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ट्रैफिक नियमों पर सख्ती, शराब पीकर वाहन चलाने वाले 87 चालकों पर 9.65 लाख का जुर्माना

The Duniyadari: केसीजी- सड़क सुरक्षा को लेकर जिला पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। हाल ही में चलाए गए विशेष वाहन चेकिंग अभियान के दौरान शराब पीकर वाहन चलाने वाले 87 वाहन चालकों को न्यायालय ने कुल 9 लाख 65 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

पुलिस ने इन सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय में प्रस्तुत किया था, जहां आरोपियों पर आर्थिक दंड लगाया गया। इसके साथ ही कई मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पुलिस द्वारा अप्रैल 2026 के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी व्यापक कार्रवाई की गई।

इस दौरान मोटरसाइकिल पर तीन सवारी बैठाकर चलने के 258 मामलों में 77,400 रुपये का चालान काटा गया। बिना नंबर प्लेट के 134 वाहनों से 40,200 रुपये का जुर्माना वसूला गया।

बिना हेलमेट के वाहन चलाने वाले 36 लोगों से 18,000 रुपये और सीट बेल्ट नहीं लगाने वाले 17 चालकों से 8,500 रुपये का समन शुल्क लिया गया।

इसके अलावा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने के 2 मामलों में 600 रुपये, मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाने के 5 मामलों में 1,500 रुपये, नाबालिग द्वारा वाहन चलाने के 1 मामले में 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं प्रेशर हॉर्न के 29 मामलों में 8,700 रुपये और अन्य यातायात उल्लंघनों के 83 मामलों में 24,900 रुपये की वसूली की गई।

इस तरह कुल 665 मामलों में 2 लाख 14 हजार 200 रुपये का समन शुल्क वसूला गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

विशेष रूप से शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्ती बरती जा रही है, क्योंकि ऐसे मामलों में दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है।

जिला पुलिस ने बताया कि छह मामलों में लाइसेंस निलंबन के लिए परिवहन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है।

साथ ही जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

कंपनी गार्डन में मधुमक्खियों का हमला, 25 से ज्यादा लोग घायल

The Duniyadari: बिलासपुर- शहर के कंपनी गार्डन स्थित विवेकानंद उद्यान में शुक्रवार सुबह अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने लोगों पर हमला कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में 25 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों को तुरंत उपचार के लिए सिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कई लोगों के चेहरे, कान और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन और दर्द की शिकायत बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग रोजाना की तरह सैर, पूजा-पाठ और व्यायाम के लिए गार्डन पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और लोगों पर हमला कर दिया। स्थिति ऐसी बन गई कि लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। भगदड़ के दौरान कुछ लोग गिर भी पड़े, जिससे उन्हें अतिरिक्त चोटें आईं। कई लोग गोल बाजार और संतोष भवन की ओर भागते हुए दिखाई दिए।

घायलों में नरेश घेलानी, रामकुमार डोडवानी, अशोक टेकचंदानी और श्रीचंद नेहलानी सहित कई लोग शामिल हैं। ये सभी सरकंडा, सिंधी कॉलोनी और मसानगंज क्षेत्र से सुबह की सैर के लिए गार्डन पहुंचे थे।

घटना को लेकर अलग-अलग कारण सामने आ रहे हैं। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि किसी ने मधुमक्खियों के छत्ते से छेड़छाड़ कर दी, जिससे वे भड़क गईं। वहीं कुछ लोगों ने तेज आवाज में बज रहे गाने को भी मधुमक्खियों के आक्रामक होने की वजह बताया। उद्यान प्रभारी श्रीकांत नायर के अनुसार पेड़ के नीचे जलाए गए घी के दीपक से उठे धुएं के कारण मधुमक्खियां उत्तेजित हो गईं। उन्होंने बताया कि पहले भी लोगों को वहां दीपक जलाने से मना किया गया था।

उद्यान प्रबंधन ने माना कि गार्डन में लगे मधुमक्खियों के छत्तों को हटाने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। पहले भी इस समस्या के समाधान के प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। नागरिकों ने गार्डन में सुरक्षा बढ़ाने, नियमित निरीक्षण और संभावित खतरों को समय रहते दूर करने की मांग की है।

फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।

हेडमास्टर पदोन्नति पर हाईकोर्ट की रोक, बस्तर संभाग में शिक्षा विभाग की प्रक्रिया पर सवाल

The Duniyadari: बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बस्तर संभाग में हेडमास्टर पदोन्नति से जुड़े 23 मार्च 2026 के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

प्रारंभिक सुनवाई में अदालत ने आदेश में गंभीर त्रुटियां पाते हुए कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया ऐसे नियमों के आधार पर की गई.

जिन्हें वर्ष 2019 में निरस्त किया जा चुका था, जबकि राज्य में नई पदोन्नति नियमावली 13 फरवरी 2026 से प्रभावी है।

यह मामला दुर्गेश कुमार कश्यप सहित अन्य शिक्षकों द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में कहा गया कि पदोन्नति आदेश वर्तमान नियमों के विपरीत जारी किया गया है।

मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकलपीठ में हुई, जहां याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नई 2026 नियमावली के अनुसार पदोन्नति के लिए TET परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है, जबकि जिन शिक्षकों को पदोन्नति दी गई, वे इस पात्रता को पूरा नहीं करते।

याचिका में यह भी कहा गया कि शिक्षा विभाग का आदेश आरटीई एक्ट, एनसीटीई के विनियमों तथा सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2025 के निर्णय के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि बिना TET पात्रता के पदोन्नति नहीं दी जा सकती।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पदोन्नति आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी।

अदालत के इस निर्णय के बाद बस्तर संभाग में हेडमास्टर पदोन्नति प्रक्रिया फिलहाल अनिश्चितता में आ गई है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में सभी पदोन्नति प्रक्रियाएं नई 2026 नियमावली और एनसीटीई के मानकों के अनुरूप दोबारा संचालित की जाएं, ताकि आगे किसी प्रकार का कानूनी विवाद उत्पन्न न हो।

विधानसभा और सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

The Duniyadari: बिहार विधानसभा को शुक्रवार को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं और विधानसभा परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई।

कार्तिकेय शर्मा, एसएसपी पटना के निर्देश पर बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की टीम मौके पर पहुंची और पूरे परिसर की गहन तलाशी शुरू की गई। सुरक्षाकर्मियों ने विधानसभा भवन के सभी कक्षों, गलियारों और आसपास के इलाकों की जांच की ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।

पुलिस के अनुसार धमकी अज्ञात ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी। मामले की जांच के लिए साइबर सेल को लगाया गया है और मेल भेजने वाले की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा कड़ी रखी गई है।

इसी बीच पटना सिविल कोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिलने की सूचना सामने आई, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई। कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और आने-जाने वाले लोगों की सघन जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि 13 मार्च 2026 को भी इसी तरह बिहार विधानसभा को धमकी दी गई थी। इसके अलावा इससे पहले पटना सिविल कोर्ट समेत कई अन्य अदालतों को भी धमकी भरे संदेश भेजे जा चुके हैं।

फिलहाल दोनों स्थानों पर जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वस्तु की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और अफवाहों से दूर रहें।

स्टील प्लांट हादसा: काम के दौरान 12 फीट से गिरा श्रमिक, हालत गंभीर

The Duniyadari: रायगढ़- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में स्थित रूपाणाधाम स्टील प्लांट में कार्य के दौरान एक गंभीर हादसा हो गया, जिसमें एक 22 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

जानकारी के अनुसार, गेरवानी स्थित रूपाणाधाम स्टील प्राइवेट लिमिटेड में बुधवार रात नियमित काम चल रहा था। इसी दौरान बायरल सेक्शन में तैनात फायरमैन दीपक चौहान (22), निवासी राबो, ड्यूटी के दौरान अचानक लगभग 10 से 12 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गया। गिरने से उसे गंभीर चोटें आईं।

घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने प्रबंधन को सूचना दी। इसके बाद घायल युवक को आनन-फानन में फोर्टिस जिंदल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की। वहीं औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम ने भी प्लांट का निरीक्षण कर घटना की जांच शुरू कर दी है।

अधिकारियों ने बताया कि घटना के समय मौजूद कर्मचारियों से जानकारी ली गई है, लेकिन घायल की हालत गंभीर होने के कारण उसका बयान अभी दर्ज नहीं हो सका है। स्थिति में सुधार के बाद उसका बयान लिया जाएगा।

औद्योगिक सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ तथा सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

फिलहाल युवक की हालत नाजुक बनी हुई है और उसका इलाज अस्पताल में जारी है।

सतरेंगा में वन विभाग की छापेमारी से खुला अवैध लकड़ी कारोबार का जाल, कार्रवाई पर उठे सवाल

The Duniyadari: कोरबा- जिले के सतरेंगा क्षेत्र में वन विभाग की हालिया बड़ी कार्रवाई ने अवैध लकड़ी कारोबार की गहरी परतों को उजागर किया है।

बालको वन परिक्षेत्र में एक साथ छह अलग-अलग स्थानों पर की गई छापेमारी में भारी मात्रा में लकड़ी बरामद की गई, जिसमें पुरानी और नई दोनों तरह की लकड़ी शामिल होने की बात सामने आई है।

इस बरामदगी के बाद मामले की गंभीरता और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

वन विभाग के अनुसार, वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई में कुल 359 नग लकड़ी (लगभग 5.405 घनमीटर) जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 4.25 लाख रुपये बताई जा रही है। अलग-अलग घरों से इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी मिलना यह संकेत देता है कि मामला केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं हो सकता।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि कुछ घरों में वर्षों से रखी गई पुरानी लकड़ी भी जब्ती की सूची में कैसे शामिल हुई।

यदि यह लकड़ी निजी उपयोग के लिए लंबे समय से रखी गई थी, तो उस पर कार्रवाई का आधार क्या है? वहीं, यदि यह अवैध थी, तो इतने समय तक वन विभाग की निगरानी से यह कैसे बची रही?

ग्रामीणों और जानकारों के बीच यह भी चर्चा है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का संग्रह और संभावित व्यापार बिना किसी संगठित संरचना या संरक्षण के संभव नहीं है।

ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं न कहीं सिस्टम की चूक या मिलीभगत की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर, वन विभाग इस कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहा है, लेकिन अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या जांच केवल छोटे स्तर तक सीमित रहेगी या फिर इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद बड़े चेहरों तक पहुंचेगी।

फिलहाल विभाग ने आगे वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। असली परीक्षा अब इस बात की होगी कि जांच निष्पक्ष और व्यापक होती है या यह मामला केवल जब्ती तक ही सीमित रह जाता है।

छत्तीसगढ़ PSC परीक्षा को लेकर नेता प्रतिपक्ष की दो अहम मांगें, समयसीमा बढ़ाने और शुल्क वापसी प्रक्रिया सुधार पर जोर

The Duniyadari: रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राज्य के युवाओं और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के अभ्यर्थियों की समस्याओं को लेकर राज्यपाल और आयोग प्रबंधन को पत्र लिखकर दो प्रमुख मुद्दों पर शीघ्र निर्णय की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि प्रारंभिक परीक्षा परिणाम और मुख्य परीक्षा के बीच पर्याप्त अंतराल न मिलने से अभ्यर्थियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। परंपरा के अनुसार यह अवधि लगभग 100 दिनों की होती रही है, जिससे उम्मीदवारों को विस्तृत तैयारी और उत्तर लेखन का अभ्यास करने का समय मिलता था। लेकिन इस वर्ष परिणाम 25 मार्च को जारी होने के बाद मुख्य परीक्षा 16 मई से निर्धारित की गई है, जिससे केवल लगभग 51 दिन का समय ही मिल पा रहा है। इसे उन्होंने अभ्यर्थियों के लिए मानसिक दबाव बढ़ाने वाला और “नैसर्गिक न्याय” के सिद्धांत के विपरीत बताया है।

दूसरी ओर, उन्होंने परीक्षा शुल्क वापसी की प्रक्रिया को भी जटिल बताया है। वर्तमान व्यवस्था में अभ्यर्थियों से दोबारा बैंक विवरण मांगे जाते हैं, जिसके कारण कई उम्मीदवार तकनीकी कारणों या समय सीमा की कमी से रिफंड प्राप्त नहीं कर पाते। उन्होंने सुझाव दिया है कि आवेदन के समय जिस बैंक खाते से शुल्क का भुगतान किया गया है, उसी खाते में परीक्षा में शामिल होने के बाद स्वतः राशि वापस की जानी चाहिए, ताकि प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बन सके।

चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री और आयोग अध्यक्ष से अपील की है कि पुरानी परंपराओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षा तिथि में आवश्यक संशोधन किया जाए और शुल्क वापसी की प्रणाली को अधिक आसान बनाया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

राज्यसभा में हरिवंश की वापसी, राष्ट्रपति ने फिर किया मनोनयन — छह साल और निभाएंगे उपसभापति की भूमिका

The Duniyadari: नई दिल्ली : राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल 10 अप्रैल को समाप्त होने वाला था और माना जा रहा था कि उच्च सदन से उनकी विदाई तय है। लेकिन अंतिम समय में घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया और उन्हें एक बार फिर राज्यसभा में बने रहने का अवसर मिल गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए हरिवंश को राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया है। इस संबंध में गृह मंत्रालय की ओर से आधिकारिक गजट अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इस फैसले के बाद अब स्पष्ट हो गया है कि हरिवंश अगले छह वर्षों तक उच्च सदन के सदस्य बने रहेंगे।

यह राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका तीसरा कार्यकाल होगा। उल्लेखनीय है कि उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बार उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय नहीं लिया था, जिसके कारण उनके कार्यकाल के समाप्त होने के साथ ही विदाई लगभग तय मानी जा रही थी।

संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को राज्यसभा में 12 सदस्यों को नामित करने का अधिकार प्राप्त है। इसी प्रावधान के अंतर्गत एक नामित सदस्य के सेवानिवृत्त होने से खाली हुई सीट पर हरिवंश को मनोनीत किया गया है। अब उनके राज्यसभा में बने रहने के साथ ही उपसभापति पद पर भी उनकी भूमिका जारी रहने की संभावना मजबूत हो गई है।

तीन माह से अंधेरे में था कुरुडीह, कलेक्टर के निर्देश पर लगा नया ट्रांसफार्मर, लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश

The Duniyadari: कोरबा — ग्राम कुरुडीह के ग्रामीणों ने लंबे समय से खराब पड़े ट्रांसफार्मर की समस्या को लेकर कलेक्टर कुणाल दुदावत से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग तीन महीने से ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण पूरे गांव में बिजली आपूर्ति ठप थी, जिससे दैनिक जीवन के साथ-साथ खेती-किसानी और अन्य आवश्यक कार्य भी प्रभावित हो रहे थे।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार विद्युत विभाग को शिकायत दी, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लगातार लापरवाही के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता रोशन वर्मा को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देश के बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्राम कुरुडीह में नया विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली।

लंबे समय तक समस्या के समाधान में देरी पर कलेक्टर ने नाराज़गी जताई और भैसमा वितरण केंद्र के अंतर्गत कार्यरत सब इंजीनियर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जन समस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आम जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

नक्सलियों के नाम पर जज को धमकी, 3 करोड़ की फिरौती मांगी, सुरक्षा बढ़ाई गई

The Duniyadari: छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में पदस्थ एक न्यायिक अधिकारी को जान से मारने की धमकी मिलने से प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। गुण्डरदेही में कार्यरत प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन को डाक के जरिए एक बंद लिफाफा मिला, जिसमें उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई है।

धमकी भरे पत्र में भेजने वाले ने खुद को नक्सली संगठन से जुड़ा बताया है और 3 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की है। मजिस्ट्रेट ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 27 मार्च को दोपहर के समय पोस्टमैन के जरिए यह पत्र प्राप्त हुआ।

पत्र में लिखा गया है कि यदि निर्धारित रकम नहीं दी गई तो मजिस्ट्रेट और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही पत्र में आरोप लगाया गया है कि न्यायिक अधिकारी रिश्वत लेकर फैसले करते हैं और गरीबों को परेशान किया जा रहा है।

पत्र में यह भी दावा किया गया है कि धमकी देने वाले बस्तर, कांकेर, ओडिशा और झारखंड क्षेत्र में सक्रिय नक्सली संगठन से जुड़े हैं। हालांकि पुलिस इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है कि यह वास्तव में नक्सलियों का मामला है या किसी शरारती तत्व की साजिश।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुण्डरदेही थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीमों को पत्र के स्रोत का पता लगाने में लगाया गया है। वहीं न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।