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KORBA: सरकार तुंहर द्वार में 4684 आवेदनों का मौके पर हुआ निराकरण… लाभान्वित लोगो ने प्रसाशन का जताया आभार…

कोरबा।घुडदेवा में आयोजित किए गए आज के वृहद समाधान शिविर में विभिन्न समस्याओं, शिकायतों व मांगों से संबंधित 4684 आवेदनों का निराकरण विभिन्न विभागों के माध्यम से किया गया। इसके अंतर्गत नगर पालिक निगम कोरबा के 2299, राजस्व विभाग के 134, खाद्य विभाग के 1000, महिला एवं बाल विकास विभाग के 97, स्वास्थ्य विभाग के 4, क्रेडा के 6, श्रम विभाग के 29, जिला अंत्यावसायी विभाग के 16, मछलीपालन विभाग के 1, कृषि विभाग के 14, विद्युत वितरण कम्पनी के 159, शिक्षा विभाग के 4, समाज कल्याण विभाग के 16, सहकारिता विभाग के 5 आवेदनों का निराकरण करते हुए हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया।

0शिविर में विभिन्न विभागों ने लगाए थे स्टाल

शिविर में नगर पालिक निगम कोरबा, खाद्य विभाग, श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग, राजस्व विभाग, विद्युत विभाग, क्रेडा, स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास, कौशल विकास, पुलिस, आबकारी, वन, शिक्षा, सहकारिता, पी.एच.ई., कृषि, पशुधन, मछली पालन, उद्यान, जिला योजना सांख्यिकी, जिला अत्यावसायी विभाग के काउंटर विभिन्न कक्षों में लगाए गए थे तथा संबंधित अधिकारी कर्मचारियों की तैनाती की गई थी, जहॉं पर आवेदकों हितग्राहियों केा उनके द्वारा दिए गए आवेदनों पर निराकरण संबंधी जानकारी दी गई।

KORBA: सरकार तुंहर द्वार शिविर में दिव्यांग बच्ची सना और जन्नत का बना दिव्यांगता प्रमाण पत्र…बच्चियों के पिता ने जताया जिला प्रशासन का आभार…

कोरबा।कलेक्टर श्रीमती रानू साहू के मार्गदर्शन में जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों मंे आयोजित किये जा रहे सरकार तुंहर द्वार शिविर से जिलेवासी लाभान्वित हो रहे है। शिविर स्थल में ही राशन कार्ड, पेंशन प्रकरण, राजस्व प्रकरण, जाति प्रमाण पत्र, आय-निवास प्रमाण पत्र, किसान किताब, ड्राइविंग लाइसेंस और दिव्यांगता प्रमाण पत्र आदि सुविधाओं का लाभ नागरिकों को मिल रहा है।

 

नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत घुडदेवा में आयोजित सरकार तुंहर द्वार शिविर में बांकीमोंगरा निवासी मैदान अली को बार-बार जिला अस्पताल जाने से मुक्ति मिल गयी। शिविर स्थल में ही उनके दो दिव्यांग पुत्रियों सना निशा और जन्नत कुरैशी का दिव्यांगता प्रमाण पत्र बन गया। सरकार तुंहर द्वार शिविर में प्रमाण पत्र आसानी से बन जाने के कारण अब दोनो दिव्यांग बच्चियों को शासकीय योजनाओं का बेहतर लाभ मिलेगा। साथ ही दिव्यांगता पेंशन और दिव्यांगजनो को शासन द्वारा दिये जाने वाले विशेष प्रोत्साहन का भी लाभ मिलेगा। घर के पास ही शिविर स्थल में आसानी से दिव्यांगता प्रमाण पत्र मिल जाने से मैदान अली ने खुशी जताते हुए जिला प्रशासन का आभार जताया है।

उद्धव के वफादार की कहानी: शिंदे संग कार में जा रहे MLA को हुआ शक, गुजरात बॉर्डर क्रॉस होते ही कार से कूदे, 4 किमी पैदल चले, ट्रक में लिफ्ट ले मुंबई लौटे

न्यूज डेस्क। महाराष्ट्र में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद सियासी हलचल तेज है। शिवसेना नेता ने 40 विधायकों के समर्थन का दावा कर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे को संकट में डाल दिया है। शिंदे पार्टी के विधायकों को लेकर सूरत पहुंचे थे, जहां से अब वह गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। महाराष्ट्र की इस सियासी उठापटक में पल-पल ट्विस्ट आ रहे हैं। शिवसेना के कई विधायक बागी शिंदे से जा मिले हैं लेकिन उनमें से एक विधायक ऐसे भी हैं जिन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे के प्रति वफादारी दिखाई। शिंदे के साथ जाते वक्त जब कार ने गुजरात बॉर्डर क्रॉस किया तो विधायक को शक हुआ। वह तुरंत ही कार से कूद पड़े।

CNN-News18 के मुताबिक, नाम न छापने की शर्त पर विधायक ने बताया कि वह छह विधायकों के उस ग्रुप का हिस्सा थे, जिन्हें इस बहाने गुजरात ले जाया जा रहा था कि शिंदे उन्हें किसी और से मिलवाना चाहते हैं। हालांकि, जैसे ही उनकी गाड़ियां वसई विरार पार कर गुजरात सीमा से आगे बढ़ीं, विधायकों को शक हुआ।

जैसे ही कार एक चेकपोस्ट के पास पहुंची, उनमें से एक विधायक ने कार से छलांग लगा दी और बाइक सवार से लिफ्ट ले ली। फिर विधायक महाराष्ट्र की ओर चार किलोमीटर तक पैदल चलकर दहिसर पहुंचने के लिए ट्रक पर सवार हुए। उसके बाद मुंबई पहुंचकर तुरंत मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास पर पहुंच गए। इसके बाद, विधायक ने सीएम उद्धव ठाकरे को पूरे मामले से अवगत कराया।

महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। बुधवार को कैबिनेट की मीटिंग बुलाई गई थी, जिसमें उद्धव ठाकरे सरकार के आठ मंत्री शामिल नहीं हुए हैं। बुधवार को पूरे दिन सियासी हलचल बढ़ी रही। शरद पवार से लेकर सीएम आवास तक पर नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। उधर, इस मीटिंग के बाद शिवसेना ने अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शाम पांच बजे सीएम उद्धव ठाकरे के घर पर पहुंचना है। साथ ही कहा गया है कि अगर विधायक मीटिंग में नहीं आए तो माना जाएगा कि वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं।

World Cup 2022 : वन नाइट स्टैंड करते पाए गए तो 7 साल की सजा, जाने पूरा मामला

न्यूज डेस्क। फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup 2022) का इंतजार लोग बड़ी ही बेसब्री से कर रहे हैं। लोग इसक मजा दोगुना करना चाहते हैं और विदेशों से आने वाले मौजमस्ती, पार्टी, शोरशराबा और साथ ही कोई सहमति से वन नाइट स्टैंड करना चाहता है तो बात ही कुछ और ही हो।

लेकिन सेक्स को लेकर सभी लोग जानते हैं कि कतर के नियम-कानून कितने ज्यादा सख्त हैं। ऐसे में कतर ने साफ कर दिया है कि अगर कोई वन नाइट स्टैंड करता पाया गया या फिर खुले आम रोमांस करता पाया गया तो उसे 1 या 2 साल की नहीं बल्कि 7 साल की सजा (FIFA World Cup 2022) हो सकती है।
[6/22, 17:56] The Duniyadari.com: बता दें कि नवंबर में कतर में हो रहे (FIFA World Cup 2022) देखने आने वाले फैन्स को कड़े नियमों का पालन करना होगा। रूल्स ना मानने वाले दर्शकों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है, वो भी एक दो नहीं बल्कि पूरे 7 साल. दरअसल, इस बार फुटबाल वर्ल्ड कप की मेजबानी कतर कर रहा है।

पुलिस के हवाले से बताया कि अगर आप पति-पत्नी के रूप में आ रहे हैं, तब तो ठीक है, लेकिन अगर आप इस रूप में नहीं आ रहे हैं, तब सेक्स आपके लिए दूर की कौड़ी साबित हो सकता है।

इस साल के वर्ल्ड कप में पहली बार अनिवार्य रूप से सेक्स प्रतिबंधित है। शोरशराबे वाली पार्टी पर भी बैन है। गौरतलब है कि मैच के बाद शराब पीना-पार्टी करना वर्ल्ड कप में फैंस का ट्रेंड रहा है।

तेरा घमंड चार दिन का, हमारी बादशाहत खानदानी है, संजय राउत के घर के बाहर शिवसेना नेता ने लगाया पोस्टर, यूजर्स ने यूं उड़ाया मजाक

न्यूज डेस्क।महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक घमासान के बीच विभिन्न दलों के नेता संभावित हालातों को लेकर चर्चा में लगे हुए हैं। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस पार्टी जहां सरकार बचाने के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं भाजपा शिवसेना के बागी विधायकों पर नजरें गड़ाई हुई है। इस बीच राजनीतिक नेताओं की बयानबाजी भी जारी है। पार्टी कार्यकर्ता भी अपने नेताओं के पक्ष में आवाजें उठा रहे हैं।

मुंबई में शिवसेना नेता संजय राउत के आवास के बाहर पार्टी के एक कार्यकर्ता ने पोस्टर लगाया है। इसमें विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ लिखते हुए कहा गया है कि, “तेरा घमंड चार दिन का, हमारी बादशाहत खानदानी है।” इस पोस्टर को शिवसेना की कार्यकर्ता दीपमाला बढ़े की ओर से लगाया गया है।

इस पोस्टर को सोशल मीडिया पर ट्वीट करने पर यूजरों ने जमकर मजाक उड़ाया। फ्रिंज काना सर@Kanatunga नाम के यूजर ने लिखा, “इसको बदलकर लिख दो, “तेरा घमंड तो चार दिन का हैं पगले, हमारी चापलूसी तो खानदानी है।” हुसैन खान@hussain_khan_7 नाम के यूजर ने लिखा, “आप किसके साथ हैं? आप किसका समर्थन करेंगे? भले ही सरकार गिर जाए @ShivSena बीजेपी के साथ नहीं जाएगी।”

मोदी जी तुकाराम के कार्यक्रम में आए और एकनाथ को साथ ले गए: छगन भुजबल

न्यूज डेस्क। महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. शिवसेना नेता और उद्धव सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे के बगावती तेवर के चलते सूबे में ऐसा सियासी संकट पैदा हुआ है. विधानसभा भंग करने की अटकलें तेज हो गई हैं. कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस्तीफा भी दे सकते हैं.

इधर, एनसीपी नेता और MVA सरकार में मंत्री छगन भुजबल का कहना है कि उन्हें विधानसभा भंग करने की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुणे में पीएम ने संत तुकाराम शिला मंदिर का लोकार्पण करने के लिए थे. यहां से पीएम मोदी एकनाथ शिंदे को साथ ले गए. बता दें कि इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अरसे बाद एक मंच पर साथ दिखाई दिए थे.

इससे पहले छगन भुजबल ने कहा था कि महाराष्ट्र की सियासत में एक तरह का तूफान आ गया है. यदि कोई तूफान आता है तो वह शांत भी हो जाएगा और घट भी जाएगा. आने वाले दिनों में स्थिति फिर से सामान्य हो जाएगी. हम स्थिति के लिए तैयार हैं.

उद्धव से ज्यादा शिंदे के साथ MLA
बता दें कि 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 56 विधायक जीतकर आए थे, जिनमें से एक विधायक का निधन हो चुका है. इसके चलते 55 विधायक फिलहाल शिवसेना के हैं. एकनाथ शिंदे का दावा है कि उनके साथ 40 विधायक हैं. ऐसे में ये सभी 40 विधायक अगर शिवसेना के हैं तो फिर उद्वव ठाकरे लिए संकट काफी बड़ा है. इस तरह से एकनाथ शिंदे अगर कोई कदम उठाते हैं तो दलबदल कानून के तहत कार्रवाई भी नहीं होगी.

दरअसल, दलबदल कानून कहता है कि अगर किसी पार्टी के कुल विधायकों में से दो-तिहाई के कम विधायक बगावत करते हैं तो उन्हें अयोग्य करार दिया जा सकता है. इस लिहाज से शिवसेना के पास इस समय विधानसभा में 55 विधायक हैं. ऐसे में दलबदल कानून से बचने के लिए बागी गुट को कम के कम 37 विधायकों (55 में से दो-तिहाई) की जरूरत होगी जबकि शिंदे अपने साथ 40 विधायकों का दावा कर रहे हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे के साथ 15 विधायक ही बच रहे हैं. इस तरह उद्धव से ज्यादा शिंदे के साथ शिवसेना के विधायक खड़े नजर आ रहे हैं.

पायलट ना चूकते तो राजस्थान में भी भाजपा की सरकार होती- केंद्रीय मंत्री का वीडियो वायरल, लोग बोले-सिंधिया की तरह गद्दार समझा है क्या?

न्यूज ङेस्क. एक तरफ जहां महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी सरकार मुश्किल में है वो वहीं दूसरी तरफ राजस्थान में सरकार बनाने को लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वह राजस्थान कांग्रेस के नेता सचिन पायलट का जिक्र करते नजर आ रहे हैं।

गजेद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ‘राजस्थान में सचिन पायलट से थोड़ी चूक हो गई, थोड़ी खामी रह गई। अगर मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान में सबकुछ ठीक-ठाक हो जाता (सरकार बन जाती) तो अब तक ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट पर काम चालू हो जाता।’ उदाहरण देते हुए गजेंद्र शेखावत ने कहा कि ‘जिस तरह 2018 के बाद 2020 में मध्य प्रदेश के विधायकों ने फैसला किया, वैसे राजस्थान में हुआ होता तो 13 जिले अब तक प्यासे नहीं रहे होते।’

लोगों की प्रतिक्रियाएं: सुनील चौधरी ने लिखा कि ‘क्या बात है, बहुमत को पैसे के दम पर चुराने का काम सरकार करती है। इससे ज्यादा लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने वाली बात क्या होगी?’ मनोज नाम के यूजर ने लिखा कि ‘गजेंद्र सिंह जी राजस्थान में सीएम श्रीमान अशोक गहलोत साहब है, जो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। इनके रहते हुए बीजेपी कुछ भी करके सरकार नहीं गिरा पाती।’

प्रतीक मिश्रा ने लिखा कि “फूट डालो और शासन करो” ये अंग्रेजों की नीति थी। वो तो हम देखे नहीं लेकिन भाजपा को जरूर देख रहे हैं।’ नागेंद्र कुमार ने लिखा कि ‘लोकतंत्र में जनतंत्र की बोली लगाई जा रही है, खरीदी गई सरकार जनता की भलाई के बारे में नहीं सोच सकती है।’ गौरांग परमार ने लिखा कि ‘विधायक को खरीद कर ही सरकार बनानी है तो इलेक्शन क्यों कराते हो। क्या लोकतंत्र है या सिर्फ़ कागजों पर ही लोकतंत्र बचा है।’ एक यूजर ने लिखा कि ‘सचिन पायलट को ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा गद्दार समझा है क्या?’

महाराष्ट्र सियासी संकट: मुझे अगवा कर सूरत में कैद रखा गया, सलामत हूं और उद्धव ठाकरे के साथ हूं, नितिन देशमुख का दावा

न्यूज डेस्क। महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच एकनाथ शिंदे के कैंप से भी विरोध के सुर सामने आने लगे हैं। शिवसेना के विधायक नितिन देशमुख ने आरोप लगाया है कि उनको अगवा कर सूरत में कैद रखा गया। उन्होंने कहा कि मैं सलामत हूं और उद्धव ठाकरे के साथ हूं।

नितिन देशमुख ने पूरी घटना के बारे में बताते हुए कहा, ‘मैं रात के करीब 12 बजे होटल से निकला और 3 बजे सड़क पर खड़ा था. मेरे पीछे करीब 100-200 पुलिसकर्मी थे। वे मुझे अस्पताल ले गए और ड्रामा किया कि मुझे अटैक आया है। लोग मेरे शरीर पर घात करना चाहते थे, लेकिन ईंश्वर की कृपा से मैं सही सलामत हूं। उन्होंने कहा कि मैं सूरत से निकलना चाहता था, कोई वाहन आता था, तो मैं उसमें बैठना चाहता था, लेकिन मुझे किसी वाहन में बैठने नहीं देते थे।

 

इससे पहले मंगलवार को महाराष्ट्र के अकोला जिले के बालापुर से शिवसेना विधायक नितिन देशमुख की पत्नी प्रांजलि देशमुख ने जिले के सिविल लाइंस पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। विधायक की पत्नी ने अपनी शिकायत में कहा था कि सोमवार की रात से उनके पति के साथ उनका कोई संपर्क नहीं हो सका। प्रांजलि ने पुलिस से अपने पति का जल्दी पता लगाने का आग्रह किया था।

मगंलवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया था कि सूरत में विधायक को बीजेपी ने पकड़ रखा है। उनको मुंबई से अगवा किया गया था। सोमवार रात जब उन्होंने भागने की कोशिश की तो गुजरात पुलिस और गुंडों ने उनको पीटा।

देश के इस एयरपोर्ट पर सुनाई जाती है ‘संस्कृत’ में अनाउंसमेंट, सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं यात्री;VIDEO

Varanasi Airport: यदि आप भविष्य में किसी भी समय वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जाते हैं, तो आपको संस्कृत भाषा में कोविड-19 की घोषणाएं सुनने को मिलेंगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाईअड्डे ने संस्कृत में महत्वपूर्ण कोविड-19 घोषणाएं करना शुरू कर दिया है, एक पहल जिसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सहयोग से शुरू किया है. अभी तक, हवाई अड्डे पर किसी भी प्रकार की घोषणाओं के लिए हिंदी और अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन बीते शुक्रवार से एयरपोर्ट पर अनाउंसमेंट के लिए तीसरी भाषा के तौर पर संस्कृत को जोड़ा गया है.

वाराणसी हवाई अड्डे पर संस्कृत में अनाउंसमेंट

वाराणसी हवाई अड्डे ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘अब भाविप्रा वाराणसी विमानतल पर अंग्रेजी और हिंदी के बाद संस्कृत में भी कोविड मानदंडों की घोषणा की जा रही है. हमारे सम्मानित यात्रियों को विमानतल पर आते ही महसूस हो जाएगा कि वे काशी-संस्कृत भाषा के पीठ स्थान में प्रवेश कर चुके हैं.’ हवाईअड्डा निदेशक आर्यमा सान्याल ने कहा कि संस्कृत घोषणा की पहल भाषा को सम्मान देने के लिए शुरू की गई है. संस्कृत की घोषणा वाली एक क्लिप ने अब ट्विटर पर हलचल मचा दी है. कई लोगों ने इस पहल की सराहना की है. जबकि कुछ यूजर्स ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह इस भाषा को पुनर्जीवित करने के लिए कुछ नहीं करेगा.

मॉनसून के साथ इस पक्षी ने सबसे अलग और खूबसूरत घोंसले बनाना शुरू किया, देखें – VIDEO

नई दिल्ली: मॉनसून (Monsoon) आ गया है और बया (Bayaweaver) ने दुनिया के पक्षियों से जुदा अपने अलग किस्म के आशियाने बनाने शुरू कर दिए हैं. उसके लिए यह मौसम घरौंदे (Nest) बनाने और संतति बढ़ाने का है. मानव बस्तियों में तो आप रहते हैं, क्या आपने कभी इस खास पक्षी की बस्ती देखी है? दक्षिण एशिया (South Asia) में पाया जाने वाला हल्के पीले रंग का पक्षी बया मॉनसून के आते ही एक सुंदर बस्ती बसाने में जुट जाता है. बया बुनकर पक्षी (Weaverbird) भी कहलाता है और इसकी यह खासियत इसके घोंसलों में दिखाई देती है. घांस के तिनकों से बनने वाला बया का घोंसला बाकी सभी पक्षियों के घोंसलों से बिल्कुल अलहदा होता है. तिनका-तिनका जोड़कर, उन्हें गूंथकर वह अपने घोंसलों को ऐसा बनाता है कि जिसे देखकर यही लगता है कि किसी बुनकर ने बहुत सब्र और लगन के साथ उसे आकार दिया है.
भारत में मॉनसून आने के साथ बया ने अपने घोंसले बनाना शुरू कर दिया है. चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट और नेचर फोटोग्राफर अनिल गुलाटी ने ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया है जिसमें बया के झुंड का कलरव और उसकी कॉलोनी देखी जा सकती है.
भारत और दक्षिण एशिया में खास तौर पर मॉनसून का आना एक ऐसी घटना है जिसका सभी को इंतजार होता है. ऐसा हो भी क्यों न, मॉनसून ही प्रकृति में बदलाव का वह चरण है जिस पर दुनिया के इस इलाके की अर्थव्यवस्थाएं निर्भर हैं. भारत जैसे देश, जिनकी अर्थव्यवस्था (Economy) खेतीबाड़ी पर ही आधारित है, मॉनसून के बिना तो सहज आर्थिक, सामाजिक और प्राकृतिक चक्र की कल्पना भी नहीं कर सकते. मॉनसून के साथ प्रकृति भी अपने नए रंग-रूप में सामने आती है. इंसान के साथ-साथ पेड़-पौधे, पशु-पक्षियों की जीवन शैली (Life Style) में भी एक बदलाव आ जाता है. इंसान मॉनसून आते ही जहां अपने घरों के बारिश से बचाव और रखरखाव में जुट जाता है वहीं बया अपने नए-नए आशियाने बनाने में जुट जाता है.

बया पेड़ की डाल से लटकने वाले खूबसूरत घोंसले बनाता है. यह घोंसले ऊपर से पतले और नीचे से चौड़े और गोल होते हैं. यह घोंसले पेड़ों पर झूलते तो हैं लेकिन यह इतने मजबूत होते हैं कि आंधी चलने पर भी गिरते नहीं हैं.