जो ट्राइबल में जाकर विभाग को उलझा रहे हैं।

आदिवासी विभाग में कंडीशन लगाकर निविदा तो जारी कर दिया, पर बिना नियम को लेकर कोर्ट में चैलेंज भी किया गया। जो फिलहाल लंबित है लेकिन, कोर्ट के डिसीजन की परवाह किए बिना वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है.. और तो और जनाब वर्क ऑर्डर को मैनेज करने के लिए विभाग के चर्चित बाबू ने शहर के होटल में मीटिंग लिया और ठेकेदारों के बीच काम बांटकर विभाग के अधिकारी को खुश करने में कामयाब रहा।

हालांकि अभी भी कोर्ट में गलत ढंग से जारी किए गए निविदा का मामला लंबित है। इसके बाद अब वही खेल निगम के कामों में भी खेलने की तैयारी की जा रही है और उल्टे सीधे नियम डालकर चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने का खेल जारी है। हालांकि बिना नियम के लगे कंडीशन का विरोध नियमतः शुरू हो गया है। अब अधिकारी और ठेकेदारों बीच ठन गई है। जिस अंदाज में कंडीशन लगाकर टेण्डर बांटने का खेल चल रहा है उससे तो अब ऑनलाइन टेण्डर और एकल खिलाड़ी का कॉन्सेप्ट फेल साबित हो रहा है।

राज की नीति का मंथन…

शहर में पिछले दिनों सत्ता दल और विपक्ष के बड़े लीडरों का जमावड़ा रहा। एक ने प्रदेश में खोई हुई सत्ता को पाने यानी राज की नीति के लिए मंथन किया तो सत्ता पक्ष के नेताओं ने बिखरे कुनबे को एकसूत्र में पिरोने का! हालांकि इस मंथन में एक युवा नेता ने इमोशनल होकर अपनी मन की पीड़ा का बखान कर ही दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से जब जो भी जवाबदारी दी गई, उस पर मैं खरा उतरने के लिए हरसंभव कोशिश किया, पर इसका इनाम यह मिल रहा है कि मुझे ही पुलिस व प्रशासन प्रताड़ित कर रही। यह बोलते हुए वे भावुक हो गए और मंच पर ही गला भर गया।

दूसरी तरफ बिहार सरकार के मंत्री ने आकर प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए यहां तक कह डाला कि प्रदेश में कानून व्यवस्था ही नहीं… वे यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि  प्रदेश में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और सच का मुंह काला है। अब यह तो राजनीति में नीति ही है जो कभी अपने ही हाथों से अपनों का मुंह काला कर देती है, कभी मलाई खिलाकर लाल कर देती है तो कभी पीला-सफेद भी कर जाती है.. किसी के मुंह पर मलाल होता है तो किसी के माथे पर गुलाल….।

महुआ झरे…मंत्री झूमे

बादल घिरे और मोर नाचे तो सभी ने सुना होगा पर महुआ झरे और मंत्री झूमे इस सपने को सच होते शादी कार्यक्रम के रिसेप्शन में सभी ने देखा। महुआ झरे…में मंत्री के साथ के कुछ विधायक भी जमकर झूमे…ऐसा लगा रहा था कि महुआ झरा कि नहीं सभी के होश खो गए।

जीहां बात उन्हीं मंत्री महोदय की हो रही है, जिन्हें महुआ से ज्यादा प्रेम है तभी तो महुआ का नाम सुनते ही मंत्रीजी झूमने लगते हैं। इससे पहले भी कई बार वो झूमते झूमते प्रदेश में शराब बंदी को बेतूका बता कर सरकार को झूमा चुके हैं।

मंत्रीजी झूमने का कोई मौका नहीं छोड़ते, जब भी मौका मिला वो झूमने लगते हैं। इस पूरे डांस का वीडियो अब वायरल है। जिससे लेकर सभी ओर महुआ झरे…मंत्री नाचे की चर्चा है।

         ✍️    अनिल द्विवेदी, ईश्वर चन्द्रा

सीजी: अचानक जलस्तर बढ़ने से नदी में नहाने गया परिवार डूबा, 5 को सुरक्षित निकाला, एक लापता

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र में रविवार सुबह नदी में नहाने गया परिवार तेज बहाव में डूब गया। इनमें से 5 लोगों को तो किसी तरह से निकाल लिया गया। मगर एक नाबालिग का घटना के 8 घंटे बाद कोई सुराग नहीं है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार खरसिया के मदनपुर के रहने वाले सुमन झा अपने भाई रमन झा के परिवार के साथ मांड नदी में सुबह नहाने के लिए गए थे। इनके साथ सुमन की बेटी आयुषी झा (16) और रमन का बेटा कृष्णा झा(13) भी नहाने के लिए नदी में उतरे थे।

तभी अचानक जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण सभी डूबने लगे। परिवार वालों के आवाज लगाने पर पास के लोेगों की नजर पड़ गई तो किसी तरह से सुमन झा और उसकी पत्नी, रमन झा और उसकी पत्नी को निकाल लिया गया। लेकिन आयुषी और कृष्णा पानी के तेज बहाव में ही बह गए।

लड़की को कुछ देर बाद निकाला गया,अस्पताल में भर्ती

इसके बाद दोनों नाबालिगों को खोजने का भी काम शुरू किया गया। किसी तरह से कुछ देर बाद आयुषी को भी पानी से निकाल लिया गया। पर वह बेहोश थी। जिसके बाद उसे तुरंत ही अस्पताल भेज दिया गया था।

इधर, स्थानीय लोगों ने कृष्णा को तलाश करने का काम जारी रखा। काफी तलाश करने के बावजूद उसका कुछ पता नहीं चला। देर शाम तक लापता देर शाम तक लापता को तलाशा गया मगर सफलता नहीं मिली। रात होने की वजह से रविवार को रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया गया है।