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IAS टीना डाबी ने लोगों को किया फिर से इंस्पायर, पढ़कर हो जाएंगे खुश

Jaipur: आईएएस टीना डाबी (Tina Dabi) इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव नजर आ रही हैं. टीना अपने फैंस के साथ हमेशा पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी चीजें शेयर करती रहती हैं.
टीना इंस्टाग्राम, ट्विटर पर काफी सक्रिय हैं. उन्होंने हाल ही में अपनी एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की है, फोटो में टीना ने नीले रंग का सूट पहन रखा है. ट्रेडिशनल कपड़ों में IAS काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं. वहीं इस पोस्ट के साथ टीना ने कैप्शन ने मुस्कान को लेकर बेहद खूबसूरत बात लिखी है टीना ने लिखा है कि मुस्कान के पीछे से दुनिया हमेशा उज्जवल दिखती है. लोग उनकी इस पोस्ट पर जमकर कमेंट कर रहे हैं, कोई उनकी तो कोई उनके कैप्शन की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

महज 22 साल की उम्र में टीना ने UPSC में टॉप किया था. साल 2015 में सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Exam) क्लियर किया था. उन्हीं की तरह उनकी छोटी बहन रिया डाबी ने भी UPSC क्लियर किया है और इन दिनों रिया भी सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहती हैं.

वो पक्षी जो केवल बरसात का ही पानी पीता है, क्या जानते हैं आप इसका जवाब

नई दिल्ली: जैकोबिन कोयल (Jacobin Cuckoo) यानी चातक (Chatak) को भारत में एक भाग्यशाली पक्षी (Lucky Bird) के तौर पर देखा जाता है. बता दें कि चातक एक ऐसा पक्षी है जो केवल बरसात का पानी (Rain Water) ही पीता है. भारतीय साहित्य (Indian Literature) में इसके बारे में ऐसा माना जाता है कि यह बारिश की पहली बूंदों को ही पीता है.

दो आबादी वाला पक्षी
अगर इस पक्षी (Bird) को साफ पानी (Clean Water) की झील में डाल दिया जाए तब भी यह पानी नहीं पिएगा और अपनी चोंच बंद कर लेगा जिससे झील (Lake) का पानी इसके मुहं में न जा सके. भारत में चातक की 2 आबादी (Two Populations) हैं. एक दक्षिणी (Southern) भाग का निवासी है. और दूसरा मॉनसूनी हवाओं (Monsoon Winds) के साथ अरब सागर (Arabian Sea) को पार करते हुए अफ्रीका (Africa) से उत्तर और मध्य भारत (North And Central India) में अपनी राह बनाता है.
चातक पक्षी होता है मुखर
इसका वैज्ञानिक नाम क्लैमेटर जैकोबिनस (Clamator Jacobinus) है. बता दें कि क्लैमेटर का मतलब होता है चिल्लाना यानी एक ऐसा पक्षी जो काफी मुखर (Outspoken) है. ये पक्षी कीटभक्षी (Insectivorous) होते हैं जिसका मतलब है कि ये टिड्डे-भृंगे (Locust Beetles) खाते हैं लेकिन कई बार इन्हें फल और जामुन (Fruits And Berries) भी खाते हुए देखा गया है.

अंडे दूसरे पक्षियों के घोसले में देते हैं
चातक (Chatak) की एक अनोखी बात ये है कि ये अपने अंडे (Eggs) दूसरे पक्षियों के घोंसले (Nests) में देते हैं. दरअसल ये पक्षी बब्बलर और बुलबुल (Bubbler And Bulbul) जैसे आकार वाले पक्षियों को अपने मेजबान के तौर पर पसंद करती हैं और उनके घोंसलों में अपने रंगीन अंडे (Colored Eggs) रख देती हैं
मानसून के आने का देते हैं संकेत
आपको बता दें कि उत्तरी भारत (North India) के ज्यादातर हिस्सों में ये पक्षी (Bird) मानसून (Monsoon) से पहले पहुंच जाते हैं. जिन जगहों में मानसून अपने समय से पहले दस्तक देता है वहां भी ये पक्षी मानसून (Monsoon) आने से पहले पहुंच जाते हैं.

KORBA: सड़कों पर मांस, मछली विक्रय करने वालो पर आयुक्त सख्त …कहा इन्हें नानवेज मार्केट में करें शिफ्ट…

कोरबा । शहर की सड़कों के किनारे पसरा लगाकर मांस, मछली का विक्रय करने वालों को बुधवारी बाजार स्थित नानवेज मार्केट में शिफ्ट किया जाएगा। आज आयुक्त प्रभाकर पाण्डेय ने बुधवारी नानवेज मार्केट का अधिकारियों की टीम के साथ निरीक्षण किया तथा उक्ताशय के निर्देश दिए। इसी प्रकार पौनी पसारी बाजार का निरीक्षण करते हुए उन्होने जिन व्यक्तियों को पौनी पसारी चबूतरें आबंटित किए गए हैं, उन्हें उक्त बाजार में व्यवस्थित किए जाने के संबंध में अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।
आयुक्त प्रभाकर पाण्डेय ने आज निगम के अधिकारियों की टीम के साथ बुधवारी बाजार स्थित नानवेज मार्केट का निरीक्षण किया, वहाँ की साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं को देखा, उक्त नानवेज मार्केट के प्रथम तल में मटन एवं चिकन की दुकानें तथा ऊपरी तल पर मछली विक्रय हेतु दुकान या चबूतरें स्थित हैं। आयुक्त श्री पाण्डेय ने नानवेज मार्केट के दोनों तलों का अवलोकन किया, उन्होने शहर की सड़कों के किनारे अव्यवस्थित रूप से पसरे लगाकर मांस, मछली का विक्रय करने वाले लोगों को उक्त नानवेज मार्केट में शिफ्ट कर उन्हे व्यवस्थित किए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होने कहा कि सड़कों के किनारे मांस, मछली का विक्रय होने से एक ओर जहॉं पर्यावरण प्रदूषित होता है, निगम की साफ-सफाई व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, वहीं दूसरी ओर आमनागरिकों को इससे अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है, अतः शीघ्र से शीघ्र सड़कों पर लगने वाली मांस, मछली की दुकानों को नानवेज मार्केट में शिफ्ट किया जाए।

हिजाब विवाद में मलाला की एंट्री, भारतीय नेताओं से की ये अपील

नई दिल्ली। कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद पर अब दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भड़की हिंसा के बाद नोबल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि, हिजाब में लड़कियों को स्कूल जाने से रोकना भयावह है।

मलाला ने ट्वीट किया-
कॉलेज में हमें पढ़ाई और हिजाब के बीच किसी एक का चयन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हिजाब में लड़कियों को स्कूल जाने से मना करना भयावह है। कम या ज्यादा पहनने के लिए महिलाओं के प्रति एक नजरिया बना रहा है। भारतीय नेताओं को चाहिए कि वे मुस्लिम महिलाओं को हाशिए पर जाने से रोकें।

राज्य में स्कूल-कॉलेज तीन दिन तक बंद

हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान विभिन्न स्थानों पर हुए विवाद को देखते हुए कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने राज्य के सभी हाई स्कूल और कॉलेजों को 3 दिनों के लिए बंद करने के आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी दी। उन्होंने छात्रों और स्कूल-कॉलेज प्रबंधन से शांति बनाए रखने की अपील की।

क्या है विवाद

कर्नाटक में हिजाब पर विवाद की शुरुआत जनवरी महीने में उडुपी शहर से हुई थी। शहर के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में 6 छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया था। कॉलेज प्रशासन ने इसका कारण ड्रेस में समानता को रखना बताया है। इसके बाद यह विवाद राज्य के कई जिलों में बढ़ता ही चला गया। कई संस्थानों में छात्राओं ने हिजाब पहनकर आना शुरू किया तो इसके विरोध में छात्र भगवा गमछा पहनकर आने लगे।

5 साल में पुलिस एनकाउंटर में 655 मौतें… यूपी नहीं, ये राज्य है पहले नंबर पर

न्यूज डेस्क। देश में पुलिस एनकाउंटर में होने वाली मौतों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. पिछले कुछ सालों से ऐसा माना जाता रहा है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर में सबसे ज्यादा मौतें हुईं हैं. लेकिन आंकड़े अलग बात कहते हैं.

लोकसभा में बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने पुलिस एनकाउंटर में हुई मौतों को लेकर सवाल किया था. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसका जवाब दिया है. उन्होंने बताया है कि 5 साल में देश में पुलिस एनकाउंटर में 655 लोग मारे गए हैं. ये आंकड़ा 1 जनवरी 2017 से 31 जनवरी 2022 तक के हैं.

केंद्र सरकार ने बताया है कि 5 साल में देश में पुलिस एनकाउंटर में सबसे ज्यादा मौतें छत्तीसगढ़ में हुई हैं. वहां 191 लोग मारे गए हैं. दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है जहां 117 लोगों की मौत हुई है.
भारत में एनकाउंटर को लेकर क्या है नियम?

– संविधान में कहीं भी एनकाउंटर का जिक्र नहीं है. कानून में एनकाउंटर को वैध ठहराने का प्रावधान नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे नियम जरूर हैं जो पुलिस को अपराधियों पर हमला करने और इस दौरान अपराधी की मौत को सही ठहराने का अधिकार देते हैं.

– सीआरपीसी की धारा 46 के मुताबिक, अगर कोई अपराधी खुद को गिरफ्तारी से बचाने की कोशिश करता है या पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश करता है या फिर पुलिस पर हमला करता है तो ऐसे हालात में पुलिस जवाबी हमला कर सकती है.

– पुलिस एनकाउंटर या फायरिंग में हुई मौत की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ गाइडलाइंस तय की हुई हैं. इसके मुताबिक, ऐसे मामले में तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए और इसकी जांच सीआईडी या दूसरे पुलिस स्टेशन की टीम से करवाना जरूरी है.

– सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक, पुलिस फायरिंग में हुई हर मौत की मजिस्ट्रियल जांच होनी चाहिए. ऐसे मामलों की सूचना बिना देरी किए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग को देना जरूरी है.

– इसके अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भी कुछ गाइडलाइंस हैं. इनमें कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई मौत की जानकारी 48 घंटे के भीतर आयोग को देना जरूरी है. इसके तीन महीने बाद एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करना होगा. ये भी कहा गया है कि अगर जांच में पुलिस दोषी पाई जाती है तो मारे गए व्यक्ति के परिजनों को मुआवजा देना होगा.

BJP नेता ने प्रदेश सरकार पर कसा तंज …कहा अवैध कारोबारियो को दे रहें संरक्षण…

कोरबा। खनिज संपदा से परिपूर्ण उर्जानगरी में चल रहे अवैध कारोबार को लेकर भाजपा के युवा नेता ने सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि एक तरफ सूबे के मुखिया रात को अवैध कारोबार के ठिकानों पर छापेमारी करवाकर वाहवाही लूटते है तो दूसरी तरफ कार्रवाई के नाम गोलमोल मामला बनाकर अवैध कारोबारियों को संरक्षण दे रहे है।
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी मंडल दर्री के महामंत्री मनोज यादव ने प्रदेश में हो रहे रेत के अवैध उत्खनन एवं बढ़ी हुए कीमतों पर सवाल करते हुए कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार रेत माफियाओं पर कार्यवाही करने का ढोल पीट रही है तो वहीं दूसरी ओर रेत अधिक कीमतों में बेचा जा रहा है। रेत उत्खनन के लिए रायल्टी के नाम पर एक हजार से लेकर ढाई हजार रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही है। जिसके कारण रेत की कीमतें तेजी से बढ़ रही है इसका लाभ ट्रांसपोर्टर एवं रेत माफिया जमकर उठा रहे है। उन्होंने कहा कि रेत की कीमत बढ़ने के कारण आम उपभोक्ताओं को अधिक दर पर रेत खरीदना पड़ रहा है। प्रदेश के रेतघाटों पर रेत माफिया अभी भी सक्रिय तथा वे बेखौफ होकर अवैध उत्खनन कर रहे है। अवैध उत्खनन के कारण नदियों में बने पुल के पिलर भी हिलने लगे हैं व नींव कमजोर हो चुकी है। वही सीमेंट, छड़,गिट्टी और मुरूम का दर भी काफी बढ़ गया है।जो आम लोगों के पहुंच से बाहर है जिसके लिये प्रदेश की कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है।
मंडल महामंत्री श्री यादव ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार केवल दिखावे के लिए ही प्रदेश के रेत माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही कर रही है। वास्तव में इन रेत माफियओं को प्रदेश सरकार का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री अचानक ही रेत माफियाओं पर कार्यवाही करने का आदेश देना केवल मात्र औपचारिक है। पूरे प्रदेश में रेत माफिया बेखौफ होकर रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं तथा प्रदेश सरकार केवल दिखावे के लिए एवं खानापूर्ति के लिए ही कुछ एक माफियाओं पर कार्यवाही कर रही है। जबकि पूरे प्रदेश में रेत माफिया अभी भी सक्रिय है।जिसका सीधा असर आम जनता को वहन करना पड़ रहा है, जो की प्रदेश की विकास के बजाय विनाश का कारण बनते जा रहा है।

MNRGA के कार्यो में लापरवाही… 07 रोजगार सहायक को कलेक्टर ने किया पद से पृथक…

कोरबा।महात्मा गाँधी राष्टीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत कार्यो में लापरवाही बरतने एवं अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीनता के कारण जनपद पंचायत करतला के 07 ग्राम रोजगार सहायकों को पद से पृथक कर दिया गया है।
गौरतलब है कि श्रीमति रानू साहू कलेक्टर कोरबा द्वारा जिले में शासकीय कार्यों में कसावट लाने के लिए कठोर कार्यवाही की जा रही है .उन्होंने अधिकारियो,कर्मचारियों को पूर्व में निर्देशित किया है कि अपने कर्तव्यों, कार्यालयीन दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से किया जाये,शासकीय कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी.
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत करतला ने प्रतिवेदित किया था कि रंजीत सिंह रोजगार सहायक -ग्राम पंचायत भैसामुड़ा, क्षत्रपाल सिंह वरकरे रोजगार सहायक सलिहाभाटा,श्रीमती चंद्रमणि राठिया रोजगार सहायक बोतली, गोपाल प्रसाद रोजगार सहायक कोटमेर,संतोष कुमार चौहान रोजगार सहायक चैनपुर, भोलाराम कश्यप रोजगार सहायक घाठाद्वारी अनूप दुबे रोजगार सहायक सरगबुंदियाँ के द्वारा मनरेगा के कार्यो में रूचि नही ली जा रही है ,जिससे योजना का लाभ ग्रामीणों नहीं मिल पा रहा है .इसके साथ ही रोजगार सहायक बिना किसी सुचना के जनपद पंचायत में होने वाली समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहते हैं .रोजगार सहायकों से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने पर मोबाइल बंद कर लिया जाता है . रोजगार सहायकों की लापरवाही पूर्ण रवैये के कारण उन्हें शोकाज नोटिस भी जारी किये गये थे,उसके बाद भी उनके व्यवहार में परिवर्तन नही आया और न ही अपनी कार्यशेली में सुधार किया गया.इस वजह से उक्त सातों रोजगार सहायकों को 07 फरवरी 202 2 को रोजगार सहायक के पद से पृथक कर दिया गया है ।

Breaking कोरबा अमृतसर ट्रेन अब सप्ताह में 04 दिन चलेगी… ऊर्जानगरी को मिली सौगात…

रायपुर । उर्जानगरी वासियों को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है। सप्ताह में तीन चलने वाली अमृतसर एक्सप्रेस को सप्ताह में चार दिन चलाने की मंजूरी दी है।

बता दें कि रेल यात्रियों की सुविधाओं एवं मांग को ध्यान में रखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, रायपुर मंडल से होकर जाने वाली 18237 / 18238कोरबा–अमृतसर त्रि – साप्ताहिक ट्रेन की सुविधा सप्ताह में 03 दिन मिल रही है।इस गाड़ी का परिचालन विस्तार करके सप्ताह में 04 दिन किया गया हैं। गाड़ी संख्या 18237 कोरबा – अमृतसर ट्रेन कोरबा से दिनांक 17 फरवरी, 2022 से प्रत्येक मंगलवार, बुधवार, *गुरुवार* एवं शुक्रवार को चलेगी । इसी प्रकार विपरीत दिशा में भी गाड़ी संख्या 18238 अमृतसर – बिलासपुर ट्रेन अमृतसर से दिनांक 19 फरवरी,2022 से प्रत्येक गुरुवार, शुक्रवार, *शनिवार* एवं रविवार को चलेगी ।

KORBA: दिवंगत परिवार के आश्रितो का सीईओ ने रखा मान… अनुकंपा नियुक्ति देकर किया सम्मान…

कोरबा। जिला पंचायत सीईओ ने दिवंगत परिवारों का मान रखते हुए तत्काल अनुकंपा नियुक्ति देकर सम्मान दिया है।


बता दें कि जिले के ग्राम पंचायतों में सेवा दे रहे तीन लोगों की असमय मृत्यु हो गई थी। परिवार के मुखिया का देहांत होने के बाद परिवार के आश्रित लोगों आर्थिक स्थिति दयनीय हो चुकी थी। इसकी जानकारी जिला पंचायत के सीईओ नूतन कंवर को जानकारी मिली तो अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रस्तुत आवेदनों का निराकरण करने का निर्देश जारी किया था। सीईओ के निर्देश जारी मिलते ही विभागीय अमला हरकत में आया और स्व मुकेश कुमार श्रीवास के पत्नी श्रीमती निर्मला श्रीवास , स्व रामेश्वर बरेठ के पुत्र विकास कुमार बरेठ और स्व देवानंद टेकाम के पत्नी श्रीमती प्रभादेवी टेकाम के अनुकम्पा नियुक्ति की फाइल को दुरुस्त करना शुरू किया। आखिरकार आज सीईओ ने दिवंगत परिवार के आश्रितो का मान रखते हुए उन्हें सचिव पद पर अनुकंपा नियुक्ति देकर सम्मान किया है।

समय के बाद शुरू होता है ऑफिस और समय से पहले बंद… दफ्तर में पसरा रहता सन्नटा, बेलगाम हुए अधिकारी…

कोरबा। सरकारी कार्यालयों का सरकार ने कार्यालयीन कामकाज का समय सुबह 10 से शाम 5.30 बजे कर दिया है। इसके बावजूद अधिकारी- कर्मचारी सुबह निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित नहीं हो रहे है। वहीं शाम को पांच बजते ही कार्यालयों सन्नााटा पसरने लगता हैं। कार्यालय में पहुुंचने का ही नहीं बल्कि निकलने के समय का पालन नहीं किया जा रहा है।

राज्य सरकार कर्मचारियों को सप्ताह में रविवार के अलावा शनिवार को भी अवकाश कर दिया है। इसके बदले प्रतिदिन कार्यालयीन समय में एक घंटा की बढ़ोतरी की गई है। कार्यालयों में अधिकारी- कर्मचारी समय पर उपस्थिति नहीं हो रहे हैं। नईदुनिया की टीम ने मंगलवार को शाम पांच बजे पड़ताल की तो जिला खनिज विभाग, सहायक आयुक्त व खाद्य विभाग के कार्यालयों की कई कुर्सियां खाली मिलीं। जिला पंचायत के शाखाओं में भी काम- काज शाम पांच बजे थमा गया। शाम को पांच बजते ही सामान्य चहल पहल समाप्त हो जाती है। जिसका लाभ उठाते हुए कर्मचारी नदारतर होना शुरू कर देऐ हैं। इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी एसएस नाग से चर्चा किए जाने पर उन्होने बताया कि सभी कर्मचारियों को बदले हुए समय पर उस्थित रहने के लिए कहा गया है। जिला खाद्य अधिकारी जेके सिंह का कहना है उपस्थिति को लेकर सरकारी नियम का पालन करने की जानकारी सभी अधीनस्थ कर्मचारियों को दिया गया है। यहां बताना होगा कि कलेक्टर के दौरे पर कर्मचारियों की नजर रहती है। शीर्ष अधिकारियों के दौरे पर निकलते ही कार्यालय के काम काज की गति थम जाती है। जिला कार्यालय परिसर के विभिन्ना विभागों कें पदस्थ 20 फीसद कर्मचारी ऐसे हैं जो जांजगीर, बिलासपुर, पाली से आकर काम करते हैं। ये कर्मचारी मुख्यालय भत्ता ले रहे हैं पर रोज बस और ट्रेन से अप डाउन करते हैं। दूर दराज के कर्मचारी सहित निकटवर्ती कर्मचारियों की नजर पांच बजते ही घड़ी की सुई पर टिक जाती है। यह मामला केवल सुबह और शाम का ही नहीं बल्कि दोपहर भोजन अवकाश का भी है। भोजन अवकाश का समय किसी भी कार्यालय में चस्पा नहीं किया गया है। ऐसे में कर्मचारी तीन बजे तक अपनी कार्यालयीन सीट से गायब रहते हैं।